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Sunday, 12 January 2020

किशोर गर्भावस्था के खिलाफ जागरुकता मुहिम की शुरुआत, स्वास्थ्य मंत्री ने लॉन्च किया जीरो टीनएज प्रेगनेंसी कैम्पेन

जयपुर 12 जनवरी । राजस्थान राज्य एड्स नियंत्रण सोसाइटी और पॉपुलेशन फाउंडेशन ऑफ इंडिया (पीएफआई) के संयुक्त त्वावधान में राष्ट्रीय युवा दिवस के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम में, राजस्थान के स्वास्थ्य मंत्री रघु शर्मा ने पॉपुलेशन फाउंडेशन ऑफ़ इंडिया के जीरो टीनएज प्रेग्नेंसी अभियान को अपना पूर्ण समर्थन दिया। पीएफआई की ओर से ये अभियान कम उम्र में गर्भावस्था के खिलाफ जनजागरुकता पैदा करने के उद्देश्य से शुरू किया गया है। 

इस अभियान के तहत राजस्थान में किशोरों के स्वास्थ्य एवं विकास के संबंध में किशोर गर्भावस्था रोकने को एक महत्वपूर्ण कारक की तरह समझाने के लिए आम लोगों, निर्वाचित प्रतिनिधियों,  सरकारी अधिकारियों और अन्य सामुदायिक भागीदारों को शामिल किया जाएगा ताकि किशोर गर्भावस्था की किसी भी संभावना को प्रभावी तरीके से रोका जा सके। स्वास्थ्य मंत्री ने अभियान की शुरुआत 'जीरो टीनएज प्रेग्नेंसी' का नारा लिखा हुआ प्लेकार्ड अपने हाथों से सभी लोगों को दिखाकर की।

इस मौके पर पॉपुलेशन फाउंडेशन ऑफ इंडिया की वरिष्ठ राज्य कार्यक्रम अधिकारी निकिता श्रीवास्तव ने कहा कि " अभियान का उद्देश्य राजस्थान राज्य में किशोर गर्भावस्था के बारे में अधिक से अधिक जागरूकता पैदा करना है  और इससे जुड़े सभी हितधारकों को किशोर गर्भावस्था को समाप्त करने के लिए मजबूती से प्रतिबद्ध बनाने के लिए प्रोत्साहित करना है। राजस्थान की जनसंख्या में हर पांचवां व्यक्ति एक किशोर है और यदि उनका स्वास्थ्य बेहतर होता है तो इससे राज्य की सामाजिक और आर्थिक तस्वीर पर महत्वपूर्ण असर पड़ेगा।” उन्होंने आगे कहा कि "हम आशा करते हैं कि समाज के नागरिक, सरकारी अधिकारी,  विधायक और साथ ही जमीनी कार्यकर्ता भी इस अभियान में शामिल होंगे और कच्ची उम्र में विवाह और गर्भधारण को समाप्त करने के लिए प्रतिबद्ध होंगे।"

राष्ट्रीय परिवार एंव स्वास्थ्य सर्वे-4 (NFHS-4) के अनुसार राजस्थान में 35 प्रतिशत लड़कियों का 18 वर्ष की उम्र होने से पहले ही विवाह  हो जाता है और जब ये सर्वे किया गया था तब इस उम्र की 6 प्रतिशत से ज्यादा लड़कियां या तो मां बन चुकी थीं या फिर गर्भवती थीं। किशोरावस्था में गर्भधारण ने ना केवल किशोरियों का स्वास्थ्य बुरी तरह तरह प्रभावित होता है बल्कि उनकी पढ़ाई पर भी बुरा असर पड़ता है। उपलब्ध आंकड़ों से पता चलता है कि 15 से 19 वर्ष की आयु में विवाहित किशोरियों की मातृ मृत्यु दर उन महिलाओं से कहीं ज्यादा है जो बीस से तीस साल की उम्र में हैं।

स्वास्थ्य संबंधित जोखिमों के अलावा, किशोरावस्था में गर्भवती होना और उससे जुड़ी परिस्थितियां, एक समाज में महिलाओं की भूमिका और जीवन की गुणवत्ता को भी निर्धारित करने वाले मूलभूत कारक हैं। इसके अलावा, किशोरावस्था में गर्भधारण का सीधा संबंध कम शिशु के जन्म के समय कम वजन, समय से पहले जन्म, प्रसव के दौरान नुकसान, प्रसव के दौरान मृत्यु और शिशु मृत्यु दर से भी होता है।

पॉपुलेशन फाउंडेशन ऑफ इंडिया ने किशोर स्वास्थ्य में सुधार की चुनौतियों और सिफारिशों को पहचानने और आगे बढ़ाने के लिए देश भर में पहले से ही आठ युवाओं की अगुवाई वाले परामर्श कार्यक्रम आयोजित किए हैं। पीएफआई उत्तर प्रदेश और बिहार में किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रमों के बारे में जागरूकता बढ़ाने और विशेष रूप से निशक्तजनों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार करने के लिए भी काम करता है।

पॉपुलेशन फाउंडेशन ऑफ इंडिया एक राष्ट्रीय सामाजिक संगठन है, जो लैंगिक संवेदनशील जनसंख्या, स्वास्थ्य एवं विकास रणनीतियों और नीतियों के प्रभावी निर्माण व कार्यान्वयन को बढ़ावा देता है। भारत रत्न जेआरडी टाटा ने 1970 में पीएफआई की स्थापना की थी।

पीएफआई, महिलाओं और पुरुषों को सशक्त बनाने के लिए जनसंख्या के मुद्दों पर काम करता है, ताकि वे लोग अपनी प्रजनन क्षमता, स्वास्थ्य एवं कल्याण से के बारे में उचित निर्णय लेने में सक्षम हों। हम राष्ट्रीय एवं राज्य स्तर पर  सरकार के साथ और अन्य सामाजिक संगठनों के साथ काम करते हैं।

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