हाउसिंग बोर्ड ने ई-ऑक्शन से बेचे 1010 मकान, 162 करोड़ रूपये का राजस्व प्राप्त किया - Pinkcity News

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Saturday, 23 November 2019

हाउसिंग बोर्ड ने ई-ऑक्शन से बेचे 1010 मकान, 162 करोड़ रूपये का राजस्व प्राप्त किया


  • राजस्थान आवासन मंडल के ई-ऑक्शन कार्यक्रम नेे छुआ जादुई आंकड़ा
  • महज 35 कार्यदिवस में देश में सर्वाधिक मकान बेचने का बनाया कीर्तिमान
  • सफल रही आयुक्त पवन अरोड़ा की रणनीति, मंडल ने बनाया कीर्तिमान
Image result for rajasthan housing board"जयपुर, 23 नवम्बर। राजस्थान आवासन मंडल ने ई-ऑक्शन कार्यक्रम से महज 35 कार्यदिवस में 1010 मकान बेचकर देश में सर्वाधिक मकान बेचने का कीर्तिमान स्थापित है। उल्लेखनीय है कि ई-ऑक्शन से मंडल को 162 करोड़ का राजस्व प्राप्त हुआ है, जो कि अब तक किसी भी नीलामी का सर्वाधिक है।




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आवासन आयुक्त पवन अरोड़ा ने बताया कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के विजन के आधार पर राजस्थान आवासन मंडल ने 30 सितम्बर, 2019 से 23 नवम्बर, 2019 तक अधिशेष मकानों को ई-ऑक्शन के माध्यम से बेचने का अभिनव प्रयोग किया। इस कार्यक्रम में आवासन मंडल के मकानों और फ्लैटों पर 50 फीसदी तक की छूट प्रदान की गई थी।   



 
आयुक्त की रणनीति से बनाया देश में सर्वाधिक मकान बेचने का कीर्तिमान 

राजस्थान आवासन मंडल के आयुक्त पवन अरोड़ा की रणनीति कामयाब रही और आवासन मंडल ने उम्मीद से अधिक मकान बेचकर देश में सर्वाधिक मकान बेचने का कीर्तिमान स्थापित कर दिया। ई-ऑक्शन कार्यक्रम जब शुरू हुआ था, तो रियल एस्टेट के जानकार मान रहे थे कि मंडल 500 या 600 से ज्यादा मकान नहीं बेच पाएगा। लेकिन आयुक्त पवन अरोड़ा ने टीम वर्क, मार्केटिंग मैनेजमेंट और व्यापक प्रचार-प्रसार के साथ ऐसी रणनीति बनाई कि ई-ऑक्शन से महज 35 दिनों में 1010 मकान बेचकर, 162 करोड़ रूपये का राजस्व प्राप्त कर लिया। उल्लेखनीय है कि मंडल ने ई-ऑक्शन के माध्यम से 42 शहरों में 50 स्थानों पर बने मकान-फ्लैट्स बेचे थे।

ऐसी मिली ई-ऑक्शन कार्यक्रम को सफलता
राजस्थान आवासन मंडल में ई-ऑक्शन कार्यक्रम की जब कार्ययोजना बनाई जा रही थी, तो इसकी सफलता को लेकर आशंकाएं व्यक्त की जा रहीं थीं। उसकी वजह यह थी कि मंडल ने कभी मकानों को बेचने के लिए ई-ऑक्शन जैसी डिजीटल प्रक्रिया नहीं अपनाई थी। लेकिन आयुक्त श्री पवन अरोड़ा ने ई-ऑक्शन प्रक्रिया को पारदर्शी, जवाबदेह और सरल बनाकर इसे आम लोगों के लिए आकर्षक बना दिया। मंडल द्वारा पूरे राजस्थान में 92 हेल्पडेस्क बनाए गए, जहां नीलामी प्रक्रिया में भाग लेनी की निःशुल्क व्यवस्था की गई। प्रत्येक सम्पत्ति के आगे आॅक्शन के लिए उपलब्ध मकानों के विवरण को हाॅर्डिंग्स के माध्यम से प्रदर्शित किया गया। साथ ही प्रत्येक सम्पत्ति के लिए नोडल आॅफिसर नियुक्त किए गए, जिन्होंने उस सम्पत्ति से सम्बंधित जानकारी इच्छुक खरीददारों को उपलब्ध कराई। सम्पत्ति के बाहर भी हेल्पडेस्क स्थापित किए गए।

असफल बोलीदाताओं को फोन कर दी, रि-ऑक्शन की जानकारी
आयुक्त अरोड़ा ने अधिकारियों को निर्देश दे रखे थे कि जिन इच्छुक खरीददारों ने ई-ऑक्शन प्रक्रिया में भाग लिया, लेकिन किसी कारण से असफल हो गए। उनको संभावित खरीददार मानते हुए, दूसरे चरण में भाग लेने के लिए फोन कर प्रक्रिया में भाग लेने के लिए आग्रह किया जाए। नोडल अधिकारियों ने ऐसा ही किया, जिसका परिणाम था कि ई-ऑक्शन प्रक्रिया में ज्यादा मकान बिक सके।

प्रतिदिन समीक्षा बैठक कर बनाई रणनीति
आयुक्त श्री पवन अरोड़ा प्रत्येक दिन सुबह मंडल के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ ई-ऑक्शन की समीक्षा करते थे और आगे की रणनीति बनाते थे। राज्य के प्रत्येक हिस्से से रोज रिपोर्ट मंगवाकर, उसके अनुकूल कार्ययोजना बनाई जाती थी। इसके साथ ही सम्बंधित अधिकारियों को जरूरी दिशा-निर्देश दिए जाते थे।

किया गया व्यापक प्रचार-प्रसार
ई-ऑक्शन कार्यक्रम की जानकारी पूरे प्रदेश में प्रिंट, इलेक्टोनिक और आउटडोर मीडिया के माध्यम से जन-जन तक पहुंचाई गई। इसके साथ ही काॅल सेंटर बनाकर आम लोगों को इस कार्यक्रम से अवगत कराया गया।

50 हजार लोगों को किए ई-ऑक्शन प्रक्रिया के बल्क मैसेज
अरोड़ा ने बताया कि आवासन मंडल द्वारा चलाए गए ई-ऑक्शन कार्यक्रम की जानकारी देने के लिए 50 हजार लोगों को बल्क मैसेज किए गए। इसके साथ ही बड़ी संख्या में लोगों को नागरिक सेवा केन्द्र और अन्य डिजीटल माध्यमों से ई-ऑक्शन कार्यक्रम की सूचना दी गई।

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