“सन्नाटों के साए” शेडोज़ ऑफ़ साइलेंस इंसानी ज़ज्बातों की एक अनूठी आखों देखी कहानी... - Pinkcity News

Breaking News

Saturday, 30 November 2019

“सन्नाटों के साए” शेडोज़ ऑफ़ साइलेंस इंसानी ज़ज्बातों की एक अनूठी आखों देखी कहानी...

जवाहर कला केंद्र में प्रोफ़ेसर एम हसन की फोटो प्रदर्शनी की शुरुआत
 
जयपुर, 30 नवम्बरः  जवाहर कला केंद्र की सुकृति कला दीर्घा में आज शहर के जानेमाने सामाजिक चिन्तक, लेखक और कवि, प्रोफेसर एम हसन के द्वारा खिंची गयी तस्वीरों की प्रदर्शनी “सन्नाटों के साए” शेडोस ऑफ़ साइलेंस का जन अधिकारों के लिए संघर्षरत देश की संवेदनशील सोशल एक्टिविस्ट अरुणा रॉय और हरिदेव जोशी पत्रकारिता विश्वविद्यालय के कुलपति ओम थानवी द्वारा शहर के गणमान्य लेखकों, कलाकारों, समाजिक कार्यकर्ताओं की उपस्तिथि में  विधिवत उद्घाटन किया गया  |

अरुणा रॉय ने प्रोफेसर हसन के इस प्रयास की सराहना करते हुए  कश्मीर की सदक और सदाकत की तकरीर देते हुए वहाँ के जीवन में असल अमन की कामना ही, जिसपर उन्होने कुछ  कविताओं को भी साझा किया ।

कुलपति ओम थानवी ने कशमीर के मौजुदा राजनतिक हालातों के प्रति संवेदनशील नज़रिये से न केवल देखे जाने  बल्कि उसे ज्यादा गहराई से जानने समझने और वहाँ की आवाम के जीवन में हर दिन की ज़ाद्दोज़ह्द को रेखांकित किया ।
इस प्रदर्शनी द्वारा 'स्थानीय घटना'  (बाढ से प्रभावित लोग) के कलेवर द्वारा प्रदेशिक से ग्लोबल  'सीन' की सामाजिक-राजनीतिक व्यवस्था की बिखरती रुह को सिम्बलस -- करीबन पचास नयाब  फोटोग्राफ--एवम् कुछ समसामयिक कविताओं के इशारे से बताया गया  है | इन फोटोग्राफ के मार्फ़त  प्रोफ़ेसर हसन ने अपनी आँखों देखी कश्मीर की कहानी की बयानगी की है जिसका अपना एक रचनात्मक और प्रतीकात्मक पहलू भी है |

इन तस्वीरों में वहां आयी भीषण बाढ़ के बाद उथलपुथल जिन्दगी, इंसानी ज़ज्बात, उसके दर्द और उनकी रिश्तों भरी बुनावट के उन तमाम हालातों से उबरकर बाहर आती उसकी रवानियत की मौजूदा जुम्बिश को बदस्तूर एक विज़ुअल डाक्यूमेंट के रूप में पेश किया गया है यक़ीनन जो अपने आपमें एक शेक्षणिक वैचारिक आयाम को प्रतिबिम्बित करता है।
यह प्रदर्शनी अगले तीन दिनों तक सुबह 11 बजे से शाम  7 बजे तक अवलोकन के लिये खुली रहेगी ।|

No comments:

Post a comment

Pages