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Friday, 7 February 2020

आने वाला समय सोलर एनर्जी का, सेंसर्स के उपयोग से होगी राहें आसान

जयपुर।   अजमेर रोड स्थित जेके लक्ष्मीपत यूनिवर्सिटी में सस्टेनेबल डवलपमेंट गोल्स एवं इनोवेषन्स विषय पर आयोजित दो दिवसीय इंटरनेषनल कांफ्रेंस शुक्रवार से शुरू हुई। इसमें पहले दिन विभिन्न सत्रों के दौरान सोलर एनर्जी, नाॅन रिन्यूएबल एनर्जी सोर्सेज, हेल्थ सेक्टर, एग्रीकल्चर, सेंसर तकनीक, एन्वायरमेंट, ग्लोबलाइजेषन, टेक्नोलाॅजी, एजुकेषन, बिजनेस, ट्रांस डिसीप्लीनरी अप्रोच जैसे विषयों पर एक्सपट्र्स ने सस्टेनेबल डवलमेंट को लेकर विभिन्न सत्रो में चर्चा की। राजस्थान के मंत्री डाॅ सुभाष गर्ग मुख्य अतिथि के रूप में उद्घाटन सत्र को संबोधित करेंगे। यूनिवर्सिटी के वाईस चांसलर प्रो आरएल रायना एवं आरएनडी डीन डाॅ ज्योतिप्रकाष सीआर नायडु ने अतिथियों का स्वागत किया कांफ्रेंस के विभिन्न सत्रो की जानकारी दी। कार्यक्रम की शुरूआत न्यूयाॅर्क के यूनाइटेड नेषन्स एकेडमिक इम्पेक्ट के विख्यात प्रोफेसर सूजी थाॅमस की।

कोयले एवं तेल का उपयोग घटा
जी साइंटिस्ट एवं आरडीआई हैड डाॅ एसके देषपांडे ने अपने सत्र में बताया कि कोयले एवं तेल का उपयोग पहले 85 प्रतिषत होता था जो कि घटकर अब 65 प्रतिषत हो गया है। उन्होंने कहा कि सोलर एनर्जी का उपयोग अब अधिक हो रहा हैै एवं आने वाला समय भी सोलर एनर्जी का ही है। उन्होंने कहा कि सोलर एनर्जी का भंडार है बस इसके बेहतर उपयोग की ओर ध्यान देने की आवष्यक्ता है। उन्होंने सेंसर्स के उपयोग से हेल्थ सेक्टर में क्रांतिकारी परिवर्तन आने की बात कही।

अब कोल्ड स्टोरेज किसानों की पकड में
सोलर तकनीक से चलने वाले कोल्ड स्टोरेज बनाने में प्रारंभिक स्तर पर बेहतर सफलता प्राप्त हुई है एवं देष में जल्द ही सरकार इसे सब्सिडी रेट्स पर किसानों के लिए उपलब्ध करवाएगी। इससे हार्टिकल्चर प्रोडक्ट्स के खराब होने की प्रायिकता काफी घटेगी एवं किसानों के लिए लाभ की स्थितियां बेहतर बनेगी।

चायना से ़घटानी होगी निर्भरता
जेकेएलयू निदेषक डाॅ संजय गोयल ने कहा कि देष में अब आवष्यक्ता है स्वयं के सोलर पैनल तैयार करने की। वर्तमान में चायना पर ही पूरी तरह से निर्भरता बनी हुई है। उन्होंने कहा कि देष में अब ऐसे स्टार्टअप्स की आवष्यक्ता है जिससे देष में ही ये तैयार हो। 

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