दशगंध हुताशन माँहि, हे प्रभु खेवत हो, मिस धूम करम जरि जाँहि, तुम पद सेवत हो .... के गुणगान के साथ चढ़ाई धूप - Pinkcity News

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Sunday, 8 September 2019

दशगंध हुताशन माँहि, हे प्रभु खेवत हो, मिस धूम करम जरि जाँहि, तुम पद सेवत हो .... के गुणगान के साथ चढ़ाई धूप

उत्तम संयम धर्म ही जीवन का श्रृंगार : मुनि विभंजन सागर
सोमवार को दशलक्षण पर्व का सातवां दिन, मनाया जाएगा " उत्तम तप धर्म "
जयपुर। रविवार को दिगम्बर जैन मंदिरों में दशलक्षण पर्व का छठा दिन " उत्तम संयम धर्म " और " सुगन्ध दशमी " पर्व के रूप में मनाया गया। इस श्रावकों ने संयम का परिचय देते हुए जिनेन्द्र की और प्रातः कालीन की बेला में श्रीजी के कलशाभिषेक किये उसके उपरांत शांतिधारा कर अष्ट द्रव्यों से विधान पूजन कर जगत में फैली असुगन्ध को दूर करने की प्रार्थना करते हुए धूप खेरकर सुगन्ध दशमी पर्व का अर्घ चढ़ा जिनेन्द्र अर्चना की। इस दिन महिलाएं और पुरुष सुगंध दशमी का निर्जल उपवास करते हुए। पूजन व कथा का गुणगान करते है। सांध्यकालीन में शहर के विभिन्न जैन मंदिरों में संजीव झांकी के माध्यम से संयम धारण करने की प्रेरणा देते हुए विभिन्न पत्रों को माध्यम बनाकर प्रदर्शित करते है। संयम धारण करने की प्रेरणा देते है।
प्रचार संयोजक अभिषेक जैन बिट्टू ने बताया कि रविवार को वरुण पथ दिगम्बर जैन मंदिर में प्रातः 6 बजे से मूलनायक महावीर स्वामी सहित दो अन्य वेदियो पर विराजित भगवान आदिनाथ स्वामी और भगवान पार्श्वनाथ स्वामी के भी स्वर्ण एवं रजत कलशों से कलशाभिषेक कर उत्तम संयम धर्म के दिन की शुरुवात की गई। जिसके उपरांत मुनि विश्वास सागर एवं मुनि विभंजन सागर महाराज ससंघ सानिध्य एवं मुखारविंद तीनों वेदियो पर वृहद शांतिधारा कर जगत के प्रत्येक प्राणी में संयम धारण हो कि भावना भाते हुए शांतिधारा का अर्घ चढ़ा कर की। इसके बाद आचार्य विद्या सागर सभागार में पांडुकशील पर श्रीजी को विराजमान कर सौधर्म इंद्र पुष्पेंद्र जैन पचेवर वालो द्वारा स्वर्ण कलश से कलशाभिषेक कर एवं रजत कलश से शांतिधारा की और मण्डल पर कलश स्थापित कर पूजन विधान का आगाज किया। इस दौरान उत्तम संयम धर्म पूजन एवं कल्याण मन्दिर विधान पूजन का आयोजन किया गया। पूजन के दौरान सोधर्म इंद्र - इंद्राणी सहित उपस्थित सभी श्रद्धालुओ ने जल, चंदन, अक्षत, पुष्प, नैवेघ, दीप, धूप, फल, अर्घ चढ़ा जिनेन्द्र अर्चना की। पूजन के दौरान सुगन्ध दशमी विधान पूजन का भी आयोजन किया गया जिसमें श्रावकों द्वारा दशगंध हुताशन माँहि, हे प्रभु खेवत हों। मिस धूम करम जरि जाँहि, तुम पद सेवत हों। चौबीसों श्री जिनचंद, आनंद-कंद सही, पद-जजत हरत भवफ़न्द, पावत मोक्ष मही। का गुणगान कर सुंगध दशमी की धूप खेरते हुए जिनेन्द्र प्रभु से असुगन्ध को मेटने और सुंगध को फैलाने की प्रार्थना की।

दुख, कष्ट और क्रोध पर संयम धारण करना ही जीवन का श्रृंगार है वही " उत्तम संयम धर्म " है : मुनि विश्वास सागर
पूजन के दौरान मुनि विश्वास सागर महाराज ने सभा को संबोधित करते हुए उत्तम संयम धर्म और सुगंध दशमी पर्व का महत्व बताते हुए अपने आशीर्वचन देते हुए कहा कि " इस जगत में संयम ही जीवन का असली श्रृंगार है। जिस किसी व्यक्ति के संयम के श्रृंगार को अपना लिया उसके दुख, कष्ट और क्रोध इस धारणा से समाप्त हो जाते है। दशलक्षण पर्व के मध्य आने वाला यह पर्व स्वयं संयम को परिभाषित करता है। वो प्राणी श्रद्धा-भक्ति का परिचय देते हुए दशलक्षण पर्व के निर्जल उपवास रखते है उनके शुरू के पांच दिन तो क्षमा, मार्दव, आर्जव, शौच, सत्य में व्यतीत हो जाते है किंतु संयम धर्म से उन प्राणियों की असली परीक्षा शुरू हो जाती है जिस किसी ने संयम के साथ आगे की आराधना कर ली वह  तप, त्याग, आकिंचन्य और ब्रह्मचर्य को धारण करते निर्विघ्न दशलक्षण महापर्व को पूजते है। उत्तम संयम धर्म हम यही सिख देता है जैसे जिस प्रकार घोड़े पर लगाम नही होने से अपने ऊपर सवार व्यक्ति को नीचे गिरा देता है उसी तरह इस जीवन मे अगर मन को वश नही रखा तक वह नरक बन जाता है। जीवन मे मन को वश में रखना जरूरी है क्योकि यह महत्वकांशाएँ तो बहुत रखता है लेकिन उपलब्धि हासिल नही करता। इंसान को जीवन मे संयम को श्रृंगार की तरह रखना चाहिए। इस जगत में मनुष्य ही एक मात्र ऐसा प्राणी है जो संयम को धारण कर सकता है इसलिए समस्त जीवों में मनुष्य जीव सर्वश्रेष्ठ माना गया है। जिसके जीवन मे संयम नही, उसका जीवन बिना ब्रेक की गाड़ी जैसा है। उत्तम संयम धर्म ऐसा पर्व है जिसमे तीर्थंकरों और करोड़ो साधु-साध्वियों ने संयम धारण कर अपने वीतरागी स्वरूप में रहकर संयम धर्म का पालन करते हुए करोड़ो के लोगो के साथ स्वयं का भी आत्मकल्याण किया।

मंत्री जेके जैन ने बताया कि रविवार को उत्तम संयम धर्म और सुगंध दशमी के शुभवासर पर सांध्यकालीन में सायं 6 बजे से मन्दिर जिनालय में श्रद्धालुओं ने अपने कर्मो की निर्जरा और धरती पर बढ़ते असुगन्ध को मिटाने के लिए सुगन्धित धूप को खेरते हुए प्रत्येक प्राणी के कल्याण की भावना भाई। सायं 6.30 बजे से मूलनायक महावीर भगवान की महामंगल आरती के पश्चात, गुरुभक्ति और आनंद यात्रा का आयोजन युगल मुनिराज संघ सानिध्य में सम्पन्न हुआ जिसके पश्चात प्रतिष्ठाचार्य प्रधुम्न शास्त्री के निर्देशन में सांध्यकालीन शास्त्र प्रवचन सम्पन्न हुए। सोमवार को दस धर्म का सातवां पर्व " उत्तम तप धर्म " मनाया जाएगा। सांध्यकालीन में रात्रि 8.15 बजे से आचार्य विद्या सागर आगम पाठशाला समिति के तत्वाधान में पाठशाला के बालक और बालिकाओं द्वारा " धार्मिक नृत्य-नाटिका " का भव्य आयोजन किया जाएगा। 

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