अटूट आस्था ! अयोध्या में राम मंदिर के लिए 28 साल से अन्न का त्याग - Pinkcity News

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Saturday, 28 December 2019

अटूट आस्था ! अयोध्या में राम मंदिर के लिए 28 साल से अन्न का त्याग

- श्री जीण माता परिवार ने किया 82 वर्षीय उर्मिला चतुर्वेदी का सम्मान
जयपुर। अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण का संकल्प लेकर 28 साल तक बगैर अन्न के रह रही 82 वर्षीय उर्मिला चतुर्वेदी का मुरलीपुरा स्कीम में स्थित श्री जीण माता चरण मंदिर में सम्मान किया गया। इस दौरान मंदिर समिति की ओर से रामनाम संकीर्तन किया गया। संकीर्तन के बाद श्रद्दालुओं को प्रसाद वितरण के उपरांत समाजसेवी उर्मिला चतुर्वेदी का शॉल ओढ़ाकर व फूल मालाएं पहनाकर सम्मान किया गया। कार्यक्रम संयोजक व श्री जीण माता परिवार केे भवानीशंकर दीक्षित ने बताया कि जबलपुर निवासी उर्मिला चतुर्वेदी ने 1992 में बाबरी मस्जिद के विवाद के समय ही अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण का संकल्प  लिया था। पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट का अयोध्या में राम मंदिर निर्माण को लेकर फैसला आने के बाद उर्मिला चतुर्वेदी ने अपना संकल्प पूरा होने पर प्रसन्नता जताई। अपने जयपुर प्रवास के दौरान उर्मिला चतुर्वेदी ने बताया कि वे अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण होने के पश्चात ही वहीं जाकर अन्न ग्रहण करेंगी।
आपको बता दें 82 वर्षीया उर्मिला चतुर्वेदी पिछले 28 साल से वह केवल दूध और फलाहार के सहारे हैं। 1992 में उर्मिला चतुर्वेदी ने राम जन्मभूमि विवाद का समाधान होने तक महिला ने अन्न ग्रहण नहीं करने का संकल्प लिया था।
उर्मिला ने कहा कि अयोध्या मामले पर शीर्ष अदालत का फैसला आने के बाद अयोध्या में राम मंदिर बनने का रास्ता साफ हो गया है। बकौल, उर्मिला चतुर्वेदी अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण होने के पश्चात ही वह अपना उपवास तोडऩे के लिए वहां जाएंगी। इसके लिए अयोध्या में एक उद्यापन (व्रत आदि की समाप्ति पर किया जाने वाला धार्मिक कर्म) किया जाएगा। उर्मिला के बेटे विवेक चतुर्वेदी ने कहा, मेरी मां भगवान राम की अनन्य भक्त हैं और अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए समाधान का इंतजार कर रही थीं। वह अयोध्या में छह दिसंबर 1992 की घटना के बाद शुरू हुई हिंसा को लेकर काफी परेशान थीं। इसके बाद उसकी मां ने अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण होने तक अन्न का त्याग करने का संकल्प ले लिया और पिछले 28 साल से बगैर अन्न के ही हैं। उर्मिला देवी ने सरकारी नौकरी छोडक़र बतौर समाजसेविका व धर्म परायण महिला के रूप में ख्याति प्राप्त की है। उन्हें समाजसेवा में इंदिरा प्रियदर्शनी अवार्ड सहित अनेक पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है। उर्मिला के इस संकल्प का पता चलते ही विश्व हिंदू परिषद के प्रवीण भाई तोगडिय़ा, आरएसएस के कई पदाधिकारी उनसे जबलपुर में मिल चुके हैं।

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