जूवेनाइल जस्टिस को समझने एवं बच्चों के साथ व्यवहार के लिए अनौपचारिक प्रणाली की आवश्यकता : - अशोक जैन - Pinkcity News

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Monday, 27 May 2019

जूवेनाइल जस्टिस को समझने एवं बच्चों के साथ व्यवहार के लिए अनौपचारिक प्रणाली की आवश्यकता : - अशोक जैन

  • प्रयास जेएसी सोसायटी द्वारा ‘चाइल्ड प्रोटेक्शन एंड डीलिंग विद चिल्ड्रन इन कॉन्टेक्ट विद रेलवेज‘ विषय पर दो दिवसीय कार्यशाला की हुई जयपुर में शुरूआत
  • रेलवे कर्मचारियों को दी जा रही है बाल अधिकारों के महत्व की जानकारी
जयपुर, 27 मई। बच्चों की देखभाल एवं सुरक्षा की जरूरत के संदर्भ में हमें अपना व्यवहार बदलने की अत्यंत आवश्यकता है। जूवेनाइल जस्टिस को समझने के लिए न्याय प्रणाली की औपचारिक अथवा पारम्परिक प्रक्रियाओं के स्थान पर अनौपचारिक प्रणाली की आवश्यकता है। यह कहना था राजस्थान स्टेट  लीगल सर्विसेज अथॉरिटी (आरएसएलएसए) के मेंबर सेक्रेटरी, अशोक के. जैन का। वे आज जयपुर में एनजीओ प्रयास जेएसी सोसाइटी द्वारा ‘चाइल्ड प्रोटेक्शन एंड डीलिंग विद चिल्ड्रन इन कॉन्टेक्ट विद रेल्वेज‘ विषय पर आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला के उद्घाटन समारोह में सम्बोधित कर रहे थे।
जैन आगे बताया कि देखभाल एवं संरक्षण की आवश्यकता वाले 29 प्रतिशत बच्चों की उम्र 5 वर्ष तक होती है और 28 प्रतिशत बच्चे 6 से 10 वर्ष की आयु समूह के हैं। मिसिंग होने वाले बच्चे आमतौर इस समूह के होते हैं। इसी प्रकार 27 प्रतिशत बच्चे 11 से 15 वर्ष की आयु के होते हैं और घरों से भागने वाले प्रत्येक 3 बच्चों में से एक बच्चा इस आयु समूह में आता है। श्री जैन ने शेष 16-17 प्रतिशत बच्चे, जो कि 16 से 18 वर्ष की आयु वर्ग में आते हैं, से डील करने में करुणा और सहानुभूति की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया। देखभाल एवं संरक्षण की आवश्यकता वाले ये बच्चे आमतौर पर आक्रामक पाए जाते हैं।
प्रिंसिपल चीफ सिक्योरिटी कमिश्नर, रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स (आरपीएफ), सर्वप्रिय मयंक ने कहा कि देश में बच्चों की बड़ी आबादी के अतिरिक्त आर्थिक पिछड़ेपन जैसे कारणों की वजह से बच्चे अपने परिवारों का सहयोग करने के लिए अक्सर काम की तलाश में अन्य राज्यों में चले जाते हैं। उन्होंने बताया कि देखभाल एवं संरक्षण की आवश्यकता वाले ऐसे बच्चे जो आरपीएफ के सम्पर्क में आते हैं, उनमें से 60 प्रतिशत बच्चों को उनके परिवारों के साथ फिर से जोड़ दिया गया है।

प्रयास जेएसी सोसाइटी के जनरल सेक्रेटरी, आमोद के. कांत ने कहा कि 2016-17 के पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार भारत में लगभग एक लाख बच्चे प्रतिवर्ष लापता हो रहे हैं। रेलवे स्टेशन इन बच्चों के लिए एक प्रमुख आश्रय होते हैं। ऐसे में रेलवे सुरक्षा बल के अधिकारियों के लिए यह आवश्यक है कि वे रेलवे स्टेशनों पर इन बच्चों की पहचान करें और उन्हें हेल्पलाइन, चाइल्ड वेलफेयर कमेटी (सीडब्ल्यूसी) तथा ऐसे अन्य माध्यमों के सहयोग से इनका बचाव करें। इससे बाल तस्करी रोकने में मदद मिलेगी।

उन्होंने आगे बताया कि रेलवे के संपर्क में आने वाले असहाय बच्चों की देखभाल करने एवं उन्हें सुरक्षा प्रदान करने की दिशा में कार्य करने के लिए रेल्वे बोर्ड एवं प्रयास जेएसी सोसाइटी के मध्य एक एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए हैं।

डिपार्टमेंट फॉर चाइल्ड राइट्स, राजस्थान के डायरेक्टर, निष्काम दिवाकर ने कहा कि नेशनल चाइल्ड प्रोटेक्शन कमीशन जैसे संगठन बच्चों के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में कार्य कर रहे हैं। जूवेनाइल जस्टिस एक्ट एवं पोस्को एक्ट जैसे कानून भी बच्चों के संरक्षण की गारंटी देते हैं।

वर्कशॉप के आरम्भ में प्रयास जेएसी सोसाइटी की डायरेक्टर, इंदु रानी सिंह ने स्वागत भाषण में कहा कि रेलवे कर्मियों को बच्चों के अधिकारों एवं बाल संरक्षण के महत्व की जानकारी देना इस कार्यशाला का उद्देश्य है। यह कार्यशाला रेलवे अधिकारियों को रेलवे के सम्पर्क में आने वाले बच्चों के प्रभावी प्रबंधन हेतु एक कार्यप्रणाली विकसित करने में सक्षम बनाएगी।

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