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Saturday, 1 June 2019

ऊर्जा जगाने को उमड़े शहरवासी लगभग 15,000 से अधिक साधकों ने लिया हिस्सा


राजस्थान कॉलेज में शुरू हुआ मनुष्य मिलन साधना शिविर
जयपुर।  राजस्थान कॉलेज जेएलएन मार्ग पर आयोजित दस दिवसीय मनुष्य मिलन साधना शिविर का शनिवार को शुभारंभ हुआ शिविर में लगभग 15,000 से अधिक साधकों ने हिस्सा लिया। सन टू ह्यूमन enliven एसोसिएशन की ओर से आयोजित शिविर में पूज्य परमालय जी ने विशाल मंच से साधकों को संबोधित करते हुए शिविर में जिंदा आहार जिंदा नाभि और जिंदा ध्यान के बारे में जानकारी दी। शिविर के पहले दिन उन्होंने हमारे शरीर में तीन महत्वपूर्ण अग्नि का वर्णन किया।
योग गुरु परम आलय ने बताया कि मनुष्य जीवन कैसे समृद्धिशाली बने कैसे हम अपना अपने बच्चों का अपने परिवार का जीवन सुख समृद्धि शांति से भरपूर आनंद विकसित कर सकें। इसके लिए हमें शुरुआत अपने शरीर की शक्तियों को समझने से करना पड़ेगी परम आलय जी ने बताया कि हमारे शरीर में तीन तरह के अग्नि पैदा होती है और इन तीन तरह की अग्नि को विकसित करने के लिए ज्ञानियों ने तीन संध्या का उपयोग करने को कहा है। सुबह दोपहर और शाम पहली अग्नि का जन्म हमारे पेट में जठराग्नि में होता है। जठराग्नि को सूर्य के अग्नि भी कहते हैं। जठराग्नि भोजन से बनती है। उन्होंने यह भी बताया कि यह पृथ्वी सभी प्राणियों के शरीर के हिसाब से भोजन पैदा करती है। सभी प्राणी अपने शरीर रूपी मशीन में भोजन पहुंचाकर अग्नि पैदा हो सके इस प्रकार भोजन करते हैं। सिर्फ मनुष्य को छोड़कर आज मनुष्य अपना भोजन पूरा विकृत कर चुका है। इसलिए आज हमारी पहली अग्नि विकृत हो चुकी है।
 आज पूरी पृथ्वी पर जितने प्राणी रहते हैं, वहां ना तो हॉस्पिटल है, ना कोर्ट है, ना पुलिस है फिर भी पहले तल पर जीवन पशु अच्छा जी रहे हैं। मनुष्य में अगर पहली अग्नि सही हो जाएगी तो बीमारी अपने आप विदा हो जाएगी। कभी हॉस्पिटल जाने की व मेडिसिन लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
 उन्होंने दूसरी अग्नि के बारे में बताया जो कि मूलाधार चक्र पर पैदा होती है वही तीसरी अग्नि जो कि मस्तिष्क में होती है उसी अग्नि की शक्तियों को जगा कर हम ज्ञान पैदा कर सकते हैं उसी ज्ञान से हम अपने जीवन को जिस उद्देश्य से हमने मन से शरीर को प्राप्त किया है विकसित कर सकते हैं।
हम हमारे बच्चे व हमारे परिवार का जीवन बहुत सुंदर तरीके से विकसित हो उसके लिए पैसा बंगला गाड़ी बैंक बैलेंस प्लाट जमीन सोना चांदी हीरे जवाहरात अन्य सामग्री सहयोगी हो सकते हैं। पर इन से जीवन विकसित नहीं हो सकता जीवन तो शरीर की शक्तियों को जगाने के सूत्रों का पता होने पर तथा उनका कैसे उपयोग करें इसकी जानकारी होने पर ही विकसित हो सकता है। फिर चाहे उसे मोक्ष कहे ब्रह्म ज्ञान कहीं निर्वाण कहे या कोई भी नाम दे उससे कोई भी फर्क नहीं पड़ता।

 साधना की धारा सतत बनी रहे
हमारे जीवन को शक्तिशाली बनाने के लिए सबसे महत्वपूर्ण सूत्र है साधना की धारा ना टूटे जैसे गंगा गंगोत्री से निकलती है उसकी धारा सतत बहती है और सागर तक पहुंच जाती है हमारी शक्ति पैदा करने की धारा सतत होने से धारणा के शक्ति जागती है तथा धारणा से हम जो चाहे वह प्राप्त कर सकते हैं। शिविर में साधना की सतत धारा, सतत धारा से धारणा, धारणा से साहस ,साहस से 10 दिन सुबह शाम की 20 संध्या की शक्तियों को जगाया जाएगा सुबह सूर्य मिलन के द्वारा एवं शाम को चंद्र मिलन के द्वारा प्रयोग करवाए जाएंगे।

शिविर में प्रथम सत्र सुबह के ब्रह्म मुहूर्त में अग्नि के साथ पहला ओरा बनाने का प्रयोग विराट विजन कैसे विकसित हो, शरीर की विद्युत को सक्रिय करने का प्रयोग सूर्य से हमारा शरीर कैसे ऊर्जा ग्रहण करें तथा पेट की अग्नि को जगाने वाला सुबह की संध्या का रसीला नाश्ता के बारे में बताया गया। शिविर में पहुंचे साधकों ने बड़ी तन्मयता के साथ मंच से परम आलय जी को सुना और सूर्य आराधना और भोजन मंत्र के साथ कार्यक्रम का विश्राम हुआ। मनुष्य मिलन साधना शिविर से जुड़े अजय मित्तल कमल सोमानी आलोक जैन एवं आरके नागपाल ने बताया कि  शिविर स्थल पर सभी ने लगभग 15 प्रकार के पोस्टिक ऊर्जावान नाश्ते को ग्रहण किया शिविर में आने वाले नए सदस्यों साधकों के लिए सोमवार को भी रजिस्ट्रेशन आयोजन स्थल पर जारी रहेगा। शिविर के पहले 3 दिनों में शरीर की शक्तियों का आभास अगले 3 दिनों में मन की शक्तियों का आभास उसके बाद अगले 3 दिनों में चेतना की शक्तियों का आभास व दसवें दिन जितनी भी उर्जा बनाई है उसे ठहराने के महत्वपूर्ण प्रयोग कराए जाएंगे शिविर में पूरे समय 10 दिन तक निशुल्क स्वल्पाहार और शाम को 7 प्रकार के विशेष पेय दिए जा रहे हैं।

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