केंद्र सरकार किसानों को खत्म करने की ओर चल रही है : रामपाल जाट - Pinkcity News

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Tuesday, 9 July 2019

केंद्र सरकार किसानों को खत्म करने की ओर चल रही है : रामपाल जाट

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जयपुर। हालिया आये केंद्र सरकार के बजट के उपरांत केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का साक्षात्कार पड़ा, जिसे देखकर दुख हुआ कि केंद्र सरकार की योजनाओं और विचारों में किसान का उल्लेख तक नही है, केंद्र सरकार के बजट से देशभर का किसान हताश और निराश है, बजट से साफ प्रतीत होता है कि केंद्र सरकार देश से किसानों को खत्म करने की साजिश रच रही और उसी दिशा की ओर कार्य कर रही है यह कहना है आम आदमी पार्टी के राजस्थान प्रदेश अध्यक्ष एवं किसान महापंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामपाल जाट का।
 किसान नेता रामपाल जाट ने अपनी विज्ञप्ति में कहा कि प्रतीत हुआ है कि सरकार ने किसानों को खत्म करने की ठान ली है और इस कदम का विरोध ना हो व जनता भृमित रहे उसके लिए बजट का जोर-शोर से प्रचार-प्रसार किया जा रहा है कि यह बजट किसान, ग्राम और गरीबों पर केंद्रित है जबकि असलियत में यह बजट पूर्णतया पूंजीपतियों पर पोषित करने वाला है और इनको बल देने वाले किसान, ग्राम और गरीब विरोधी है। इस बजट ने देश के किसानों को " जीरो बजट " के नाम पर " जीरो " किया है। 
जाट ने कहा कि बजट के बाद साक्षात्कार से यह सच केंद्रीय वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण के होठों पर आ गया। उनके साक्षात्कार के अनुसार “ लंबे समय तक महंगाई दर बहुत कम रहना भी अर्थव्यवस्था के लिए ठीक नही है।“ फिर कहा कि " कोशिश है कि अर्थव्यवस्था का वर्चुअल साइकिल शुरू हो । लोगो का वेतन - मजदूरी बढ़े। इसके लिए बाजार में मांग बढ़े और उत्पादन बढ़े । “ लेकिन बजट में इसका उल्लेख तक नही है कि कैसे वेतन बढ़े, कैसे उत्पादन बढ़े।

जबकि देश मे वेतन भोगियों की संख्या कुल जनसंख्या में 5 फीसदी से कम है और किसानों और कृषि व उसके सहायक धंधों पर निर्भरो की संख्या 75 फीसदी से अधिक है। उनकी आय बढ़ाने के लिए कृषि उपजों के दाम बढ़ाने और न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद की चर्चा आती है तो सरकार को इससे मुद्रा स्फिती बढ़ने का खतरा मालूम होता है। जबकि यह कदम अर्थव्यवस्था के पहिये की गति बढाने वाला है। इससे अर्थव्यवस्था गतिमान होगी। क्योंकि 75 फीसदी की जेब मे पैसा आएगा तो बाजार में मांग बढ़ेगी। उसके कारण विभिन्न प्रकार के व्यवसाय आरम्भ होंगे। इससे व्यवसाय वालो की आय बढ़ेगी व मांग में ओर तेजी आएगी। यानी इस मांग पूर्ति से अर्थव्यवस्था के पंख लग जाएंगे।
 तो भी सरकार महंगाई नियंत्रण के नाम पर कृषि उत्पादों के ही दामों को गिराने का काम करती है। दूसरी ओर कृषि में प्रयुक्त होने वाले डीजल में मूल्य व्रदी को उचित ठहराने के लिए मुद्रा स्फिति को कम होने से रोकना बताती है। ऐसा नही हो सकता है कि सरकार जानकार नही है बल्कि वह अर्थ शास्त्र के सिंद्धान्तों को भी तोड़-मरोड़ कर अपनी सुविधा अनुसार उपयोग कर जनता को भृमित करने की साजिश रच रही है। जबकि अर्थ शास्त्र के सिंद्धांत तो शास्वत है।
 

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