32 मीटर से ऊंची इमारतों के निर्माण की अनुमति देने पर रोक - Pinkcity News

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Thursday, 4 July 2019

32 मीटर से ऊंची इमारतों के निर्माण की अनुमति देने पर रोक

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जयपुर, 4 जुलाई। राजस्थान हाईकोर्ट ने प्रदेश में 32 मीटर से ऊंची इमारतों के निर्माण के लिए अनुमति देने पर रोक लगा दी है। अदालत ने स्थानीय निकाय विभाग के प्रमुख सचिव और निदेशक को सुनिश्चित करने को कहा कहा है कि जब तक अग्निशमन विभाग के पास 70 मीटर की ऊंचाई तक आग बुझाने के संसाधन आने तक 32 मीटर से ऊंची इमारतों के निर्माण की अनुमति नहीं दी जाए। अदालत ने विभाग से पूछा है कि अब तक 32 मीटर से ऊंची कितनी इमारतों के निर्माण की अनुमति दी गई है। वहीं अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिए हैं कि अग्निशमन विभाग के सभी खाली पदों को दो माह में भरा जाए। न्यायाधीश मोहम्मद रफीक और न्यायाधीश नरेन्द्रसिंह की खंडपीठ ने यह आदेश कुणाल रावत की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए।
अदालत ने राज्य सरकार को आदेश दिए हैं कि बहुमंजिला इमारातों में जांच अभियान चलाकर फायर फाइटिंग सिस्टम की जांच की जाए। इसके अलावा सभी पीजी, कोचिंग सेंटर आदि जांच कर फायर फाइटिंग सिस्टम को दुरुस्त करने को कहा है। अदालत ने राज्य सरकार से गत वर्ष आगजनी से हुई मौतों के साथ ही प्रदेश में चल रहे प्रशिक्षण संस्थाओं की जानकारी भी पेश करने को कहा है। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि सरकार की रिपोर्ट आंखे खोलने वाली है। मामले को लेकर सरकारी मशीनरी भी गंभीर नहीं है।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अदालत में पालना रिपोर्ट पेश की गई। राज्य सरकार ने रिपोर्ट में माना की पूर्व में दिए आदेश की पालना नहीं की गई है। रिपोर्ट में बताया गया कि अग्शिमन विभाग में कुल 1203 पद खाली चल रहे हैं। उदयपुर, अजमेर और कोटा में चीफ फायर ऑफिसर के पद खाली हैं। वहीं फायर ऑफिसर के 24 पदों में से 17 पदों पर अधिकारी नहीं है। इसी तरफ एएफओ के 69 पदों में से 45 पद खाली हैं। रिपोर्ट में कहा गया कि टिंडल के 184 में से 138, फायरमेन के 1931 में से 605 और चालक के 502 पदों में से 395 पद खाली चल रहे हैं। वहीं जयपुर, जोधपुर और कोटा में आग बुझाने के लिए 32 मीटर ऊंची लेडर मौजूद है। वहीं 70 मीटर ऊंचाई की लैडर खरीद प्रक्रियाधीन है। इसके बाद जोधपुर, और उदयपुर को सत्तर मीटर व भिवाडी को साठ मीटर ऊंची लैडर उपलब्ध हो जाएगी। राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि गत वर्ष जयपुर नगर निगम क्षेत्र में एक हजार तीन सौ आगजनी की घटनाएं हुई। इसी तरह जोधपुर में 1035, उदयपुर में 957, कोटा में 603, भरतपुर में 305, बीकानेर में 2016 और अजमेर में 207 आगजनी की घटनाएं हुई। हालांकि सरकार की ओर से इन आगजनी में हुई जनहानि की जानकारी नहीं दी गई। वहीं याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि पूर्व में दिए अदालती आदेश के बाद 28 मई को सूरत में बडी आगजनी हुई। इस घटना से भी राज्य सरकार ने सबक नहीं लिया और अब तक आदेश की पालना में कोई अभियान नहीं चलाया गया। वहीं अदालत ने गत दिनों परकोटे में हुई आगजनी की घटना के बाद जले सामान को नहीं हटाने के मामले में अमितोष पारीक को कमिश्नर नियुक्त कर रिपोर्ट पेश करने को कहा है।

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