ज़रूरत है कोरोना महामारी के आध्यात्मिक मायने समझ कर इसका सामना करने की : बी के सुषमा - Pinkcity News

Breaking News

Tuesday, 28 April 2020

ज़रूरत है कोरोना महामारी के आध्यात्मिक मायने समझ कर इसका सामना करने की : बी के सुषमा

जयपुर।  कोरोना महामारी की चपेट में आये दुनिया के कई देश सहम गए हैं, जिनमे भारत भी शामिल है। पूरे देश में जन-जीवन अस्त व्यस्त होकर ठहर गया है और इस से निपटने के लिए सरकार द्वारा लगाए गए लॉक डाउन  की वजह  से अपने घरो में क़ैद से हो गए हैं। दुसरे विश्व युद्ध के बाद सदी की सबसे बड़ी इस घटना पर आध्यात्मिक जगत की क्या प्रतिक्रिया है, दुनिया की प्रमुख आध्यात्मिक  संस्था ब्रह्माकुमारीज़ जो अपने  8000 केन्द्रो के ज़रिये दुनिया के करीब 140 देशो में फ़ैली हुई है, का मानना है कि इस घटना के आध्यात्मिक मायने हैं और तेज़ी से संसार परिवर्तन होना है। यही वजह है कि इस घटना ने बड़े  और छोटे कई देशो को अपनी चपेट में लेकर यह सन्देश दे दिया है कि विश्व एक है और एक ही ईश्वर द्वारा रचा  गया है। ताकि इंसान "वन गॉड, वन वर्ल्ड फ़ैमिली" के सिद्धांत को समझ कर स्वयं के परिवर्तन द्वारा संसार  में परिवर्तन का जरिया बन सके। 
संस्थान का कहना है कि पिछले कुछ समय से संसार बड़ी तेज़ी से बदला है और नैतिक मूल्यों में तेज़ी से गिरावट आई है, समाज से भाईचारा, प्रेम संवेदनाए समाप्त हो रही हैं  और अपराध, अत्याचार की बढ़ती घटनाओ की वजह से पृथ्वी पर नकारात्मक प्रकम्पनों में बढ़ोत्तरी हुई है।  आज कोरोना के इस मुश्किल दौर में लोग सारे काम काज छोड़ कर घर में बैठने को मजबूर है, ऐसे में इस वक़्त को स्वयं की आध्यात्मिक ऊर्जा को बढ़ाने और अपने अस्तित्व को जानने में लगाया जाए कि "हम कौन हैं , कहाँ से आये हैं और वापस कहाँ जाना है "। आज कोरोना की वजह से लोगो में करुणा जगी है, वो एक दूसरे की मदद कर रहे है, गरीबो को खाना खिला रहे है और इंसान को अपनी सीमाओं का भी आभास  हो रहा है, पर्यावरण को भी इंसान ने इतना दूषित कर दिया है कि उसको भी साफ होने का मौका मिल गया है।
संस्थान की जयपुर सबज़ोन की प्रमुख संचालिका  ब्रह्माकुमारी सुषमा बहन का कहना  है कि यह दौर डरने का नहीं है बल्कि मनुष्य के लिए यह परीक्षा की घड़ी है जिसमे मैडिटेशन के ज़रिये खुद को, अपने मन की शक्ति को बढ़ाकर, अपनी आत्मा की शक्ति को बढ़ा कर स्वयं को सशक्त बनाकर इस मुश्किल दौर से निकलना है।
मन का सीधा संबंध शरीर और स्वास्थ्य से है, और राजयोग मैडिटेशन के ज़रिये हम स्वयं को परम सत्ता से जोड़ते हैं तो मन मजबूत होता है और इम्युनिटी बढ़ती है,  जिस से शरीर की रोगो से लड़ने की क्षमता बढ़ती है जो इस घातक वायरस के ख़िलाफ़ सुरक्षा कवच का काम करता है और उसे मात दिया जा सकता है । जो लोग नियमित रूप से मैडिटेशन का अभ्यास करते है उनका स्वास्थ्य अच्छा रहता है और आत्मिक चेतना  की बदौलत वो इस बीमारी से उपजे माहौल और लॉक डाउन की वजह से तनाव और मानसिक अवसाद का भी शिकार नहीं होते हैं। 
ब्रह्माकुमारीज़ संस्थान का हेडक्वार्टर राजस्थान के माउंट आबू में स्थित है।  बी के  सुषमा बहन का कहना है कि दुनिया के सभी देशो में संस्था से जुड़े लाखो भाई बहन और परिवार रोज़ाना कई घंटे मैडिटेशन करते है ताकि कोरोना की वजह से जो  नकारात्मकता दुनिया भर में फ़ैल गयी है, लोगो में जो डर और तनाव व्याप्त हो गया है, सामूहिक मैडिटेशन के अभ्यास के ज़रिये वातावरण में सकारात्मक प्रकम्पन फैलाये जा सके।
इस मुश्किल दौर से पूरी तरह से उबरने में जितना भी वक्त लगे, हमे इसका महत्व समझते हुए इसका सकारात्मक इस्तेमाल करना चाहिए। आपस में प्रेम और भाईचारे को बढ़ाकर संसार को बदलने में ईश्वर की योजना में शरीक हों।  संस्थान का मानना है कि यह भाव लोगो की सोच और जीवन शैली को परिवर्तन करेगा और सम्पूर्ण विश्व को कई आर्थिक और सामाजिक चुनौतियों का सामना करने के लिए एक जुट हो "वन गॉड, वन वर्ल्ड फ़ैमिली" के सिद्धांत को और मजबूत करना होगा।
जयपुर स्थित वैशाली नगर सेवाकेंद्र पर सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए सुबह और शाम योग किया जाता है, ताकि योग के शक्तिशाली प्रकम्पनों के द्वारा जयपुर के लोगो में सकरात्मकता का माहोल पैदा हो
ब्रह्माकुमारी चंद्रकला बहन का कहना है कि लोगो को परमात्मा की योजनाओ को समझते हुए इस वक्त को यूँ ही ज़ाया नहीं जाने देना चाहिए और इसका इस्तेंमाल राजयोग मैडिटेशन को सीखकर अपना आत्मिक बल बढ़ाने में करना चाहिए। इसके लिए सुबह सूर्योदय का समय सबसे श्रेष्ठ होता है जब प्रकृति में भी सकारात्मक और शुद्ध एनर्जी के वाइब्रेशन होते है। जो लोग इस समय का सदुपयोग अपनी दिनचर्या और खानपान को सुधारने में करेंगे उन्हें इस समय का भरपूर लाभ मिलेगा और साथ ही स्वयं का और समाज का  नव निर्माण कर सकेंगे।

No comments:

Post a comment

Pages