पब्लिक हैल्थ को एडवांस पब्लिक हैल्थ बनाने के लिए...'देश में पब्लिक हैल्थ को उचित प्राथमिकता दिए जाने की जरूरत' - Pinkcity News

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Wednesday, 31 July 2019

पब्लिक हैल्थ को एडवांस पब्लिक हैल्थ बनाने के लिए...'देश में पब्लिक हैल्थ को उचित प्राथमिकता दिए जाने की जरूरत'

पूर्णिमा यूनिवर्सिटी में 'पब्लिक हैल्थ टुडे' पर आयोजित किया गया पैनल डिस्कशन
जयपुर, 31 जुलाई। पूर्णिमा यूनिवर्सिटी तथा जोधपुर स्कूल आॅफ पब्लिक हैल्थ की ओर से बुधवार को यूनिवर्सिटी में 'पब्लिक हैल्थ टुडे — ए कॉल फॉर एक्शन' विषय पर पैनल डिस्कशन आयोजित किया गया और हैल्थ चैकअप कैम्प लगाया गया। इसमें इस क्षेत्र से जुड़ी प्रमुख शख्शियतों द्वारा इस विषय के विभिन्न पहलुओं के बारे में चर्चा की गई। पैनलिस्ट्स में भारत सरकार के पूर्व स्वास्थ्य सचिव तथा नेशनल एड्स कंट्रोल आॅर्गेनाइजेशन के पूर्व निदेशक प्रो. जेवीआर प्रसादा राव, पब्लिक हैल्थ फाउंडेशन आॅफ इंडिया तथा वर्ल्ड हार्ट फैडरेशन के प्रेसीडेंट पद्मभूषण डॉ. के. श्रीनाथ रेड्डी, यूएस डिपार्टमेंट आॅफ वेटरेंस अफेयर्स के एपिडेमियोलॉजिस्ट डॉ. ग्रेगरी वी. फेंट और आईआईएचएमआर— दिल्ली व विश फाउंडेशन के पूर्व निदेशक व सीईओ डॉ. दीपांजन सुजित रॉय शामिल थे। इस आयोजन के साथ पूर्णिमा यूनिवर्सिटी में स्कूल आॅफ पब्लिक हैल्थ की औपचारिक शुरुआत हुई।
इस अवसर पर प्रो. के. श्रीनाथ रेड्डी द्वारा लिखित पुस्तक 'मेक हैल्थ इन इंडिया' का विमोचन भी किया गया। पूर्णिमा यूनिवर्सिटी के डायरेक्टर राहुल सिंघी ने बताया कि पूर्णिमा यूनिवर्सिटी व जोधपुर स्कूल आॅफ पब्लिक हैल्थ के बीच एकेडमिक प्रोग्राम्स के लिए कॉलोब्रेशन किया गया है। इसके तहत अंतर्राष्ट्रीय स्तर की फैकल्टी द्वारा स्टूडेंट्स को विषयों की जानकारी दी जाएगी। इव अवसर पर जेएसपीएच के फाउंडर व प्रेसीडेंट डॉ. अनिल पुरोहित, जेएसपीएच के को—सीईओ डॉ. जगदीश हर्ष, पूर्णिमा यूनिवर्सिटी के चांसलर शशिकांत सिंघी व प्रेसीडेंट डॉ. सुरेश चंद्र पाधे भी उपस्थित थे।
पैनल डिस्कशन में विशेषज्ञों ने पब्लिक हैल्थ के संदर्भ में भारत में अंतर्राष्ट्रीय मामलों, कानून, मैनेजमेंट, अर्थव्यवस्था जैसे क्षेत्रों में किए जा रहे प्रयासों के बारे में बताया। उन्होंने ऐसे कई तरीके बताए जिनके जरिए पब्लिक हैल्थ को एडवांस पब्लिक हैल्थ बनाया जा सकता है।  प्रो. जेवीआर प्रसादा राव ने बच्चों को स्कूली शिक्षा के साथ ही पब्लिक हैल्थ के बारे में भी जागरूक किए जाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने चिंता प्रकट करते हुए कहा कि भारत में पब्लिक हैल्थ कभी पॉलिटिकल प्रायोरिटी नहीं रही है और इस पर देश की कुल जीडीपी का एक प्रतिशत से भी कम भाग खर्च किया जाता है, जिसे बढ़ाकर 7—8 प्रतिशत किया जाना चाहिए। डॉ. ग्रेगरी वी. फेंट ने पब्लिक हैल्थ की परिभाषा बताते हुए कहा कि इसका फोकस पॉपुलेशन होता है। डॉ. दीपांजन सुजित रॉय ने बताया कि पब्लिक हैल्थ बुक्स से नहीं, बल्कि सही मायनों में पब्लिक से ही बनता है।

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