उत्पीड़ित समाज, युवा और महिलाएं मिलकर करें बाबा साहेब का अधूरा सपना साकार : जस्टिस बालाकृष्णन - Pinkcity News

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Sunday, 8 December 2019

उत्पीड़ित समाज, युवा और महिलाएं मिलकर करें बाबा साहेब का अधूरा सपना साकार : जस्टिस बालाकृष्णन

  • अनुसूचित जाति एकजुट होकर करें अपने अधिकारों के लिए संघर्ष, कर्म और आस्था से ही समाज में समानता, सक्षमता एवं सुरक्षा का आभास होता है : असवाल
  • संविधान की 70वीं सालगिरह पर आयोजित ‘‘संविधान कथा’’ में उमड़ा जनसैलाब, प्रदेशभर से हजारों लोगों ने की शिरकत 
जयपुर, 8 दिसंबर। भारतीय संविधान की 70वीं सालगिरह और बाबा साहेब डाॅ. भीमराव अम्बेडकर की 63वीं पुण्यतिथि के उपलक्ष्य में रविवार को बिड़ला सभागार के खुले मैदान में ‘‘संविधान कथा’’ का आयोजन किया गया। इस अनूठे कार्यक्रम में प्रदेशभर से हजारों लोगों ने शिरकत कर बाबा साहेब को नमन कर संविधान कथा का लुत्फ उठाया। संविधान कथा का शुभारम्भ मुख्य अतिथि सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश के.जी. बालाकृष्णन, बौद्व भिक्षु अक्षय बौद्व एवं डाॅ. बी.आर. अम्बेडकर जयंती समारोह समिति के अध्यक्ष पूर्व आईएएस एल.सी. असवाल ने बाबा साहेब के चित्र के समक्ष दीप प्रज्जवलित कर किया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश के.जी. बालाकृष्णन ने कहा कि उत्पीड़ित समाज, युवा और महिलाएं मिलकर बाबा साहेब का अधूरा सपना साकार करें। उन्होंने कहा कि बाबा साहेब ने कड़ा संघर्ष करते हुए भारतीय संविधान का निर्माण किया और उत्पीड़ित समाज को समानता, शिक्षा और महिलाओं को बराबरी का अधिकार दिलाया था। बाबा साहेब के अथक प्रयासों से ही देश में वंचित और शोषित समाज को आरक्षण मिला था। उन्होने कहा कि सभी अनुसूचित जाति की उपजातियों में एकता और समानता की झंडा बरदारी नहीं होगी तब तक उनके अधिकार प्राप्त करने में बहुत समस्याएं आएंगी इसलिए इसकी प्राप्ति के लिए एकता ही सबसे बड़ा हथियार है।
जस्टिस बालाकृष्णन ने कहा कि राजस्थान की राजधानी जयपुर में पूर्व आईएएस एल.सी. असवाल के नेतृत्व में अम्बेडकर कथा और संविधान कथा का अनूठा कार्यक्रम कई सालों से किया जा रहा है, जो अपने आप में एक अनुकरणीय पहल है, जिसकी मुख्य न्यायाधीश बालाकृष्णन जी ने मुक्तकंठ से भूरि-भूरि प्रशंसा की और बताया कि देश के अन्य राज्यों में भी जयपुर की तर्ज पर अम्बेडकर कथा, संविधान कथा और बाबा साहेब की विचारधारा को जन-जन तक पहुंचाने के लिए ऐसे अनूठे आयोजन करने पर जोर दिया।
डाॅ. बी.आर. अम्बेडकर जयंती समारोह समिति के अध्यक्ष पूर्व आईएएस एल.सी. असवाल ने संविधान की 70 सालगिरह पर आयोजित संविधान कथा के उद्देश्य के बारे में जानकारी दी। असवाल ने कहा कि कलाराम मंदिर आन्दोलन, जल एवं पाठशाला आन्दोलन के साथ में महिला सुरक्षा और सम्मान कानून के मार्फत बाबा साहेब डाॅ. अम्बेडकर ने आम अवाम में संवैधानिक अलख जगाई थी और बाबा साहेब केवल विधिवेदता ही नहीं अर्थशास्त्री, मजदूरों को हक दिलाने वाले, गरीब को अच्छी चिकित्सा कैसे मिले, युवा अवाम को रोजगार कैसे मिले इस बारे में भी संविधान के तहत् उन्होने पहल करके इसमें समाहित कराने की कार्यवाही की थी। उन्होंने कहा कि बाबा साहेब ने कठिन परिस्थिति में कड़ी मेहनत करते हुए संविधान में अनुसूचति जाति के साथ उत्पीड़ित समाज को समानता और आरक्षण का अधिकार दिलाया था, जिससे वंचित और शोषित समाज को बराबरी का दर्जा मिला है। बाबा साहेब द्वारा द्वारा बनाए गए संविधान से ही आज पूरे देश की शासकीय और प्रशासकीय व्यवस्था चल रही है। असवाल ने जस्टिस बालाकृष्णन का संविधान कथा में शिरकत कर आशीर्वचन देने के लिए उनका तहेदिल से आभार व्यक्त किया।
बौद्ध भिक्षु अक्षय बौद्ध, बौद्ध विहार के सानिध्य में आयोजित संविधान कथा में पूर्व सांसद डाॅ. कर्णसिंह यादव सहित अनेक गणमान्य अतिथियों ने शिरकत की। इस अवसर पर समिति के अध्यक्ष एल.सी. असवाल एवं अन्य पदाधिकारियों ने मुख्य अतिथि जस्टिस बालाकृष्णन का साफा, शाॅल ओढ़ाकर और माला पहनाकर सम्मान किया।
कार्यक्रम में डाॅ. बी.आर. अम्बेडकर जयंती समारोह समिति के ‘‘संविधान कथा’’ आयोजन में समिति की महिला शाखा अध्यक्षा श्रीमती सन्तोष बिलोनिया ने हजारों महिलाओं के साथ शिरकत की और महिलाओं को समानता, सम्मान एवं सुरक्षा कैसे मिले इस बारे में विस्तार से आगृह किया तथा मुख्य अतिथि पूर्व मुख्य न्यायाधीश महोदय श्री.के.जी बालाकृष्णन जी का सम्मान किया।
कार्यक्रम में डाॅ. बी.आर. अम्बेडकर जयंती समारोह समिति के महासचिव फूलचन्द बिलोनिया, उपाध्यक्ष बाबूलाल राणा, रणजीत सिंह जाटव, जयपुर जिलाध्यक्ष सूरजमल बुनकर, महिला शाखा की अध्यक्षा संतोष बिलोनिया, जोबनेर नगर पालिका के अध्यक्ष राजेन्द्र दायमा सहित अनेक पदाधिकारी उपस्थित रहे।

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