राजस्थान के सरकारी व निजी डॉक्टर बालिका लिंगानुपात में बढ़ोतरी व जैण्डर समानता के लिए वृहत स्तर पर करेगें प्रयास : डॉ.अजय चौधरी - Pinkcity News

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Sunday, 2 June 2019

राजस्थान के सरकारी व निजी डॉक्टर बालिका लिंगानुपात में बढ़ोतरी व जैण्डर समानता के लिए वृहत स्तर पर करेगें प्रयास : डॉ.अजय चौधरी

कार्यशाला में स्वैच्छिक संगठन एसआरकेपीएस प्रतिनिधी राजन चौधरी
जयपुर। सामाजिक सरोकार निभाने के लिए राजस्थान के सरकारी व गैर सरकारी डॉक्टर लिंग जांच व चयन रोकने के लिए तथा जैण्डर समानता लाने के लिए वृहत स्तर पर प्रयास करेगें ताकि 2021 की जनगणना में बालिका लिंगानुपात में बेहतर बढ़ोतरी हो सके। उक्त विचार अखिल राजस्थान सेवारत चिकित्सक संघ के प्रदेशाध्यक्ष डॉ.अजय चौधरी ने व्यक्त किये।
रविवार को होटल हॉलिडे इन में अखिल राजस्थान सेवारत चिकित्सक संघ राजस्थान, इण्डियन मेडिकल एसोसिएशन राजस्थान,स्वैच्छिक संगठन एसआरकेपीएस व एडीएफ नई दिल्ली के संयुक्त तत्वाधान में एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन जनगणना 2021 में बालिका लिंगानुपात में सुधार विषय पर आयोजित किया गया।
अरिसदा प्रदेशाध्यक्ष डॉ.अजय चौधरी ने कार्यशाला को संबोधित करते हुए कहां कि सरकारी सेवा से जुड़े हुए राजस्थान के समस्त चिकित्सकगण सभी जिलों में बालिका लिंगानुपात में बढ़ाने व जैण्डर समानता लाने के लिए अगले दो वर्ष तक कार्य योजना के अनुसार जन जागरूकता व पीसीपीएनडीडी एक्ट का प्रभावी क्रियान्वयन करवाने में पूर्ण सहयोग करेगें। चौधरी ने कहां कि सामाजिक कूरूतियों के कारण बेटा व बेटी में भेदभाव किया जाता है ओर बेटियों के प्रति दवेम दर्जे का व्यवहार करने की मानसीकता आम जन में बनी हुई है इससे दूर करने में चिकित्सक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
 डॉ.चौधरी ने कहां कि अखिल राजस्थान सेवारत चिकित्सक संघ सम्पूर्ण राजस्थान में सामाजिक सरोकार के तहत पेड़ पौधे लगाना, बेटी के जन्म पर उत्सवों का आयोजन करवाना सहित अनेक नवाचारों का आयोजन कर सामाजिक सरोकार निभाने में अपना योगदान देता है इसी के तहत अगले दो वर्ष में प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र तक बेटियों की संख्या बढ़ाने के लिए कार्य किया जाऐगा।
इण्डियन मेडिकल एसोसिएशन के प्रदेश सचिव डॉ.वी.के जैन ने कहां कि जैण्डर समानता लाने के साथ-साथ पीसीपीएनडीटी एक्ट में भी सुधार करने की महत्ती आवश्यकता है। उन्होनें कहां कि कई बार पीसीपीएनडीटी एक्ट की आड़ में डॉक्टरों का मानसिक व आर्थिक शोषण भी किया जाता है। डॉ.जैन ने कहां कि आईएमए राजस्थान के सभी जिलों में अरीसदा व स्वैच्छिक संगठनों के साथ मिलकर ग्राम स्तर तक कार्य करने के लिए तैयार है ताकि 2021 की जनगणना में बालिका लिंगानुपात में बढ़ा हुआ परिवर्तन देखा जा सके। एडीएफ नई दिल्ली की प्रतिनिधि अनुश्री बेनाड़ ने कार्यशाला के प्रारम्भ में स्वागत करते हुए कहां कि पीसीपीएनडीटी एक्ट के प्रभावी क्रियान्वयन से राजस्थान के जीवित जन्म शिशु दर के आंकड़ो के अनुसार बालिका लिंगानुपात में बेहतर सुधार प्रतिवर्ष दिखाई दे रहा है यह सुधार लगातार जारी रखने के लिए एक्ट का प्रभावी क्रियान्वयन व प्र्रचार-प्रसार के कार्यक्रमों का भी आयोजन समय-समय पर किया जाना चाहिए।
स्वैच्छिक संगठन एसआरकेपीएस प्रतिनिधी राजन चौधरी ने कहां कि राजस्थान में गत छ:वर्र्षो में पीसीपीएनडीटी एक्ट के प्रभावी क्रियान्वयन डॉटर आर प्रिसीयस व बेटी बचाओं बेटी पढ़ाओं अभियान जैसे अनेेक कार्यक्रमों के कारण जीवित जन्म शिशु दर के आंकड़ो में बालिका लिंगानुपात वर्ष 2018-19 में 948 हो गया है। चौधरी ने कहां कि चिकित्सकों के सभी संगठन व स्वैच्छिक संस्थाएं मिलकर कार्य करेगी तो आगामी दो वर्ष में बेहतर परिणाम प्राप्त किये जा सकते है। कार्यशाला को अरीसदा के डॉ.नरोतम शर्मा, डॉ.सजीव गुप्ता, डॉ.ज्योतसना रंगा, डॉ.जी.डी.महेश्वरी, डॉ.एम के पोदार, डॉ.लक्ष्मण सिंह ओला, डॉ.मोदी सहित अनेेक चिकित्स संघों के पदाधिकारियों ने विचार व्यक्त किये। कार्यशाला के अंत में डॉ.ज्योतसना रंगा ने सभी का आभार प्रकट किया।

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