आईआईएस विश्वविद्यालय के आठवें दीक्षांत समारोह में 1750 डिग्रियां बांटी गई - Pinkcity News

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Friday, 20 December 2019

आईआईएस विश्वविद्यालय के आठवें दीक्षांत समारोह में 1750 डिग्रियां बांटी गई


शिक्षा सस्ती व सुलभ होने के बावजूद युवाओं की पहुंच के बाहरः जस्टिस दलवीर भंडारी
जयपुरः 20 दिसम्बर 2019: आज के युवा भाग्यशाली हैं क्योंकि उनके पास पिछली पीढ़ी के मुकाबले व्यक्तिगत एवं व्यावसायिक विकास के लिए अधिकाधिक अवसर हैं। युवा न केवल प्राइवेट व पब्लिक सेक्टर में अपनी पहचान बना रहे हैं बल्कि स्टार्ट अप के लिए अच्छी सैलेरी वाली नौकरियों को भी छोड़ रहे हैं। ऐसे में युवाओं को इन विशेषाधिकारों के चलते मिल रही ज़िम्मेदारियों को नहीं भूलना चाहिए। ईमानदारी, मेहनत व निष्ठा से काम कर रहा कोई भी कर्मचारी किसी भी व्यवसाय में सामाजिक बदलाव ला सकता है। यह कहना था जस्टिस दलवीर भंडारी, इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस, हेग का जो आई आई एस (डीम्ड टू बी विश्वविद्यालय) की ओर से आयोजित के आठवें दीक्षांत समारोह को सम्बोधित कर रहे थे।    

कॉन्वोकेशन संस्थान के लिए एक महत्वपूर्ण दिन होता है जब स्टूडेंट्स शिक्षा प्राप्त कर एक प्रोफेशनल के तौर पर व्यावहारिक जीवन में कदम रखने के लिए तैयार होते हैं। शुक्रवार को आई आई एस (डीम्ड टू बी विश्वविद्यालय) द्वारा आठवें दीक्षांत समारोह का आयोजन इस मकसद के साथ किया गया कि अपने उज्ज्वल भविष्य की कामना लिए विश्वविद्यालय से सफल होकर निकली छात्राएं अपने जीवन को सार्थक बनाएंगी और सामाजिक कार्यों में सार्थक भूमिका निभाएंगी।

समारोह का आरम्भः
विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ अशोक गुप्ता ने कुलाधिपति जस्टिस एस एन भंडारी की अनुमति से दीक्षांत समारोह को आरंभ करने की घोषणा की एवं मुख्य अतिथि सहित वहां उपस्थित स्टूडेंट्स, पेरेंट्स एवं अन्य अतिथिगणों का स्वागत किया। अपने स्वागत भाषण की शुरूआत करते हुए डॉ अशोक गुप्ता ने यह कहते हुए खुशी ज़ाहिर की कि अगले वर्ष 2020-21 में विश्वविद्यालय रजत जयंती मनाएगा। उन्होंने वर्ष 1995 में स्थापित इंटरनेशनल कॉलेज फॉर गर्ल्स से 2009 में डीम्ड विश्वविद्यालय बनने के सफर पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आज हम देश के उच्च शिक्षण संस्थानों में अपना नाम शुमार करते हुए विश्वविद्यालय की स्थापना के दूसरे दशक में प्रवेश कर चुके हैं। यह विश्वविद्यालय के लिए गर्व का अवसर है जब हम 1700 से अधिक छात्राओं को डिग्रियां प्रदान कर रहे हैं। डॉ गुप्ता ने सभी ग्रेजुएंड्स को शुभकामनाएं प्रेषित करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय में मिले मेहनत, लगन, सेवा भावना, विनम्रता और अखंडता जैसे संस्कारों को अमल में लाने का वक्त आ गया है। क्योंकि डिग्री और डिप्लोमा पाने के साथ ही सभी आईआईएसयूआईट्स का हिस्सा बन चुके हैं इसलिए बंधन - एसोसिएशन ऑफ एल्यूमना में आपका सहृदय स्वागत है।

पद्म भूषण जस्टिस दलवीर भंडारी को डी लिट की मानद उपाधि से किया सम्मानित

पद्म भूषण जस्टिस दलवीर भंडारी को विश्वविद्यालय द्वारा कानून व न्याय के क्षेत्र में डी लिट की मानद उपाधि से सम्मानित किया गया। जोधुपर में जन्मे जस्टिस दलवीर भंडारी वर्तमान में अंतराष्ट्रीय न्यायालय के न्यायाधीश हैं। भारत की ओर से श्री भंडारी अंतराष्ट्रीय न्यायालय में न्यायाधीश के तौर पर 27 अप्रैल 2012 को निर्वाचित हुए थे एवं नवम्बर 2017 में वे इस पद पर दूसरे कार्यकाल के लिए भी चुने गए। आईसीजे में जाने से पहले श्री भंडारी भारत के कोर्ट में 20 वर्षों से ज़्यादा तक उच्च पदों पर रह चुके हैं। अक्टूबर 2005 में श्री भंडारी को बॉम्बे हाई कोर्ट का चीफ जस्टिस नियुक्त किया गया। दलवीर भंडारी भारत के सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीष भी रह चुके हैं। इनकी उपलब्धियों में कई एतिहासिक फैसले शामिल हैं जिसके प्श्चात् सरकार को नई नीतियां बनानी पड़ीं। इन फैसलों में हिंदू विवाह कानून 1955, बच्चों को अनिवार्य व निशुल्क शिक्षा का अधिकार, रैनबसेरा, गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वालों को सरकारी राशन बढ़ाने आदि प्रमुख हैं। गौरतलब है कि श्री भंडारी के फैसले पर ही देशभर में गरीबों के लिए रैन-बसेरे बनाए गए थे। श्री भंडारी को पद्म भूषण के अलावा फर्स्ट जस्टिस नागेंद्र सिंह अंतराष्ट्रीय शांति पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है।

डॉ अच्युत सामंत को डी लिट की मानद उपाधि से किया सम्मानित

डॉ अच्युत सामंत को विश्वविद्यालय की ओर से आदिवासी शिक्षा के क्षेत्र में डी लिट की मानद उपाधि से सम्मानित किया गया। डॉ अच्युत सामंत उड़िसा के प्रसिद्ध समाजसेवी व शिक्षाशास्त्री हैं। कलिंग इंस्टीट्यूट ऑफ इंडस्ट्रीयल टेक्नोलॉजी (कीट) एवं कलिंग इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेस (किस) के संस्थापक श्री अच्युत सामंत का शिक्षा, स्वास्थ्य, कला, संस्कृति, साहित्य, ग्रामीण विकास, सामाजिक सेवा एवं आध्यात्म में अतुल्नीय योगदान रहा है। डॉ सामंत ने आदिवासी बच्चों के लिए भुवनेश्वर में किस (KISS) की शुरूआत इसी सोच के साथ की थी कि केवल शिक्षा ही एक ऐसा माध्यम है जिसके चलते आदिवासी समाज को गरीबी के दलदल से निकाला जा सकता है। यह संस्थान शिक्षा के अलावा रहना, खाना, स्वास्थ्य देखभाल, शिक्षा सामग्री, वस्त्रादि बच्चों को मुफ्त में मुहैया करवाई जाती है।

इस उपलब्धि पर डॉ सामंत ने खुशी ज़ाहिर की एवं कहा कि दीक्षांत समारोह एक छात्र की ज़िन्दगी में महत्वपूर्ण दिवस होता है जहां से सपनों को साकार करने की शुरूआत होती है। इन्होंने स्टूडेंट्स से अपील की कि वो ज़िन्दगी में हमेशा सीखते रहें कौनसी सीख ज़िन्दगी के किस मोड़ पर कब काम आ जाए कुछ पता नहीं। युवाओं को दयालु, सहानुभूति एवं एक अच्छा इंसान बनना बेहद ज़रूरी है जो ज़िम्मेदार नागरिक की तरह व्यवहार करते हुए समाजसेवा में अपना सहयोग दें।

डॉ विक्रम शाह को डी एससी की मानद उपाधि से किया सम्मानित

विश्वविद्यालय की ओर से डॉ विक्रम शाह को हैल्थ केयर के क्षेत्र में डी एससी की मानद उपाधि से सम्मानित किया गया। डॉ शाह शैल्बी हॉस्पिटल्स, गुजरात के फाउंडर चेयरमैन एवं मैनेजिंग डायरेक्टर हैं। डॉ शाह ने विशेषज्ञ एवं व्यापक स्वास्थ्य सेवा को छोटे शहरों तक पहुंचाने के लिए पश्चिमी एवं केंद्रीय भारत में 11 मल्टीस्पेशिएलिटी हॉस्पिटल्स स्थापित किए हैं। शोध एवं मेडिकल प्रेक्टिसेस के क्षेत्र में नवाचार के माध्यम से मरीज़ों के स्वास्थ्य कल्याण में सुधार का श्रेय डॉ शाह को जाता है। डॉ शाह द्वारा की गई ओएस नीडल एवं द ज़ीरो टेक्नीक की खोज ने घुटने की रिप्लेसमेंट सर्जरी में क्रांति ला दी।

डॉ शाह बोन बैंक स्थापित करना, ज्वाइंट इन्वेंट्री एवं ज्वाइंट रिप्लेसमेंट रजिस्ट्री को संभालना, वी केयर प्रोग्राम जैसे मरीज़ केंद्रित पहल की शुरूआत करना आदि जैसे स्वास्थ्य सेवा सुधार कार्यक्रमों के सूत्रधार रहे हैं। गुजरात में मेडिकल टूरिज़म की शुरूआत का श्रेय भी इन्हें ही जाता है। यह एकमात्र भारतीय सर्जन हैं जिनका चयन डिज़ाईनर ऑफ ज़िम्मर, अमेरिका के बोर्ड में हुआ है।

जो भी प्रोफेशन अपनाएं उसमें नवाचार लाएं: जस्टिस दलवीर भंडारी
जस्टिस भंडारी ने पीआईएल, ट्रिपल तलाक आदि का उदाहरण देते हुए बताया कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा में बौद्धिक आत्मविश्वास के चलते कोई भी व्यक्ति किसी भी क्षेत्र में नवाचार ला सकता है। इसी के साथ ही इन्होंने इस मौके पर विश्व शांति का संरक्षण करने के लिए सभी को प्रेरित किया इन्होंने कहा कि राष्ट्रों के बीच के मनमुटावों को दूर करना एवं वैश्विक शांति बनाए रखना इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस में अहम कार्य है। मानवीय अधिकारों का उल्लंघन, आतंकवाद, जान-माल की क्षति, युद्ध से होने वाली हानि आदि अमानवीयता के कई उदाहरण हैं। ऐसे में शांति का सरंक्षण करना हम सभी की ज़िम्मेदारी है।

शिक्षा सस्ती व सुलभ होने के बावजूद युवाओं की पहुंच के बाहरः जस्टिस दलवीर भंडारी

पिछले कुछ दशकों में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में कई बदलाव आए हैं। कई नए विश्वविद्यालय खुले हैं जो प्रोफेशनल कोर्सेज़, बहु-विषयक विशेषज्ञता एवं विज्ञान व कला जैसे परम्परागत विषयों में कठोर प्रशिक्षण दे रहे हैं। इतना ही नहीं देश के कुछ संस्थानों द्वारा विश्वस्तरीय शिक्षा एवं शोध से संबंधित सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं ताकि युवाओं को गुणवत्ता शिक्षा के लिए विदेश की ओर रूख न करना पड़े। भले ही आज के समय में शिक्षा पहले के मुकाबले सस्ती व सुलभ है लेकिन धन, संसाधन एवं अवसर की कमी के कारण यह बहुत से युवाओं की पहुंच से बाहर है।  

विद्यार्थियों को प्रदान की गई डिग्रियां:

विश्वविद्यालय के सातवें दीक्षांत समारोह के खास मौके पर छात्र-छात्राओं को 1750 डिग्री एवं डिप्लोमा वितरित किए गए जिनमें से 45 पीएचडी, 460 स्नातकोत्तर, 1198 स्नातक की छात्राओं को डिग्री प्रदान की गई एवं 39 छात्राओं को एडवांस्ड डिप्लोमा सर्टिफिकेट दिए गए। साथ ही इस मौके पर प्रतिभाशाली स्टूडेंट्स को शैक्षणिक गतिविधियों में बेहतरीन प्रदर्शन के लिए 60 गोल्ड मेडल एवं प्लाक्स, 14 एन्डावमेंट अवार्ड्स एवं 289 मेरिट सर्टिफिकेट्स देकर सराहा गया।

आर्ट्स एवं सोशल साइंसेस से पूजन गुप्ता, कॉमर्स एवं मैनेजमेंट से इशिता बस्सी एवं साइंस से रूपल पाठक को शिव सरस्वती मेमोरियल गोल्ड मेडल, मास्टर ऑफ जर्नलिज़म एंड मास कम्यूनिकेशन की प्रतिभा तिवारी एवं बीजेएमसी से संजु कुमावत को डॉ शांता नरेंद्र भानावत मेमोरियल गोल्ड मेडल, एमएससी फिज़िक्स में सर्वोत्तम अंक हासिल करने के लिए पायल साहू को हुकुम कौर-नंद राम मेमोरियल गोल्ड मेडल, इकोनॉमिक्स में सर्वोत्तम अंक हासिल करने के लिए कनिष्का अग्रवाल को के एम सहाय मेमोरियल गोल्ड मेडल, एमकॉम में सर्वोत्तम अंक हासिल करने के लिए इरा सक्सेना को पवन बंसल मेमोरियल गोल्ड मेडल, बीएससी कैमिस्ट्री में सर्वोत्तम अंक हासिल करने के लिए आयुषि मिगलानी को प्रेम चंद बख्शी मेमोरियल गोल्ड मेडल, बैचलर ऑफ विज़ुअल आर्ट्स की पूजन गुप्ता एवं मास्टर ऑफ विज़ुअल आर्ट्स की मेघा देबनाथ को राधे श्याम बढ़ालिया मेमोरियल गोल्ड मेडल, फिज़िक्स में सर्वोत्तम अंक हासिल करने के लिए महिमा चौधरी को राम प्यारी-सुरजी मेमोरियल गोल्ड मेडल एवं गणित में सर्वोत्तम अंक हासिल करने के लिए प्रियंका राठौड़ को जे पी गुप्ता मेमोरियल गोल्ड मेडल, एवं स्पोर्ट्स में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए मीनल महरवाल को अदिति सांघी मेमोरियल अवॉर्ड देकर सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम के अंत में विश्वविद्यालय की रेक्टर एवं रजिस्ट्रार डॉ राखी गुप्ता ने सभी छात्राओं को बधाई दी एवं मुख्य अतिथि सहित सभी अतिथिगणों का समारोह में पधारने एवं कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया। 


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