साधना का दूसरा नाम ही है देवहूति : पुरुषोत्तम शरण - Pinkcity News

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Monday, 16 September 2019

साधना का दूसरा नाम ही है देवहूति : पुरुषोत्तम शरण

गोविंद देवजी मंदिर में भागवत कथा शुरू
जयपुर। दिवगंत संत नारायणदासजी महाराज के अमृत महोत्सव के उपलक्ष्य में गोविंद देवजी मंदिर के सत्संग भवन में आयोजित श्रीमद्भगवत कथा में व्यासपीठ से पुुरुषोत्तम शरण महाराज ने दूसरे दिन कपिल-देवहुति संवाद और सत्ती चरित्र की कथा का श्रवण करवाया।
प्रारंभ में गोविंद देवजी मंदिर के प्रबंधक मानस गोस्वामी ने कथाव्यास को ठाकुरजी की छवि प्रदान की। मंगलवार को ध्रुव-प्रहलाद चरित्र और नृसिंह अवतार की कथा होगी।
कपिल-देवहुति संवाद में पुुरुषोत्तम शरण महाराज ने कहा कि भगवान कपिलजी का दर्शन करने के लिए ब्रह्माजी स्वयं आए और साथ में 10 मानस पुत्रों को भी लेकर आए। ब्रह्माजी ने अपने मरीचि आदि 9 पुत्रों का विवाह कर्दमजी की 9 कन्याओं से संपन्न कराया।
सबसे बड़ी बेटी कला का विवाह मरीचि के साथ किया। महात्मा अत्रि का विवाह अनुसुइया से हुआ विशेष वशिष्ठजी के साथ अरुंधति का विवाह हुआ। भृगु जी के साथ ख्याति का विवाह हुआ। कर्दमजी ने देवहूति से कहा कि बेटियों का विवाह भी हो गया और तुम्हें भगवान के रूप में पुत्र भी प्राप्त हो गया। अब तो हमें चलना चाहिए। कर्दमजी तुंरत सब माया जाल छोड़ कर वन की ओर चले गए।  कर्दम और देवहूति का अर्थ स्पष्ट करते हुए उन्होंने कहा कि कर का मतलब होता है इंद्रियां और दम का मतलब दमन करना। अर्थात जिसने अपने इंद्रियों का दमन कर दिया उसका नाम है कर्दम। वहीं देवहूति एक साधना है, जिसके माध्यम से हमें 9 भक्ति अर्थात नवधा भक्ति प्राप्त होती है। कर्दमजी की 9 कन्याएं नवधा भक्ति है और व्यक्ति जब नवो भक्ति को प्राप्त करता है। तब गोविंद की प्राप्ति कपिल भगवान के रूप में होती है। कथा 21 सितंबर तक प्रतिदिन दोपहर 12 से शाम पांच बजे तक होगी।

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