"सादा जीवन उच्च विचार" की भावना भाना ही उत्तम शौंच धर्म : मुनि विश्वास सागर - Pinkcity News

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Friday, 6 September 2019

"सादा जीवन उच्च विचार" की भावना भाना ही उत्तम शौंच धर्म : मुनि विश्वास सागर

9 वे तीर्थंकर पुष्पदंत भगवान के मोक्ष कल्याणक पर चढ़ाया निर्वाण लड्डू, मंगलवार को " उत्तम सत्य धर्म " मनाया जायेगा
 जयपुर। दशलक्षण पर्व की " परीक्षा का आज चौथा दिन - उत्तम शौच भावना, प्राणी पेट तो भर सकता है लेकिन पेटी नहीं भर पाता किन्तु आज सभी अपनी पेटी भरने में लगे है। इसलिए मन की पवित्रता नष्ट होती जा रही है और 99 के चक्कर में लगे हुए है। ईमानदारी से पेट भरा जा सकता है लेकिन पेटी भरने के लिए तो बेईमानी, अन्याय और अनीति से ही कमाना पड़ता है तभी तिजोरी भर सकती है। यह उक्त प्रवचन शुक्रवार को प्रातः 8.30 बजे मुनि विश्वास सागर महाराज ने दशलक्षण महापर्व के चौथे दिन मानसरोवर स्थित वरुण पथ दिगम्बर जैन मंदिर के आचार्य विद्या सागर सभागार में चल रही " उत्तम शौच धर्म " विधान पुजन के दौरान हुई धर्मसभा के दौरान अपने आशीर्वचन में कहा।
 धर्मसभा के दौरान मुनि विभंजन सागर महाराज ने कहा कि अधर्म से कमाया हुआ द्रव्य का नाश भी दवाइयों में नष्ट होता है अतः कभी ऑपरेशन में, कभी जमानत कराने में, कभी इलाज में अथवा छापा पड़ने से नष्ट होता रहता है। लोभी व्यक्ति के साथ पांचो पाप भी जुड़ जाते है इसलिए वह पांच पापों की सजा भोगने का अधिकारी हो जाता है। हमारी आवश्यकता सीमित हो तो हमे लोभ का सहारा नहीं लेना पड़ेगा, संतोषी प्राणी हमेशा परिग्रह को कम रखेगा और सादा जीवन उच्च विचार के आदर्शो को अपनाकर चलेगा, हमारे आचार्यो का कहना है - एक बार अज्ञानतावश ढगे जाना अच्छा है लेकिन लालच वश दूसरों को ठगना बहुत बुरा है, एक बार बूरे संस्कारो का बीज बो दिया जाय फिर वृद्धावस्था पर्यन्त वो गलत कार्य करता रहता है। अतःआवश्यकता है सही राह निर्देशन की " और " अधिक चाहिए " यह प्रवृति छोड़ संतोष को धारण करना चाहिए।  सद्गुणों की प्राप्ति अधिक से अधिक हो यह भावना बढ़ती रहे और परिग्रह संचय का भाव कम से कम रहे यही उत्तम शौंच धर्म का सार है। "
 प्रचार संयोजक अभिषेक जैन बिट्टू ने बताया की शुक्रवार को प्रातः 6 बजे से दशलक्षण महापर्व के चौथे दिन की मंगल शुरुवात मुनि विश्वास सागर और मुनि विभंजन सागर महाराज ससंघ सानिध्य में मूलनायक महावीर भगवान की जिन बिम्ब प्रतिमा जी पर स्वर्ण एवं रजत कलशो से कलशाभिषेक कर प्रारम्भ हुई ओर उसके बाद समाज श्रेष्ठीगणो द्वारा जिनालय की तीनों वेदियों पर मुनि श्री के मुखारविंद विश्व के कल्याण की भावना और सुख - सम्रद्धि की कामना करते हुए वृहद शांतिधारा की गई, जिसके उपरांत आचार्य विघा सागर सभागार में पांडुकशीला पर विराजमान श्रीजी के सौधर्म इंद्र डॉ सुनील जैन डॉ त्रिशला जैन परिवार द्वारा कलशाभिषेक एवं शांतिधारा कर उत्तम शौंच धर्म विधान पूजन प्रारम्भ किया गया जिसमे बड़ी संख्या में श्रावक -श्राविकाओं भाग लेकर ने संगीतमय आराधना करते हुए जिनेन्द्र प्रभु की साधना की ओर अपने कर्मो की निर्जरा के लिए अष्ट द्रव्य से पूजन कर द्रव्य चढाये। इससे पूर्व जिनालय में प्रातः 7.30 बजे से युगल मुनिराजों के सानिध्य में जैन धर्म के 9 वे तीर्थंकर पुष्पदंत भगवान का मोक्ष कल्याणक पर्व मनाया गया जिसमे श्रावकों द्वारा सामूहिक निर्वाण काण्ड पाठ, मंगलाष्टक पाठ के गुणगान के साथ संपूर्ण जयमाला महार्घ का पठन कर मत्रोच्चार के साथ सामूहिक निर्वाण लड्डू चढ़ाया गया। मोक्षकल्याणक दिवस की बेला पर भगवान पुष्पदंत स्वामी की अष्ट द्रव्यों से पूजन अर्चना भी की गई।
 संगठन मंत्री सुनील गंगवाल ने बताया कि सांध्यकालीन में सायं : 6.30 बजे से श्रीजी के महामंगल आरती और दस धर्म पर सायंकालीन शास्त्र प्रवचन प्रतिष्ठाचार्य प्रधुमन शास्त्री द्वारा सम्पन्न किये गये। जिसके उपरांत समाज समिति द्वारा संयोजक विनेश सौगानी के निर्देशन धार्मिक हाऊजी प्रतियोगिता का भव्य आयोजन गीत-संगीत के साथ आयोजन किया गया, इस आयोजन में वरुण पथ दिगम्बर जैन समाज के 300 से अधिक परिवारों सहित शहरभर से समाज श्रेष्ठिगणों ने भी भाग लिया. कार्यक्रम के दोरान अभी हाल ही में हुए समाज की विभिन्न संस्थानों में विजय हुए राजकुमार कोठ्यारी अध्यक्ष अखिल भारतीय दिगम्बर जैन तीर्थ क्षेत्र कमेटी राजस्थान अंचल, महेश काला अध्यक्ष वीर सेवक मंडल, प्रदीप जैन लाला अध्यक्ष राजस्थान जैन युवा महासभा एवं देवेन्द्र गिरधरवाल संयोजक दिगम्बर जैन पदयात्रा महासंघ सहित समाज श्रेष्टि सुभाष पांड्या का अभिनंदन समिति अध्यक्ष एमपी जैन, मंत्री जेके जैन, कोषाध्यक्ष केलाश सेठी सहित समिति के सभी पदाधिकारियों द्वारा किया गया. 

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