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Sunday, 8 September 2019

जमीन जेडीए की, कब्जा भू माफियाओं का ! फिर भी लड़ाई लड़ रहे ग्रामीण

  • एडीएम चतुर्थ नहीं दे रहे यथास्थिति के आदेश

  • -इसी जमीन पर सरकार बना चुकी है ऐतिहासिक ट्रेंच बाक्स स्कीम,

  • जो सरकार ने ही बाद में पूरे प्रदेश में लागू की थी

जयपुर। राजधानी जयपुर में जेडीए की जमीनों पर भूमाफिया कब्जे कर रहे हैं और जेडीए उनकी सुरक्षा तक करने की स्थिति में नहीं है। इसी तरह का एक बड़ा मामला दौलतपुरा कोटड़ा का है। सन् 1970 में जयपुर के ग्राम कोटड़ा दौलतपुरा के खसरा नंबर 1098 रकबा 38 बीघा 10 बिस्वा भूमि साई चक में 16 बीघा 10 बिस्वा भूमि 29 अगस्त 1970 को चारागाह में आवंटित कर दी गई थी। तब से लेकर अब तक चारागाह के रूप में पंचायत का इस पर कब्जा चला आ रहा है। इस जमीन पर आज तक किसी ने भी काश्तकारी नहीं की है जिसका प्रमाण खसरा गिरदावरी सरकारी रिकॉर्ड है।
42 साल लगातार दौलतपुरा कोटड़ा पंचायत के सरपंच रहे रामसुखदास दादू पंथी ने बताया कि सन 2001 में सरकार के सामने तत्कालीन पूर्व प्रधान मुख्य वन संरक्षक केके कोटिया ने ट्रेंच बान्स स्कीम सरकार के सामने रखी जिसमें भूजल पुर्नभरण, गायों के लिए घास, सघन वृक्षारोपण, भू संरक्षण तथा वनोषधि उत्पन्न करने का पूरा खाका तैयार किया गया था। सरकार ने इस योजना का डेमोस्ट्रेशन करने का कहा, जिस पर कोटिया ने ग्राम दौलतपुरा कोटड़ा की जमीन पर ये काम शुरू किया। इससे पहले 1970 से 2001 तक चरागाह की ये जमीन वन विभाग द्वारा वृक्षारोपण के लिए काम में ली जा रही थी। 2001 में इस जमीन पर ट्रेंच बॉक्स स्कीम के तहत ट्रेंच बॉक्स लगाए गए। इस योजना की क्रियान्वति हेतु तत्कालीन जिला कलक्टर कुलदीप रांका ने वित्तीय प्रबंधन के लिए अकाल राहत में इसकी स्वीकृति प्रदान की। इस काम के क्रियान्वयन  के लिए तत्कालीन एडीएम मुग्धा सिंहा को जिम्मेदारी दी गई और और वन विभाग इसकेमॉडल एजेंसी बना। तीन माह में ही इस योजना के चमत्कारिक परिणाम सामने आने लगे। इसके बाद इस स्कीम का अध्ययन करने के लिए आईएएस एसोसिएशन के 25 अधिकारी भी देखने आए। इसके बाद जयपुर तत्कालीन कलक्टर सुधांश पंत आए और योजना को आगे नियमित किया।  इसके उपरांत संभागीय आयुक्त रोहित ब्राण्डन आए और इस योजना की प्रशंसा की। समय समय पर प्रमुख शासन सचिव सीएस राजन, जनजातीय मंत्री कनकमल कटारा और एसडीएम दीवाकर ने देखा ओर सराहा। इसके बाद योजना को राजस्थान भर में लागू करने के लिए तत्कालीन शासन सचिव तन्मय कुमार ने आदेश जारी कर दिया। ट्रेंच बाक्स स्कीम वर्ष 2015 तक जारी रही। इस बीच मनीष बोहरा नाम के व्यक्ति ने आकर खसरा नंबर 1098 जगह 881 बताते इसे निजी जमीन बताया। ग्रामीणों में इसका काफी विरोध किया। कागजात देखने पर पता चला कि मोती धानका नामक व्यक्ति को 1098 में से (16.50 बीघा के अतिरिक्त) शेष रकबे में से 12 बीघा जमीन अलॉट  हुई थी। जिसने कभी भी न तो जमीन का कब्जा लिया या न सरकार ने उसे कब्जा संभलवाया था। परिवादी और सेटलमेंट वालों ने षड्यंत्र रचकर एक नामान्तरण प्रस्तुत किया। जिसमें मोती धानका ना तो गैर खातेदार दर्ज था ओर न खातेदार दर्ज था। क्योंकि दोनों अधिकार आवंटी को तब मिलते हैं जब वह काश्त करता है। अन्यथा वह आवंटन रद्द हो जाता है। यह सब वैधानिक प्रक्रिया है।
इस मामले में केवल अलाटमेंट हुआ थी, ये प्रमाण पत्र के लिए किया गया। उसका दुरुपयोग करते हुए पटवारी और अमीनों ने मिलकर भू माफियाओं से सांठ गांठ करके इस जमीन का नंबर बदल कर 1098 की जगह 881 दर्ज कर दिया ओर मोती धानका की खातेदारी दर्ज कर दी। फिर भू माफियाओं ने इस जमीन का बेचान मोती धानका से दौसा की जनजाति की महिला के नाम दिखा दिया। उस महिला से वर्तमान में ओम प्रकाश मीणा, छीपा बड़ौद बारां के नाम दर्ज करा दिया। अब मनीष बोहरा इसे अपने द्वारा खरीदी जमीन बता रहा है। ये सभी कार्रवाई फर्जी और गैरकानूनी है, कूटरचित दस्तावेजों और रिकॉर्ड में हेरफेर करके दी गई है। रामसुख दास ने बताया कि 1982 से ये गांव जेडीए के क्षेत्राधिकार में। ऐसी सरकारी भूमियों का मालिक जेडीए है। भू माफिया इन पर काबिज हो रहे हैं। सवाल ये है जेडीए रेंज में 400 से अधिक गांवों में स्थित सरकारी जमीनों की रखवाली करना जेडीए के बस में नहीं है तो इन जमीनों को बचाएगा कौन?
ग्रामीण लड़ रहे हैं लम्बी लड़ाई
दौलतपुरा कोटड़ा के जागरुक ग्रामणों ने इस फर्जी कार्रवाई को निरस्त करने के लिए एडीएम तृतीय के यहां अपील करते हुए स्थगन आदेश मांगा था कि मौके पर रिकॉर्ड के अनुसार यथास्थिति रखी जाए परन्तु एडीएफ ने बेचान नहीं करने पर रोक लगाई और मौके की स्थिति पर स्टे नहीं दिया। हमने पुन: प्रार्थनापत्र दिए लेकिन, उनको खारिज कर दिया जाता है। भू माफियाओं ने कब्जे के लिए पूरा मौका दिया जा रहा है। इस मामले में पांच साल से मौका रिपोर्ट, रिपोर्ट ही नहीं आ  पा रही है। ऐसा करके भू माफियाओं को इस जमीन पर कब्जा करने के लिए पूरा मौका दिया जा रहा है।

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