राज्य स्तरीय वन महोत्सव : प्रकृति के संतुलन के लिए वन संरक्षण बेहद जरूरी : मुख्यमंत्री - Pinkcity News

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Friday, 6 September 2019

राज्य स्तरीय वन महोत्सव : प्रकृति के संतुलन के लिए वन संरक्षण बेहद जरूरी : मुख्यमंत्री

जयपुर, 06 अगस्त। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि जलवायु परिवर्तन की वैश्विक समस्या का समाधान है कि हम वृक्षों के महत्व को समझें और अधिक से अधिक पेड़ लगाएं। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में वृक्ष जीवन का अभिन्न हिस्सा हैं। प्रकृति के सन्तुलन के लिए आवश्यक है कि हम वन एवं वन्यजीवों की रक्षा करें।
गहलोत शुक्रवार को बौद्धिक दिव्यांगता केन्द्र, जामडोली में 70वें राज्य स्तरीय वन महोत्सव को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि पर्यावरण के संरक्षण और प्रदूषण को दूर करने में वनों की अहम भूमिका है। क्षेत्रफल के अनुपात में वनों का कम प्रतिशत हम सभी के लिए गंभीर चिंता का विषय है। आमजन को वृक्षारोपण अभियान से जोड़ने के लिए मैंने अपने पिछले कार्यकाल में ‘पानी बचाओ, बिजली बचाओ, सबको पढ़ाओ, बेटी बचाओ और वृक्ष लगाओ‘ का नारा दिया था। साथ ही हरित राजस्थान जैसा कार्यक्रम चलाया था।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री स्व. इंदिरा गांधी के समय ही 1972 में वन्यजीव संरक्षण अधिनियम बनाया गया और बाघों के संरक्षण के लिए टाइगर प्रोजेक्ट जैसा सफल कार्यक्रम शुरू किया गया। राजस्थान के ही कैलाश सांखला को इसका पहला डायरेक्टर बनाया गया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में श्री सुन्दरलाल बहुगुणा ने चिपको आन्दोलन के माध्यम से तथा जोधपुर के खेजडली में अमृता देवी ने वनों को बचाने का पूरी दुनिया को अमिट संदेश दिया। वन एवं वन्यजीव संरक्षण के प्रति विश्नोई समाज के विशेष योगदान का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि सभी को इससे प्रेरणा लेनी चाहिए।
गहलोत ने कहा कि हमें आमजन में यह जागरूकता फैलानी होगी कि वनों के बिना हमारा जीवन सुरक्षित नहीं है। वन होंगे तो ही अच्छी वर्षा होगी, अच्छी फसलें होंगी और खुशहाली आएगी। उन्होंने कहा कि वन महोत्सव जैसे कार्यक्रमों में अधिक से अधिक लोगों की भागीदारी होनी चाहिए। साथ ही भावी पीढ़ी को भी वन संरक्षण के बारे में जागरूक करना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने बौद्धिक दिव्यांगता केन्द्र परिसर में बरगद का पौधा लगाया और वानिकी प्रदर्शनी का अवलोकन किया। बड़ी सख्या में स्कूली बच्चों, जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने भी पौधे लगाए। मुख्यमंत्री ने समारोह में वन संरक्षण से संबंधित पोस्टर का विमोचन भी किया।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने वन एवं वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने पर वर्ष 2018 के अमृता देवी स्मृति पुरस्कार प्रदान किए। संस्थाओं की श्रेणी में वंडर सीमेंट लि. आरके नगर, निम्बाहेडा, वन सुरक्षा एवं प्रबंध समिति पाटीया उदयपुर तथा मानव उत्थान सेवा समिति, तलवाड़ा झील, हनुमानगढ़ को प्रदान किया गया। व्यक्तिगत श्रेणी में वन अनुसंधान केन्द्र बांकी उदयपुर के सहायक वनपाल ललित पालीवाल, जयपुर विकास प्राधिकरण के सहायक वनपाल ओम सिंह राजावत तथा वन्यजीव संरक्षण के लिए वन मंडल वन्यजीव उदयपुर के वनपाल सतनाम सिंह को पुरस्कार प्रदान किया गया।
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री मास्टर भंवरलाल मेघवाल ने कहा कि पौधे लगाना पुण्य का काम है, लेकिन वृक्ष होने तक उसकी देखभाल करना उससे भी ज्यादा महत्वपूर्ण है। हमारी जिम्मेदारी है कि आज लगाए पौधे जब तक पेड़ बनकर अपने बूते पर खड़े नहीं हो जाएं तब तक इनकी पूरी रक्षा करें। हम अपने बच्चों की तरह ही पौधों की देखभाल करें।
वन एवं पर्यावरण राज्य मंत्री सुखराम विश्नोई ने कहा कि राज्य में 20 फीसदी वन क्षेत्र के लक्ष्य को हासिल करने का प्रयास किया जा रहा है। इसके लिए वन विभाग की विभिन्न योजनाओं और जनसहयोग से अधिकाधिक पौधारोपण किया जा रहा है। विभागीय नर्सरियों के माध्यम से फलदार, छायादार एवं औषधीय पौधे वितरित किए गए हैं। उन्होंने कहा कि लम्बे समय से अटकी हुई राज्य की कैम्पा फंड की 1748 करोड रूपये की राशि राज्य सरकार के निरंतर प्रयासों के बाद केन्द्र सरकार से मिल गई है। इससे वन क्षेत्र एवं वन्य जीवों के संरक्षण में काफी मदद मिलेगी।
विधायक रफीक खान ने कहा कि इस वर्ष बरसात के मौसम में उनकी टीम ने विधानसभा क्षेत्र में पांच हजार पौधे लगाकर उनकी देखभाल की जिम्मेदारी ली है। मुख्य सचिव डीबी गुप्ता, वन एवं पर्यावरण विभाग की प्रमुख शासन सचिव श्रेया गुहा ने भी संबोधित किया।
कार्यक्रम में जिला प्रमुख मूलचंद मीणा, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के प्रमुख शासन सचिव अखिल अरोड़ा, प्रधान मुख्य वन संरक्षक दीपक भटनागर सहित वन विभाग के अधिकारी, स्कूली बच्चे एवं आमजन उपस्थित थे।



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