मुनि विभंजन सागर ने किये कैश लोच, श्रावकों ने किया णमोकार महामंत्र और भजनों का गुणगान - Pinkcity News

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Saturday, 31 August 2019

मुनि विभंजन सागर ने किये कैश लोच, श्रावकों ने किया णमोकार महामंत्र और भजनों का गुणगान

 त्याग, तप की मूरत होते है दिगम्बर जैन साधु, बिना औजार, स्वयं के हाथों से करते है केशलोचन : मुनि विश्वास सागर
जयपुर। मानसरोवर के वरुण पथ स्तिथ दिगम्बर जैन मंदिर में शनिवार को मुनि विभंजन सागर महाराज ने अपने केशों का लोचन किया। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु उमड़े और मुनि श्री के द्वारा किये जा रहे केशों का लोचन होते देखा। इस दौरान श्रावकों ने णमोकार महामंत्र का जाप किया और भजनों का गुणगान किया।
मंत्री जेके जैन ने बताया कि शनिवार को मुनि विभंजन सागर महाराज का केशलोचन था, यह दिगम्बर जैन साधुओं के 108 मूल गुणों में से एक है जिसका पालन प्रत्येक दिगम्बर जैन आचार्य, मुनि, आर्यिका आदि करते है और प्रत्येक साधु वर्ष में 4 बार स्वयं के हाथों से केशों का लोचन करते है।
इस अवसर पर मुनि विश्वास सागर महाराज ने सभा को संबोधित करते हुए आशीर्वचन दिए और केशलोचन कि महत्त्वता बताते हुए कहा कि " केशलोचन करना प्रत्येक दिगम्बर जैन साधु का धर्म है, जिसका उल्लेख शास्त्रों में भी अंकित है। आचार्यो ने कहा कि एक दिगम्बर जैन साधु को केश लोच करते देखने से 100 जिनालयों के दर्शन करने जितना पुण्य मिलता है। क्योकि साधु त्याग और तप की जीती जागती मूरत होते है। जब कोई भी दिगम्बर जैन साधु अपने केशों का लोचन करता है तो वह उस दिन का उपवास रखते है और केश लोचन करते समय वह किसी भी प्रकार के हथियारनुमा (ब्लेड, उस्तरा, कैंची, चाकू आदि) का इस्तेमाल नही करते है एवं स्वयं के हाथों से एक - एक केश को अलग करते हुए दर्द, जख्म आदि का त्याग करते हुए जिनेन्द्र अर्चना करते है। स्वयं के हाथों से केश लोच करने से हिंसा पर अहिंसा की विजयी प्राप्ति का एहसास होता है। जिसे देखकर प्रत्येक श्रावक ध्यान लगाते है कि जब कोई साधु बिना किसी कारण वश स्वयं के हाथों से केशलोचन करता है तो उनको कितनी पीड़ा होती है। हम तो फिर भी एक श्रावक है जो बिना मतलब एक-दूसरे से उलझते रहते है। साधु को केशलोचन करते देखने से प्रत्येक श्रावक को भावना भानि चाहिए कि हम हिंसा स्वयं बर्दास्त कर सकते है किंतु किसी पर हिंसा नही करेगे।
प्रचार संयोजक अभिषेक जैन बिट्टू ने बताया कि शनिवार को सभा की मांगलिक शुरुवात समाजसेवी पूरनमल अनुपड़ा परिवार द्वारा चित्र अनावरण, दीप प्रवज्जलन और मुनि श्री के पाद प्रक्षालन कर प्रारम्भ की। रविवार को रोठ तीज पर्व मनाया जाएगा। इस दौरान जैन मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ेगी और तीन चौबीसी विधानपूजन के साथ श्रीजी के सम्मुख रोठ चढ़ाएंगे। 

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