जैविक व औषधीय खेती से ही आर्थिक आजादी संभंव : डॉ. गुप्ता - Pinkcity News

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Saturday, 7 December 2019

जैविक व औषधीय खेती से ही आर्थिक आजादी संभंव : डॉ. गुप्ता

  • -‘मेडिसिनल प्लांट कल्टीवेशन फॉर इकोनॉमिक ग्रोथ ऑफ रूरल फार्मर’ पर संगोष्ठी
  • -प्रदेश की पांच यूनिवर्सिटीज व 20 कॉलेजों के कृषि स्नात्तक भी बने हिस्सा
 
जयपुर। खेती को लाभदायक बनाने के लिए दो ही उपाय हैं, जिसमें पहला-उत्पादन को बढ़ाएं व दूसरा-लागत खर्च को कम करें। इसके लिए किसानों को अत्याधुनिक तरीके से जैविक खेती को अपनाना होगा। इसका सर्वोत्तम विकल्प गाय है। गोमूत्र व गोबर से निर्मित जैविक कीटनाशक व जैविक खाद से ही कृषि की लागत में कमी लायी जा सकती है। ऐसा करने से न केवल कृषि लाभकारी व्यवसाय बन सकती है बल्कि देश के किसान को आर्थिक आजादी भी मिलेगी। यह बात जैविक कृषि में पद्मश्री अवार्ड विजेता हुकुमचंद पाटीदार ने श्रीपिंजरापोल गोशाला में आयोजित ‘मेडिसिनल प्लांट कल्टीवेशन फॉर इकोनॉमिक ग्रोथ ऑफ रूरल फार्मर’ विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी में कही।
राष्ट्रीय उन्नति कृषि कौशल विकास संस्थान की ओर से आयोजित संगोष्ठी में राजस्थान मेडिसिनल प्लांट्स बोर्ड के सदस्य डॉ. अतुल गुप्ता ने कहा कि प्रदेश में तुलसी, स्टीविया, एलोवेरा, जीरा, सौंफ, अश्वगंधा की मेडिसिनल खेती की अपार संभावनाएं है। वर्तमान में करीब 10 हजार एकड़ में मेडिसिनल खेती हो रही है इस रकबे को बढ़ाया जा सकता है। मेडिसिनल खेती को अपनाने वाले किसानों को केंद्र व राज्य सरकार की ओर न केवल 90 फीसदी तक सब्सिडी दी जा रही है बल्कि उनकी फसल को भी बायबैक गारंटी के साथ खरीदा जा रहा है। परम्परागत खेती से हटकर यदि किसान जैविक व मेडिसिनल खेती को अपना लेगा तो नि:संदेह उसे आर्थिक लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि मेडिसिनल फसल के उत्पाद बनाकर मार्केट में बेचने से किसान को कई गुना लाभ प्राप्त होगा जिससे उसे आर्थिक आजादी भी मिलेगी।
सेंट्रल इंस्टीटयूट ऑफ मेडिसिनल एण्ड एरोमेटिक प्लांट्स के बायोटैक्नोलॉजी डिविजन की प्रिसिंपल साइंटिस्ट डॉ. सुनीता सिंह धवन ने कहा कि रासायनिक खेती से मधुमेह, कैंसर जैसी बीमारियां देश में तेजी से बढ़ रही हैं। भूमि व इन्सान को सेहतमंद रखना है तो जैविक खेती को अपनाना ही होगा। उन्होंने कहा कि कृषि में लागत बीज, पौध पोषण के लिए उर्वरक व पौध संरक्षण, रसायन और सिंचाई करने में आती है। खेत की तैयारी, फसल काल में निराई-गुड़ाई, सिंचाई व फसल की कटाई आदि कृषि कार्यों में लगने वाली ऊर्जा की इकाइयों का भी कृषि उत्पादन में महत्वपूर्ण स्थान है। इनका उपयोग किया जाना जरूरी है, लेकिन सही समय पर सही तरीके से किए जाने पर इन पर लगने वाली ऊर्जा की क्षमता को बढ़ाया जा सकता है। इनका व्यर्थ व्यय रोककर व पूरी तरह या आंशिक रूप से इनके विकल्प ढूंढकर भी लागत को कम किया जा सकता है। इनसे किसानों को अधिक लाभ मिलने के साथ ही पर्यावरण को प्रदूषित होने से भी बचाया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि बीज एक बार खरीदकर पांच-सात साल तक अगली फसल के लिए किसान स्वयं अपने खेत पर बीज तैयार कर सकते हैं। इस तरह इन पर खर्च होने वाली राशि में 40 से 60 प्रतिशत तक कमी की जा सकती है। अपने खेत पर उगाई जाने वाली बीज फसल को पर्याप्त खाद, सिंचाई व पौध संरक्षण देकर न सिर्फ अपनी जरूरत का बीज तैयार हो जाता है, बल्कि बीज फसल की अधिक उपज से कुछ आय बीज बेचने से भी मिल जाती है। इन बीजों को छान, बीनकर कचरा, कटे अविकसित बीज अलग करके इन्हें राइजोबियम या एजेटोबेक्टर कल्चर से उपचारित कर सही समय पर सही दूरी व गहराई पर बोकर प्रति इकाई पर्याप्त पौधे प्राप्त किए जा सकते हैं।
इस दौरान नेशनल इंस्टीटयूट ऑफ एग्रीकल्चर मार्केटिंग (नैम) के डॉ. सतीश कुमार ने कहा कि कृषि उत्पादों की उचित तरीके से मार्केटिंग के जरिए से बेहतर मुनाफा कमाया जा सकता है। संगोष्ठी की संयोजक संगीता गौड़ ने बताया कि संगोष्ठी में डॉ. आरएल सुवालका, ज्ञान विहार यूनिवर्सिटी के डॉ. सुशील कुमार शर्मा, श्रीपिंजरापोल गोशाला समिति के अध्यक्ष नारायणदास अग्रवाल, सचिव शिवरतन चितलांगिया ने जैविक खेती में गाय के योगदान पर प्रकाश डाला। इस दौरान पांच यूनिवर्सिटी व 20 कॉलेजों के कृषि संकाय के विद्यार्थियों तथा 12 राज्यों के युवा किसानों ने ‘औषधीय पादपों की खेती से ग्रामीण किसानों को विपणन शैली से कैसे जोड़ा जाए’ विषय पर आयोजित चर्चा में भाग लिया। कार्यक्रम के पश्चात प्रतिभागी स्टूडेंट्स व युवा किसानों ने गोशाला परिसर में ही स्थित सनराइज ऑर्गेनिक पार्क का भ्रमण कर औषधीय खेती के बारे में जानकारी प्राप्त की। अंत में सभी अतिथियों व कृषि के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वालों को स्मृति चिन्ह व प्रश्स्ती पत्र देकर सम्मानित किया गया।  कार्यक्रम में सनराइज एग्रीलैंड एण्ड डवलपमेंट प्रा.लि. के डायरेक्टर प्रशांत चतुर्वेदी, जेकेएम कंपनी के डायरेक्टर अवनीश अग्रवाल, सोनू बंशीवाल, शुभ्रता राठौड़, डॉ. सुशील करण शर्मा आदि भी मौजूद थे। कार्यक्रम का संचालन डॉ. शिल्पा वर्मा व अमोल खंडोर ने किया।

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