इंटरनेशनल मदर्स डे पर विशेष : कोविड-19 लाया सेलिब्रेशन कल्चर में ड्रास्टिक चैंज - Pinkcity News

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Saturday, 9 May 2020

इंटरनेशनल मदर्स डे पर विशेष : कोविड-19 लाया सेलिब्रेशन कल्चर में ड्रास्टिक चैंज

जयपुर, 9 मई : कोविड-19 के मद्देनजर दुनिया की तवारीख में यह पहला मौका होगा जब इंटरनेशनल मदर्स डे को नए सदंर्भों के साथ 10 मई को दुनिया के हर कोने में सेलिब्रेट करेंगे। हर साल गुलाबी शहर में मदर्स डे पर कई कार्यक्रम हुआ करते थे। लजीज व्यंजनों के साथ म्यूजिक की लय पर कई ख्वाब थिरकते थे, परन्तु आज पलक झपकने के साथ कोविड-19 ने सेलिब्रेशन कल्चर में ड्रास्टिक चैंज ला दिया है।
चमक-धमक से दूर हर सेलिब्रेशन में अब सोश्यल डिस्टेंसिंग, सेनेटाइजर, मास्क जैसे गवर्नमेंट रुल को फोलो करना कम्पलसन हो गया है। अब लापरवाही की कीमत भी चुकानी होगी। शुबहा नहीं कि बदले हालातों में दुनिया सोश्यल मीडिया, फेसबुक में सिमटती जा रही है। यही कारण है कि कोविड-19 काल में इंटरनेशनल मदर्स डे भी किसी फेसबुक पेज ही लोगों से जुड़ेगा जो किसी वर्चुअल रियलिटी का अहसास भी कराएगा। वैश्विक महामारी कोरोना वायरस  से आज हर शख्स खौफजदा है। ऐसी हालातों पर मशहूर बॉलीवुड गीतकार गुलजार का कहना, सन्नाटा यह बतला रहा है कि इंसानों ने प्रकृति को बहुत  नुकसान पहुंचाया है...। दुनिया घरों में कैद है, वहीं हर कार्यक्रम भी फेसबुक में कैद होते जा रहे हैं। हर साल मदर्स डे पर दिलचस्प चर्चाओं के साथ समाज के लिए उल्लेखनीय कार्य करने वाली महिलाओं का भी सम्मान किया जाता रहा है ताकि समाज को प्रेरणा मिले।

हौसलों से करनी होगी दुनिया से कदमताल - दीप्ति गैरोला
 
कोविड काल में इस बार समाज की कई अग्रणी महिलाओं ने जरूरतमंद लोगों को मुक्तहस्त राशन सामग्री वितरण कर वाकई में एक मिसाल कायम की है।  गोल्डन लीफ फाउंडेशन की डायरेक्टर दीप्ति गैरोला ने बताया कि उन्होंने  मार्च में पहले लॉकडाउन से ही सरकार के साथ मिलकर जरूरतमंद लोगों को मदद का बीड़ा उठाया है जो तीसरे लॉक डाउन में भी जारी है। वे शहर के विभिन्न स्थानों पर जरूरतमंद लोगों को राशन सामग्री वितरित करने के साथ करीब 50 परिवार को भी गोद लेने का बीड़ा उठा चुकी हैं ताकि कोई भूखा न रहे। वे बताती हैं कि हमेशा से शहर की कच्ची बस्तियों में रहने वाले शिक्षा से वंचित को बच्चों को शिक्षा से जोड़ने के साथ उनके बेहतर स्वास्थ्य के लिए प्रेरित करती रही हैं। आर्मी कर्नल की वाइफ दीप्ति गैरोला ने बताया  कि कोविड-19 ने इंसानी सभ्यता को जीने के नए तौर-तरीके अपनाने का हुक्म दे दिया है। अब यह जरूरी हो गया है कि हौसलों व फासलों के साथ दुनिया से कदमताल करना होगा।


अहम हुए सामाजिक फासले के फैसले : डॉ.अनुपमा सोनी

पूर्व मिसेज एशिया इंटनेशनल डॉ.अनुपमा सोनी ने बताया कि हर बार वे मदर्स डे पर बहुत से कार्यक्रमों में नवाजी जाती रही हैं। इस बार कुदरत का संदेशा है कि इंसान खुद अपनी जीवन शैली बदलें वर्ना जीवन की सांसें थमने में समय नहीं लगेगा। यह वाकई मुश्किल भरी राह है, जिस पर पारंपरिक तौर पर चलना आसां नहीं है। उन्होंने बताया कि इस बार उन्होंने कई सामाजिक संगठनों और सरकार के साथ मिलकर जरूरतमंद लोगों की भोजन व्यवस्था में सहयोग किया।  इससे पहले भी वे समाज की मैनस्ट्रीम से परे वर्ग की मदद करती रही हैं। पेशे से डेंटिस्ट अनुपमा ने बताया कि कोरोना काल ने जहां रिश्तों की गहराई समझायी है, वहीं समाज से फासले को नई संदर्भों के साथ मायने भी बतलाए हैं।

जीवन बदला तो मिला नया आसमां :  पल्लवी मित्तल पसारी

पूर्व मिसेज इंडिया क्वीन ऑफ हार्ट्स वेस्ट  पल्लवी मित्तल पसारी ने कहा कि कोविड-19 में उन्होंने अपने हाथों से खूब मास्क बनाए तो जरूरतमंद लोगों को वितरित भी कराए। इस बार समाज में बहुत सी बातों में बदलाव आया है। हम सभी एक डर के साथ जीवन जी रहे हैं, लेकिन डर के आगे जीत है, यही बात हौसला देती है। एकबारगी लगा कि दुनिया खत्म हो जाएगी, लेकिन जीवन शैली बदली तो नया आसमां मिल गया ।

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