''जयपुर के स्ट्रीट फ़ूड से जुड़ी रेसिपी 'सेव अमरुद की कढ़ी' मेरी फेवरेट'' : शेफ सदाफ - Pinkcity News

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Sunday, 9 February 2020

''जयपुर के स्ट्रीट फ़ूड से जुड़ी रेसिपी 'सेव अमरुद की कढ़ी' मेरी फेवरेट'' : शेफ सदाफ

  • - बुक 'दास्तां-ए-दस्तरखान' पर चर्चा और लाइव फ़ूड डेमो रहा काफी खास
  • - नंदिता मित्तल और रचिता बत्रा ने किया चर्चा को मॉडरेट
जयपुर, 9 फ़रवरी। मुस्लिम किचन से निकले खाने के लिए लोगो को अक्सर यहीं भ्रम होता है कि उसमें सिर्फ नॉन वेज डिश ही पकती है, मैं अपनी कुकिंग बुक के माध्यम से यहीं भ्रम तोड़ना चाहता हूं कि मुस्लिम किचन में उतना ही स्वादिस्ट वेज खाना भी बनाया जाता है, ये कहना था मास्टरशेफ इंडिया के फाइनलिस्ट, ऑथर और जाने-माने शेफ सदाफ हुसैन का।
रजत बुक कार्नर, हशेत इंडिया और हॉप्स एन टेटर्स के संयुक्त तत्वावधान में कहानियों, खान-पान और चर्चाओं के बीच रविवार शाम गुजरी। सहकार मार्ग स्थित हॉप्स एंड टेटर्स में आयोजित हुए 'दास्तां-ए-दस्तरखान' में हुसैन ने अपनी बुक में 'दास्तां-ए-दस्तरखान' लिखी मुस्लिम किचन से निकली डिशेस और रेसिपीज़ पर चर्चा की। इस दौरान चर्चा को होटेलियर और इमेज कंसलटेंट श्री नंदिता मित्तल और पैशनेट कुक श्री रचिता बत्रा ने मॉडरेट किया।

- घर के सभी लोगों के साथ खाना खाने का प्रतिक दस्तरखान -
नंदिता ने बुक के नाम में दस्तरखान का मतलब पूछा, जिस पर हुसैन ने बताया कि दस्तरखान वो कपड़ा होता है जिसे डाइनिंग टेबल पर बर्तन के नीचे बिछाया जाता है। वो एक कपड़ा घर के सभी लोगों के साथ खाना खाने का प्रतिक है। वो टेबल पर होने वाली सभी किस्सों कहानियों में शामिल होता है। खाने के पीछे की ऐसी ही कुछ कहानियां मैंने अपनी किताब में भी शामिल की है। कार्यक्रम में सदाफ ने किताब में लिखी चुनिंदा रेसिपीज़ का लाइव कुकिंग डेमो भी प्रस्तुत किया। जिसमें 'रतालू कचालू आलू चाट', 'वांदिकाई भिंडी' 'सेव अमरुद कढ़ी' सभी फ़ूड लवर्स को काफी पसंद आई। इसी के साथ शेफ ने रेसिपीज़ से जुड़ी कहानियां और ट्रेडिशनल कल्चरल कुज़ीन के बारे में अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि मुझे घूमने का काफी शौक है, इंडिया का ऐसा कोई स्टेट नहीं होगा जहां का मैंने स्ट्रीट फ़ूड नहीं चखा। ऐसे में मैं हर शहर की स्ट्रीट फ़ूड को काफी एन्जॉय करता हूं। वहां से ट्रेडिशनल खाने और उसके पीछे की कहानियों को आसानी से जाना जा सकता है। किसी भी शहर की रूह उसके स्ट्रीट फ़ूड में ही है। मेरी बुक में जयपुर के स्ट्रीट फ़ूड से जुड़ी रेसिपी 'सेव अमरुद की कढ़ी' को लोगों ने काफी पसंद किया है।

- मां के पैरेलिसिस अटैक के बाद किचन में काफी समय गुजरा-
रचिता बत्रा के सवाल का जवाब देते हुए सदाफ ने बताया कि रांची में पला बढ़ा हूं। मुझे बचपन से खाना बहुत पसंद था, जब मैं स्कूल में था तभी मेरा वजन 85 किलो था। तीसरी क्लास में था तब मां को पैरेलैटिक अटैक आया, उसके बाद घर में हाथ बटाने के लिए किचन में भी वक्त गुजरता था। वहां से मुझे खाना पकाने में भी मजा आने लगा। इसके बाद एक दोस्त के साथ मिलकर कई दोस्तों के घर में अपना छोटा सा फ़ूड स्टोर चालू किया। जहां हर रविवार हम लोगों को अलग अलग घर में ही खाने पर बुलाते थे। ऐसे ही एक दिन मस्ती में मास्टरशेफ इंडिया में ट्राय करने का सोचा था। वहां सिलेक्शन होना लाइफ का सबसे बड़ा मोमेंट था, जिसके बाद मैंने लाइफ में रिस्क लेना सीखा।

ये कार्यक्रम 'बुक इस अ स्मार्टेस्ट हैंडहेल्ड डिवाइस' के तहत आयोजित किया गया, जिसके बारे में मोहित बत्रा ने बताया कि हम अपनी इस पहल के जरिये लोगों में किताब पढ़ने की रूचि को बढ़ावा देना चाहते है। साथ ही ऐसे इवेंट्स से हम लोगों को किताब और उनके ऑथर्स से रूबरू कर बुक रीडिंग को प्रमोट कर रहे है।

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