ई-सिगरेट व ई-हुक्के पर प्रतिबन्ध लगाना सरकार का सराहनीय फैसला - Pinkcity News

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Thursday, 19 September 2019

ई-सिगरेट व ई-हुक्के पर प्रतिबन्ध लगाना सरकार का सराहनीय फैसला

राज्य में प्रतिवर्ष 40 से 50 हजार करोड़ रुपये का तम्बाकू उत्पादों का व्यापर, इसमें से अधिकतर होता है अवैध रूप से  : चौधरी
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जयपुर। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट (उत्पादन, विनिर्माण, आयत, निर्यात, परिवहन, विक्रय, वितरण, भण्डारण और विज्ञापन) निषेध अध्यादेश, 2019 की घोषणा को कल अपनी मंजूरी दे दी है, जिसमे सभी प्रकार की इलेक्ट्रॉधनिक निकोटिन डिलिवरी सिस्टतमों (ईएनडीएस), हिट नॉट बर्न उत्पानदों, ई-हुक्कों और ऐसे उपकरणों सहित ई-सिगरेटों के प्रतिबंध का निर्णय लिया गया है। कैबिनेट की इस अभिनव पहल पर तम्बाकू रहित राजस्थान अभियान के प्रतिनिधि राजन चौधरी ने कहा कि सरकार का यह कदम स्वागत योग्य है और इसके लिए हम सरकार को धन्यवाद देते है क्यूंकि अब इससे यह सुनिश्चित हो जायेगा कि भारतीय, विशेषकर बच्चे और युवा इन हानिकारक नशीले पदार्थों से दूर रह सकेंगे और वे असमय मौत का शिकार नहीं बनेंगे। चौधरी ने बताया कि अध्यादेश की घोषणा के बाद से भारत में ई-सिगरेट का किसी भी प्रकार का उत्पादन, विनिर्माण, आयत निर्यात, परिवहन, विक्रय (ऑनलाइन विक्रय सहित), वितरण अथवा विज्ञापन (ऑनलाइन विज्ञापन सहित) एक संज्ञेय अपराध माना जायेगा और पहली बार अपराध के मामले में एक वर्ष तक कैद अथवा एक लाख रुपए तक जुर्माना अथवा दोनों और अगले अपराध के लिए तीन वर्ष तक कैद और पांच लाख रुपए तक जुर्माना लगाया जा सकता है। इलेक्ट्रॉानिक सिगरेटों के भंडारण के लिए भी छह माह तक कैद अथवा 50 हजार रुपए तक जुर्माना अथवा दोनों दंड दिए जा सकते हैं । उन्होंने बताया कि ईएनडीएस उत्पादों के दुष्प्रभावों को देखते हुए राज्य के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत द्वारा विश्व तम्बाकू निषेध दिवस (31 मई) के अवसर राज्य में ई-सिगरेट, ई-हुक्का की बिक्री और हुक्का बार के संचालन पर प्रतिबन्ध का निर्णय पहले ही लिया जा चूका है जिससे नि:संदेह ही युवाओं को नशे की गिरफ्त में आने से बचाया जा सकेगा । चौधरी ने बताया कि प्रदेश में एक तिहाई व्यस्क लोग तम्बाकू उपभोगी है तथा राज्य में प्रत्येक दूसरा पुरुष तम्बाकू उपभोग की गिरफ्त में है । उन्होंने बताया कि एक अनुमान के मुताबिक राज्य में प्रतिवर्ष 1500 करोड़ रुपये का अकेले ईएनडीएस उत्पादों का व्यापर होता है जिसमे पान-मसाला व गुटके का व्यापर शामिल नहीं है ।  इसी प्रकार राज्य को हर साल तम्बाकू उत्पादों पर टैक्स के रूप में 800 से 1000 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त होता है, वहीँ राज्य में तम्बाकू उत्पादों का प्रतिवर्ष 40 से 50 हजार करोड़ रुपयों का कारोबार होता है जिसमे से अधिकतर व्यापर अवैध रूप से होता है। इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि राज्य में तम्बाकू उत्पाद बनाने और बचने वाली कंपनियों ने युवाओं के एक बड़े वर्ग को ई-सिगरेट, ई-हुक्कों और अवैध विदेशी सिगरेटों के नशे की गिरफ्त में जकड़ रखा है जो कि बहुत ही घातक है ऐसे में सरकार द्वारा ईएनडीएस उत्पादों पर प्रतिबन्ध लगाये जाने की पहल की जितनी प्रशंसा की जाए उतनी कम है।

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