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Sunday, 5 January 2020

जन कल्याण की चुनौतियों को पूरा करती है सिविल सेवा : नेतृत्व क्षमता, ज्ञान एवं नवाचार जैसी असीम संभावनाओं के लिये भी मिलता है मौका


आईएएस ऎसोसियेशन का साहित्यिक कार्यक्रम आयोजित, अतहर आमिर खान ने आईएएस अम्यर्थियों को दिये टिप्स
जयपुर, 5 जनवरी। उत्तर प्रदेश कैडर के सेवा निवृत्त आईएएस डॉ. कुश वर्मा ने कहा कि सिविल सेवा जन कल्याण के लिये व्यक्ति के अंदर मौजूद अनन्त संभावनाओं को मूर्त रूप देने का सबसे अच्छा जरिया है तथा यह सेवा समाज की चुनौतियों को सफल तरीके से पूरा करती है।

 डॉ. वर्मा ने रविवार को झालाना संस्थानिक क्षेत्र स्थित टेक्नो हब में अपनी पुस्तक ‘‘ए टू जेड ऑफ दि सिविल सर्विसेज’’ पुस्तक पर परिचर्चा कार्यक्रम में यह बात कही। युवा आईएएस अधिकारी एवं 2016 बैच के द्वितीय टॉपर अतहर आमिर खान ने लेखक से उनकी पुस्तक पर संवाद किया।

 उन्होंने बताया कि सफल सिविल सर्वेंट बनने के लिये कार्यक्षेत्र में उपलब्ध संसाधन के साथ-साथ स्थानीय भाषा के माध्यम से इण्टरेक्ट करना चाहिये ताकि अधिकाधिक सफल परिणाम प्राप्त हो सकें। उन्होंने बताया कि सिविल सेवा के माध्यम से आप में छिपी हुई नेतृत्व क्षमता और मुखर होकर ज्ञान एवं नवाचार के साथ कार्य करने का बेहतरीन मौका उपलब्ध कराती है।

 डॉ. वर्मा ने अतहर आमिर खान के साथ संवाद करते हुये आईएएस ट्रेनिंग के दौरान किये गये अनुभवों को शेयर किया। उन्होंने राजनीतिक दवाब व अन्य विषम परिस्थितियों में अपने मानसिक संतुलन को कायम रखने के लिये डूज एण्ड डोण्ट्स का जिक्र किया।

 आईएएस के अम्यर्थियों से संवाद करते हुये अतहर आमिर खान ने बताया कि सिविल सेवा में सफल होने के लिये आवश्यक है कि आप अपनी नॉलेज को रिफाइन करें और उसे टूल के रूप में प्रयोग कर एक रणनीति के तौर पर परीक्षा में अपना बेस्ट परफोरमेंस दें। सिविल सेवा में इन्जीनियरिंग या मैनेजमेंट में डिग्री का कोई अलग से बेनिफिट नहीं मिलता है।

खान ने बताया कि अब सिविल सेवा के प्रति आमजन की सोच में बदलाव आ चुका है। यह सेवा ट्रू सेंस में अच्छा करने के लिये अकूत अवसर पैदा करती है। सिविल सेवा में सफल होने के लिये इण्टेलिजेंस, धैर्य एवं तार्किक होना महत्वपूर्ण है।

 आईएएस ऎसोसियेशन की साहित्यिक सचिव एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग की सचिव श्रीमती मुग्धा सिन्हा ने कहा कि सिविल सेवा के माध्यम से समाज सेवा का अवसर कम लोगों को ही मिल पाता है। ऎसेमें समय के साथ सिविल सेवा के अधिकारियों को भी अपने आप में परिवर्तन करना आवश्यक हो जाता है। उन्होंने कहा कि लेखक के 40 वर्ष के सिविल सेवा अनुभव को वर्तमान के अधिकारियों के साथ साझा कर सिविल सेवा से समाज की चुनौतियों को किस प्रकार निस्तारित किया जा सकता है, के संबंध में काफी कुछ सीखा जा सकता है।
चुनौतियों को किस तरह दूर किया जा सकता है, इसके बारे में भी काफी कुछ सीखा जा सकता है।
सिन्हा ने कार्यक्रम में भाग लेने वाले सभी सिविल सेवा, आईपीएस सेवा सहित अन्य राजकीय सेवाओं के सेवानिवृत एवं निवर्तमान अधिकारियों तथा आईएएस अभ्यर्थियों को धन्यवाद ज्ञापित करते हुये कहा कि माह जनवरी में आईएएस ऎसोसियेशन के इस साहित्यिक कार्यक्रम को एक वर्ष पूरा हो गया है तथा कार्यक्रम की सफलता तथा अन्य जिलों से प्राप्त परामर्श के आधार पर इसे अन्य जिलों में आयोजित किये जाने की योजना पर विचार किया जा रहा है।

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