प्रसव पश्चात ब्रेन आर्टरी एन्युरिज़म फटने का सफलता से इलाज - Pinkcity News

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Friday, 6 September 2019

प्रसव पश्चात ब्रेन आर्टरी एन्युरिज़म फटने का सफलता से इलाज

राजस्थान हॉस्पिटल में आधुनिक तकनीक से महिला को मिला जीवनदान
 जयपुर, 6 सितम्बर 2019। राजस्थान हॉस्पिटल के डॉक्टरों की टीम ने प्रसव पश्चात ब्रेन आर्टरी एन्युरिज़म फटने के मेडिकल एमरजेंसी केस में आधुनिक एंडोवास्कुलर तकनीक से सफलता पूर्वक इलाज करते हुए एक महिला को नया जीवन दिया है।
जयपुर जिले के ग्रामीण क्षेत्र की सुषमा (बदला हुआ नाम) का प्रसव काल के दौरान रक्तचाप बढ़ गया। सफल डिलीवरी के बाद इस उच्च रक्तचाप की वजह से दिमाग को रक्त पहुंचाने वाली केरोटिड आर्टरी में विकसित एन्युरिज़म फट गया। उसे जेएलएन मार्ग स्थित राजस्थान हॉस्पिटल रेफेर किया गया। यहाँ के एम्स प्रशिक्षित न्यूरो सर्जन डॉ अनिल कोठीवाला की सलाह पर सुषमा की एन्ज्योग्राफी की गयी, जिसमे पता चला कि उसे दांयी केरोटिड आर्टरी में दो एन्युरिज़म हैं। एन्युरिज़म वे महीन गुब्बारे होते हैं जिनका फटना एक मेडिकल इमरजेंसी है और इनका दोबारा फटना जान लेवा हो सकता था। डॉ कोठीवाला के अनुसार “एक से अधिक अर्थात मल्टी एन्युरिज़म पाए जाने पर नियमित सर्जरी प्रक्रिया की तुलना में एंडोवास्कुलर तकनीक अधिक सुरक्षित, किफायती होने के साथ साथ त्वरित स्वास्थ्य लाभ देनेवाली है”।
राजस्थान हॉस्पिटल में आधुनिकतम, सुविधा युक्त, ज़ीइ आईज़ीएस इंनोवा 520 केथ लेब मशीन के उपयोग से 3डी नेविगशन द्वारा दोनों एन्युरिज़म का सफलता से कोयलिंग किया गया। अब सुषमा को मोनिटरिंग के साथ स्वास्थ्य लाभ हो रहा है।
डॉ अनिल कोठीवाला टीम हेड एंडोवास्कुलर न्यूरो सर्जरी, डॉ महिमा, डॉ खुशबू उमरवाल एनेस्थेटिस्ट एवं सहकर्मी महेश, तौहीद, सद्दाम व नूतन की टीम ने इस प्रक्रिया को सफल बनाया। अस्पताल के वाईस प्रेसिडेंट डॉ सर्वेश अग्रवाल ने इस पर संतोष जताते हुए बताया कि इस आधुनिकतम केथ लेब मशीन एवं एडवांस्ड हार्ड वेयर के उपयोग से ऐसी प्रक्रिया ज्यादा सुरक्षित हो जाती है। उन्होंने कहा कि आगे भी हमारा ये ही ध्येय होगा कि हम मरीजों को किफायती दरों पर गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सेवा मुहैया करवाएं। सुषमा के परिजन भी समय पर हुए इस बिना चीरफाड़ के इलाज से संतुष्ट एवं खुश हैं।

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