वासना से वात्सल्य की और गमन ही "उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म" : मुनि विभंजन सागर - Pinkcity News

Breaking

Thursday, 12 September 2019

वासना से वात्सल्य की और गमन ही "उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म" : मुनि विभंजन सागर

 12 वें तीर्थंकर भगवान वासुपूज्य के मोक्ष कल्याणक पर निर्वाण लड्डू चढ़ाया, हजारों श्रद्धालुओं ने रखा अनंत चतुर्दर्शी का निर्जल उपवास
 शुक्रवार को प्रातः 6 बजे से त्यागी-व्रतियों का होगा सामूहिक पारणा, होगा सम्मान
 

जयपुर। धर्मनगरी छोटी काशी के मानसरोवर स्थित वरुण पथ दिगम्बर जैन मंदिर में गुरुवार को दशलक्षण महापर्व के अंतिम दिन " उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म " एवं 12 वे तीर्थंकर भगवान वासुपूज्य का निर्वाण दिवस श्रद्धा-भक्ति के साथ मनाया गया साथ ही अनंत चतुर्दशी महापर्व भी हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर मूलनायक महावीर भगवान के स्वर्ण एवं रजत कलशों से कलशाभिषेक किये गए, इस दौरान करीब 300 से अधिक श्रद्धालुओं ने श्रीजी के स्वर्ण कलश से कलशाभिषेक किये और त्यागी-व्रतियों और सौभाग्यशाली परिवारों द्वारा मुनि विश्वास सागर महाराज के मुखार्विन्द भव्य वृहद शांतिधारा करने का सौभाग्य प्राप्त किया।

प्रचार संयोजक अभिषेक जैन बिट्टू ने बताया कि सुबह 6.30 बजे से अनंत चतुर्दशी एवं उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म के शुभावसर समाज सेवी टीकमचंद, मनोज, प्रीति सौगानी परिवार द्वारा मण्डल जी पर कलश स्थापित कर जिन गुण सम्पति विधान पूजन का साजो - बाजो, गीत-संगीत और जयकारों के साथ विधान - पूजन किया गया, इस दौरान 1000 से अधिक श्रद्धालुओ ने सामूहिक विधान पूजन में भाग लेकर अष्ट द्रव्यों के साथ पूजन अर्घ चढ़ाए और कर्मो की निर्जरा के लिए जिनेन्द्र प्रभु से प्रार्थना की साथ विधान पूजन के दौरान दशलक्षण पर्व के अंतिम धर्म उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म और अनंत चतुर्दशी का भी पूजन साजों-बाजों के साथ किया गया।

अध्यक्ष एमपी जैन ने बताया कि गुरुवार को दशलक्षण पर्व और अनंत चतुर्दर्शी के अवसर पर समाज के सभी बंधुओ ने अपने-अपने प्रतिष्ठानों से अवकाश रखा और नोकरी पेशा श्रद्धालुओ ने भी अवकाश लेकर विधान पूजन में भाग लिया, अकेले वरुण पथ जैन मंदिर के प्रांगण पर 1000 से अधिक श्रद्धालुओं ने दशलक्षण पर्व के अंतिम दिन पूजन - अर्चना कर जिनेन्द्र प्रभु की आराधना की।

मंत्री जेके जैन ने बताया कि अनंत चौदस और उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म दिवस के विधान पूजन के दौरान 12 वे तीर्थंकर भगवान वासुपूज्य स्वामी के मोक्षकल्याणक पर्व के अवसर पर  निर्वाण कांड पाठ, पूजन, जयमाला अर्घ के गुणगान के साथ मोक्ष कल्याणक अर्घ चढ़ाते हुए 12 किलो का निर्वाण लडडू श्रीमती गुणमाला देवी, मनोज, डॉ बबिता, चिरायु बाकलीवाल (टोडारायसिंह) परिवार द्वारा भगवान वासुपूज्य के श्रीचरणों में समर्पित किया गया और प्रातः 9 बजे उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म पर अपने उपदेश देते हुए मुनि विभंजन सागर महाराज ने कहा की " भोगो को इतना भोगा कि खुद को ही भेग बना डाला, साध्य और साधना का अंतर मैने आज मिटा डाला। " काम और भोग से ग्रसित आत्मा हमेशा पतन को प्राप्त होती है और आत्मा से दूर होती है क्योकि अनादिकाल  संस्कारो से युक्त आत्मा प्रयत्नशील न होकर मैथुन संज्ञा के ही अधीन हो जाती है।  कामी व्यक्ति उस कुत्ते  समान है जो हड्डी को चबाकर रस का अनुभव करता है। वासना काम उस " किंपाल फल के समान है जो खाने में मधुर देखने में सुन्दर और सूँघने में सुरक्षित होती है किन्तु उसका परिणाम है - मृत्यु ही है।  मोक्ष महल का अंतिम सोपान - ब्रह्मचर्य है। आत्मा में रमण करना, उसी में जीना यही ब्रह्मचर्य है, जिस प्रकार कमल पैदा तो कीचड़ में होता है किन्तु वह जाता कीचड़ से दूर मुक्त आकाश में है उसी प्रकार प्राणी काम से पैदा होता है यह उसकी मज़बूरी है किन्तु काम में ही जीना और मरना मज़बूरी नहीं है। अतः व्यक्ति को काम में नहीं राम में जीने का अभ्यास करना चाहिए, यही भाव एक दिन आत्मा स्वभाव को प्राप्त करवाने में सार्थक होंगे। 

मुनि विश्वास सागर महाराज ने अनंत चतुर्दशी महत्व बताते हुए अपने आशीर्वचन में कहा कि अनंत चतुर्दर्शी का ये पर्व बड़ा ही जैन ग्रंथो के अनुसार अति महत्व रखता है और आज के दिन भगवान वासुपूज्य जो कि देवताओ में वंदनीय थे उनका मोक्ष कल्याणक पर्व के साथ मनाया जाता है और सभी श्रावक और श्राविकाएँ इस दिन चौबीस तीर्थंकर भगवानो के कलशाभिषेक और विधान पूजन करते है।

कोषाध्यक्ष कैलाश सेठी एवं समिति सदस्य विनेश सौगानी ने बताया की गुरुवार को दोपहर मध्याह 12.30 बजे से पुनः चौबीस तीर्थंकर विधानपूजन हुआ, उसके बाद शाम 5.30 बजे पाण्डुक्षिला पर श्रीजी को ढोल-नगाड़ों और जयकारों के साथ विराजमान किया गया, जिसमे सौधर्म इंद्र सहित पांच प्रमुख इन्द्रों द्वारा श्रीजी का कलशाभिषेक एवं शांतिधारा की गई। उसके अध्यक्ष एमपी जैन ने स्वागत उद्धबोधन दिया, मुनि विश्वास सागर और मुनि विभंजन सागर महाराज ने सभा को संबोधित किया।

शुक्रवार को प्रातः 6 बजे से जैन मंदिर के प्रांगण पर दशलक्षण पर्व के उपवास करने वाले सभी त्यागी - व्रतियों सहित 3 दिन का उपवास करने वाले सभी श्रेष्ठियों का सामूहिक पारणा मन्दिर जी पर युगल मुनिराज ससंघ सानिध्य में सम्पन्न होगा। जिसके बाद दशलक्षण पर्व के उपवास करने वाले सभी तपस्वियों की नगर शोभायात्रा का आयोजन होगा। यह शोभायात्रा मंदिर से प्रारम्भ होकर एवं सभी त्यागियो उनके घर तक बेंड बाजो और जयकारों के साथ छोड़ने जाएगी और तप, त्याग की अनुमोदना करेगे। इस दौरान यात्रा बैंड - बाजो और जयकारो के साथ निकाली जाएगी। इससे पूर्व मंदिर प्रबन्ध कार्यकारिणी, चातुर्मास व्यवस्था समिति सहित युवा मंडल, महिला मंडल, आचार्य विद्या सागर आगम पाठशाला समिति, मुनि संघ व्यवस्था समिति के पदाधिकारियों द्वारा त्यागी-व्रतियों का सम्मान कर अनुमोदना की जाएगी। 

No comments:

Post a Comment

Pages