जनता को घरों में कैद करके अशांति मार्च निकाल रहे थे मुख्यमंत्री : डाॅ.सतीश पूनियाँ - Pinkcity News

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Sunday, 22 December 2019

जनता को घरों में कैद करके अशांति मार्च निकाल रहे थे मुख्यमंत्री : डाॅ.सतीश पूनियाँ

इतिहास में पहली बार हुआ, जनता में डर और दहशत पैदा करने सड़क पर उतरी सरकार: डाॅ.सतीश पूनियाँ
Image result for satish punia"जयपुर, 22 दिसम्बर। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष डाॅ. सतीश पूनियाँ ने रविवार को जयपुर में निकाले गए कांग्रेस के प्रदर्शन पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि ये पहली बार हुआ है की जनता को घरों में क़ैद करके,इंटरनेट बंद करके , दहशत का वातावरण बना कर,सरकार का मुखिया शांति मार्च निकालने का दावा कर रहा है ।
डाॅ. पूनियाँ ने कहा की मुख्यमंत्री एक समुदाय विशेष की भीड़ का नेतृत्व कर क्या संदेश देना चाह रहे थे। वो लोकतंत्र का कौनसा रूप दिखा रहे थे जिसमें जबरन लोगों की दुकाने बंद करवा दी गई , शहर के यातायात को अवरुद्ध कर दिया गया । इतिहास में पहली बार हुआ जब अपनी ही जनता में डर और दहशत पैदा करने सरकार और उसके मुख़यिा सड़क पर उतरे।
दो दिन पहले नागरिता संशोधन अधिनियम के समर्थन में भाजपा के हजारों कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया था जिसका शहर के लोग स्वागत कर रहे थे,न किसी को इंटरनेट बंद करने की जरूरत न पड़ी,न किसी दशहत थी और आज खुद सरकार न्याय के खिलाफ सड़क पर उतरी और डर के मारे लोग घरों में केद हो गये।
डाॅ.पूनियाँ ने कहा की नरेन्द्र मोदी की सरकार ने पड़ोसी इस्लामिक देशों से धार्मिक आधार पर प्रताड़ित होकर आए मूल भारतवंशियों  को नागरिकता देने के लिए क़ानून में संशोधन किया है , तो इसमें अशोक गहलोत को इतनी क्या आपत्ति है की एवो सारी सरकार को सारा काम छोड़ कर एक समुदाय विशेष की भीड़ के साथ सड़क पर उतार रहे है , लोगों को डरा रहे है , जनता को भ्रमित कर रहे है । मुख्यमंत्री के इस तरह के आचरण से राजस्थान जैसे गौरवशाली प्रदेश की जनता का सर शर्म से झुक गया । एक तरफ़ केंद्र की वो सरकार है जो देश के धार्मिक आधार पर हुए बँटवारे की वजह से 70 साल से नरक की ज़िंदगी जी रहे लोगों को न्याय देने के लिए प्रतिबद्ध है और दूसरी तरफ़ वो कांग्रेस एजो इनकी दुर्दशा के लिए ज़िम्मेदार है , वो अभी भी सुधरने के लिए तैयार नहीं  है ।
डाॅ. पूनियाँ ने कहा कि सरकार की मशीनरी लगा कर एक समुदाय विशेष की भीड़ बुलाई गई ,जिनमें से अधिकांश लोगों को ये भी नहीं पता था की वो आए क्यों है ,केवल कांग्रेस के आज के नेतृत्व  के सामने अपनी स्थिति को मज़बूत करने के लिए अशोक गहलोत प्रदेश को अराजकता की और धकेल रहे है, इस विधेयक के ख़लिाफ़ हिंसक प्रदर्शन तो जोधपुर में हुआ था , गहलोत वहाँ जाकर शांति मार्च निकालते ,  जयपुर में ये नौटंकी करने की क्या ज़रूरत थी । और  जयपुर में भी शांति मार्च निकालना  था तो तब निकालते  जब एक समुदाय विशेष की भीड़ बिना किसी बात के लोगों के घरों में पत्थर फेंक रही थी ,गाड़ियाँ तोड़ रही थी , सम्पत्तियों को नुक़सान पहुँचा रही थी । तब तो सरकार के रूप में अराजक लोगों को बचाने का काम कर रहे थे ।
डाॅ.पूनियाँ ने कहा की भारत के प्रधानमंत्री और गृहमंत्री मजबूत इच्छा शक्ति वाले राजनेता है , उन्होंने दशकों से पीड़ित लोगों को न्याय देने और उन्हें सम्मान की ज़िंदगी देने के लिए भारत की परम्परा और संविधान के अनुसार इस विधेयक के संशोधन को संसद में पारित करवाया है । अशोक गहलोत अपनी वोट बैंक की नीति के लिए कितना भी नाटक करके उन्हें इसे राजस्थान में लागू करना पड़ेगा ।
डाॅ.पूनियाँ ने कहा की प्रदेश के प्रमुख समाचार पत्रों ने प्रमुख रूप से इस विधेयक को लेकर फेल रही भ्रान्तियों को दूर करने के लिए उठ रहे एक-एक सवाल का जवाब छापा है , जिससे लोगों की भ्रांतियाँ दूर हुई है । गहलोत को भी एक ज़िम्मेदार मुख्यमंत्री के रूप में आगे बढ़ कर ये कहना चाहिए था की ये विधेयक केवल नागरिकता देने का है किसी की भी नागरिकता लेने का नहीं है । पर दुर्भाग्य है की ,केवल गांधी परिवार को ख़ुश करने के लिए संविधान की शपथ लेकर सरकार चला रहा एक नेता अपनी ही जनता में झूँठ फैला रहा है ।

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