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Friday, 10 January 2020

धानुका एग्रीटेक ने धानुका इनोवेटिव एग्रीकल्चर अवॉर्ड-2018 से किसानों को सम्मानित किया

नई दिल्ली, 10 जनवरी, 2020। भारत की महत्वपूर्ण कृषि-रसायन कंपनियों में से एक, धानुका एग्रीटेक लिमिटेड ने धानुका इनोवेटिव एग्रीकल्चर अवॉर्ड (डीआईएए) के पहले संस्करण में किसानों को सम्मानित किया। यह सम्मान समारोह औऱ सेमिनार, दोनों नई दिल्ली के राष्ट्रीय कृषि विज्ञान परिसर (एनएएससी) स्थित सी.सुब्रमण्यम सभागार में संपन्न हुए, जहां मुख्य अतिथि केंद्रीय कैबिनेट मंत्री, जल शक्ति मंत्रालय, गजेंद्र सिंह शेखावत और केंद्रीय राज्य मंत्री, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, कैलाश चौधरी उपस्थित थे।

इस अवसर पर, नवीन कृषि तकनीकों को अपनाने व उनका अभ्यास करने के लिए विभिन्न श्रेणियों में 32 पुरस्कारों से किसान सम्मानित किए गए। कृषि में उत्कृष्ट योगदान के लिए एक लाख रुपये की नकद पुरस्कार राशि के साथ 12 किसानों को इनोवेटिव फार्मर्स अवॉर्ड और एक किसान को फॉर्मर ऑफ द ईयर का सम्मान मिला। इसी तरह से पानी व वर्षा-जल संचय श्रेणी में किसानों व संस्थानों को आठ पुरस्कार दिए गए। केवीके व कृषि विश्वविद्यालयों (राष्ट्रीय व राज्य स्तर) को कृषि में बेहतरीन काम करने वाली नवीन तकनीकों के लिए दो पुरस्कार दिए गए। साथ ही, व्यापारियों व वितरकों को प्रसार सेवा में नयापन लाने के लिए चार पुरस्कार मिले।

भारतीय कृषि के क्षेत्र में, उपज व आमदनी बढ़ाने व एक आदर्श उदाहरण प्रस्तुत करने के मामले में उम्दा योगदान देने वाले व्यक्तियों व संस्थानों से विभिन्न श्रेणियों में नामांकन मंगाए गए थे। इन किसानों की सफल कहानियों पर एक पुस्तिका भी प्रकाशित हो रही है, ताकि इन सफल उदाहरणों से दूसरे किसान भी सीखें। यह समझना होगा कि हमें अपने पुरखों से जो जमीन, जल और पर्यावरण मिले हैं, उन्हें आने वाली पीढ़ियों के लिए बेहतर तरीके से छोड़ना होगा।

कैलाश चौधरी, केंद्रीय राज्‍य मंत्री, कृषि एवं किसान कल्‍याण, भारत सरकार ने कहा, ‘’इस तरह का मंच तैयार करने के लिये हम ‘धनुका एग्रीटेक’ के प्रयासों की सराहना करते हैं,जोकि किसानों को कृषि में नवाचार करने के लिये प्रोत्‍साहित करेंगे और उनका हौसला बढ़ायेंगे। सारे किसानों को उनसे सीखना चाहिये कि वह अपनी फसल के पूर्ण स्‍वामी बनें। किसान को अपनी फसल की कीमत खुद तय करनी चाहिये। आगे चलकर हमारे किसानों को समृद्ध बनना चाहिये और ऐसी स्थिति बनानी चाहिये कि वह कर्ज दें ना कि लें।‘’

धानुका एग्रीटेक लिमिटेड के अध्यक्ष आर जी अग्रवाल ने कहा, ‘हमने इन पुरस्कारों को नया काम करने वाले किसान समुदाय को सम्मानित करने के लिए स्थापित किया है। किसान व खेतिहर समुदाय उपज और आमदनी बढ़ाने के लिए अपने कामकाजी तरीके साझा करें, यही प्रोत्साहित करने की हमारी कोशिश है।कई श्रेणियों में कई पुरस्कार हैं, लेकिन किसानों के लिए अधिक पुरस्कार नहीं हैं औऱ हमारी कंपनी ने जल व खाद्य सुरक्षा की भविष्य की जरूरत को देखते हुए यह कदम उठाया है”।

इस मौके पर अशोक दलवई, सीईओ, ‘नेशनल रेनफीड एरिया अथॉरिटी (एनआरएए)’, कृषि एवं किसान कल्‍याण मंत्रालय, भारत सरकार ने कहा, ‘’अब हम उस समुदाय को सुरक्षि करने के बारे में सोच रहे हैं, जिन्‍होंने हमारे देश को खाद्य सुरक्षित बनाया। हमें किसान भाईयों की आय सुरक्षा पर जोर देना चाहिये। नहीं तो वो हमारे खाद्य एवं पोषण सुरक्षा, चारा तथा पशुशुभोजन सुरक्षा और पारिस्थितिकी सुरक्षा की पूर्ति नहीं कर पायेंगे। उन्‍हें लाभ पहुंचाने के लिये हमारी सारी जानकारी, विज्ञान, नीतियों को नया रूप देने की जरूरत है और हममें यह क्षमता है। हरित क्रांति को नकारात्‍मक रूप में नहीं लेना चाहिये, लेकिन हमें अपने देश की श्‍वेत क्रांति से जरूर सीख लेनी चाहिये। आय की सुरक्षा के बाद, हमारा अगला कदम किसानों को व्‍यापारी बनाना है, जोकि लाभ के लिये काम करे। यह नीतियों और अन्‍य बदलावों के माध्‍यम से होगा।‘’

पांच सदस्य ज्यूरी में राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान प्रणाली के प्रतिनिधित्व करने वाले प्रसिद्ध कृषि वैज्ञानिक थे, जिन्होंने विजेताओं के स्वतंत्र मूल्यांकन को सुनिश्चित किया। पूरे देश से कुल 4466 आवेदन प्राप्त हुए और 2558 आवेदन अंतिम समीक्षा के लिए स्वीकृत किए गए। धानुका एग्रीटेक ने पूरे जीडीपी विकास में कृषि की भूमिका को रेखांकित करने के लिए 08 जनवरी, 2020 को दिल्ली में ‘भारत को पांच ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने में कृषि कैसे सहायक’ विषय पर संगोष्ठी आयोजित की।

मुख्य अतिथि केंद्रीय कैबिनेट मंत्री, जल शक्ति मंत्रालय, गजेंद्र सिंह शेखावत और केंद्रीय राज्य मंत्री, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, कैलाश चौधरी ने इस संगोष्ठी का उद्घाटन किया, जिससे कई सारी विचारोत्तेजक जानकारियां हासिल हुईं। वरिष्ठ अधिकारियों व वैज्ञानिकों, कृषि-रसायन उद्योगों, अकादमिकों, तकनीक विशेषज्ञों व कॉरपोरेट, मीडियाकर्मियों, वैज्ञानिकों, कृषि विज्ञान के विद्यार्थियों ने इस सत्र में भाग लिया। करीब 22 लाख के कुल 32 पुरस्कार मंत्रियों द्वारा 32 किसानों को बांटे गए।
 

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