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Saturday, 9 May 2020

कांग्रेस सीए प्रकोष्ठ ने भाजपा की आर्थिक नीतियों को लेकर आरोप लगाए

जयपुर।  राजस्थान कांग्रेस सीए प्रकोष्ठ के अध्यक्ष, सीए विजय गर्ग ने भाजपा की आर्थिक नीतियों को लेकर एक बार पुनः आरोप लगाए हैं, कोविड-19 के चलते हुए 24 मार्च 2020 को केंद्र सरकार ने एक नया नोटिफिकेशन जारी कर एमएसएमई (MSME) से संबंधित उद्योगों के लिए एक नई सिर दर्दी पैदा कर दी है | इस नोटिफिकेशन में यह कहा गया है की, “यह एमएसएमई की सुरक्षा के लिए है “ जबकि कोविड-19 के तहत देश में जो आर्थिक मंदी आई है उस मंदी को देखते हुए यह सरकारी आदेश इन्हीं छोटे उद्योग और व्यापारियों के लिए सर दर्द का कारण बन गया है |

इस आदेश के तहत अब यह एमएसएमई (MSME) से जुड़े हुए उद्योग जिनकी लेनदारी (Operational Creditors) एक करोड़ ( Rs, One Crore) रुपए से कम है वह अपनी राशि वसूल करने के लिए  (Insolvency and Bankruptcy Code 2016) आईबीसी (IBC) के तहत एनसीएलटी (NCLT)  ( National Company Law Tribunal ) में नहीं जा सकेंगे, जबकि पहले यह राशि एक लाख( Rs. One Lacks) की थी |

 गर्ग ने बताया कि , केंद्र सरकार के द्वारा वर्ष 2016 में आईबीसी कानून लाया गया था, इसके तहत भारत में “इज ऑफ डूइंग बिजनेस” की रैंकिंग में अंतरराष्ट्रीय स्तर में काफी सुधार हुआ था | इस कानून के अनुसार अगर कोई व्यक्ति, फर्म, कंपनी ,एचयूएफ, या अन्य कोई स्टेटस का व्यक्ति किसी कंपनी या ऐसी फर्म जो भारतीय कंपनी कानून (Companies Act 2013) के तहत रजिस्टर्ड हो उससे ₹1,00,000/- या उससे अधिक मांगती थी और वह कंपनी उस राशि को देने में सक्षम नहीं है या भुगतान मे चलाकर देरी कर रही है तो बड़ी कंपनियों में जो छोटे-छोटे उद्योग व्यापार से जुड़े हुए एमएसएमई उद्योग के व्यक्ति अपने माल की या सेवाओं की सप्लाई किया करते थे उनका भुगतान प्राप्त नहीं होने पर वे वसूली के एनसीईआरटी की मदद ले सकते थे | लेकिन अब इस राशि को बढ़ाकर एक करोड़ कर दिया गया है इसके कारण छोटे उद्योग व्यापारी को आईबीसी कानून के तहत एनसीएलटी में जाने में परेशानी होगी और वह 24 मार्च के बाद इस वसूली के लिए अपना प्रार्थना पत्र नहीं लगा सकते अब उनको अपनी वसूली के लिए अन्य पुराने तरीके काम में लेने पड़ेंगे, जिस कारण उनको लंबी कानूनी प्रक्रिया एवं अवधि का सामना मंदी में भी अपनी राशि वसूली के लिए करना पड़ेगा | जबकि इस 2016 के आईबीसी कानून के तहत इस तरह के प्रार्थना पत्र को एनसीएलटी के द्वारा मात्र 14 दिन में स्वीकार या रिजेक्ट किया जाता था और 180 दिन से लेकर 270 दिन के अंदर उस छोटे उद्योग व्यापारी को या लेनदार को उसकी राशि के भुगतान का आदेश मिल जाया करता था | इस तरीके से यह 2016 का कानून आईबीसी के तहत लेनदारी वसूल करने का बहुत ही कम समय में एक अच्छा कानून था और इससे छोटे उद्योग में व्यापारियों को काफी मदद मिल रही थी |

केंद्र सरकार ने आईबीसी कानून 2016 की धारा 4 में अपनी शक्तियों का प्रयोग करते हुए 24 मार्च 2020 को इस (Threshold) लिमिट को एक लाख से बढ़ाकर एक करोड़ कर दिया है | इस आईबीसी कानून के तहत ऐसा कोई भी व्यापार जो भारतीय कंपनी कानून 2013 के तहत रजिस्टर्ड है,  उनसे अगर किसी को अपनी लेनदारी (Creditors) वसूल करनी है तो वह इस कानून का की मदद ले सकता है वैसे अन्य भी बहुत सारे कानून है जिसके तहत वह अपनी लेनदारी को वसूल कर सकता है लेकिन उन सब में लंबी कानूनी प्रक्रिया का सामना करना पड़ता था | इस कानून को दिवालिया संशोधन एवं  असमता कानून के नाम से जाना जाता है और भारत में यह एक दिसंबर 2016 से लागू हुआ था |

गर्ग ने बताया कि दूसरी ओर ऐसी एमएसएमई फर्मे एम व्यापारी जो कंपनी कानून के तहत पंजीकृत हैं यदि उन पर कोई दूसरा व्यक्ति अपनी लेनदारी के लिए केस करता था तो इस कानून के तहत यदि इन एमएसएमई को भुगतान में परेशानी होती थी तो उनके रिवाइवल का प्रोग्राम भी बनाया जाता था इस कारण छोटी फर्मे एम व्यापारी रिवाइवल होकर वापस अपना व्यापार करने में सफल हो जाती थी, और रोजगार के साथ-साथ देश के आर्थिक विकास में अपना योगदान देती थी| जबकि अन्य किसी भी लेनदारी के वसूली कानून में रिवाइवल का प्रावधान नहीं है| यदि यह एमएसएमई या छोटी फर्मे भुगतान करने में सक्षम नहीं है तो उनको दिवालिया घोषित करके बंद करना पड़ता था जिस कारण छोटे उद्योग व्यापार को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता था और छोटी मोटी लेनदारी में भी उनको रिवाइवल का मौका नहीं मिलता था | सरकार के इस नए नोटिफिकेशन के बाद छोटे उद्योग व्यापार को मंदी से चलते हुए अब रिवाइवल का मौका भी नहीं मिलेगा |

गर्ग  ने बताया कि  कोरोना वायरस के चलते देश में आर्थिक मंदी का माहौल है और इसका सबसे ज्यादा असर छोटे उद्योग एवं व्यापारियों पर पड़ा है या एमएसएमई (MSME) सेक्टर पर पड़ा है, क्योंकि इस तरह के उद्योग अपना अधिकांश व्यापार बड़े उद्योगों को अपना विक्रय माल के रूप में या सेवाओं के रूप में किया करते थे और इस मंदी के चलते हुए उन सब के भुगतान एवं लेनदारी पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा एवं इन सब की राशि छोटी होने के कारण अब यह इस कानून का फायदा भी नहीं उठा पाएंगे और जिसके चलते हुए इनको अपना व्यापार या तो बंद करना पड़ेगा या अपनी लेनदारी को वसूली करने के लिए लंबी कानूनी कार्यवाही का सामना करना पड़ेगा इन सब को देख कर लगता है कि केंद्र में भाजपा की सरकार एमएसएमई को समाप्त करने के लिए यह कदम उठा रही है और एमएसएमई के हितों पर कुठाराघात कर रही है | यह नया आदेश आने वाले समय में जैसे ही लोकडाउन खत्म होगा और देश में आर्थिक एवं अन्य गतिविधियां सुचारू रूप से चलेगी तो इनको अपना पैसा वसूल करने में या अपने भुगतान को प्राप्त करने में परेशानी होगी | यह केंद्र सरकार का नया आदेश छोटे उद्योग व्यापारियों के लिए विशेष रूप से एमएसएमई के लिए एक सिरदर्द बन कर उभरेगा और उनको समाप्ति की ओर ले जाएगा |

 कांग्रेस सीए प्रकोष्ठ ने प्रधानमंत्री को ज्ञापन भेजकर इस विषय में पुन: विचार करने के लिए लिखा है और इस नए आदेश के जो नकारात्मक प्रभाव देश के छोटे उद्योग एवं व्यापारियों पर पड़ेंगे एवं एमएसएमई समाप्ति की ओर चली जाएगी उस पर ध्यान आकर्षित करते हुए ज्ञापन भेजा है और इस सीमा को दोबारा एक लाख (Rs. One Lacks) करने का आग्रह किया है या इस नोटिफिकेशन को केंद्र सरकार को वापस लेने के लिए निवेदन किया है, जिससे देश में आर्थिक मंदी को देखते हुए इन छोटे उद्योग व्यापार के योगदान को सरकार समझ सके और इनको देश के आर्थिक विकास में अपना योगदान निभाने में सक्षम बना सके |














































































































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