भागवत कथा में हुए रासलीला पर प्रवचन - Pinkcity News

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Thursday, 2 May 2019

भागवत कथा में हुए रासलीला पर प्रवचन

जयपुर। पानों का दरीबा स्थित शुक संप्रदाय की प्रधान पीठ श्रीसरस निकुंज में आचार्य शुकदेव जयंती महोत्सव के तहत चल रही भागवत कथा में गुरुवार को रासलीला पर प्रवचन हुए। शुक संप्रदाय पीठाधीश्वर अलबेली माधुरी शरण महाराज के सान्निध्य में व्यासपीठ से कथावाचक महंत मदन मोहनदास ने कहा कि अभिमान जीव के पतन का कारण है। भगवान ने किसी के अभिमान को सहन नहीं किया। न अपने भक्त का और न दुश्मन का। इसलिए अभिमान को भूलकर प्रभु की भक्ति करनी चाहिए।
 गिर्राज धरण लीला में उन्होंने कहा कि ठाकुरजी ने हमें प्रकृति का पुजारी बनने की प्रेरणा दी है। पेड़-पौधे-पहाड़-नदी-नाले ये सब प्रकृति की सुंदरता बढ़ाते हंै। हमें इनकी रक्षा और सुरक्षा करनी चाहिए। इस अवसर पर छप्पन भोग की झांकी भी सजाई गई।
रासलीला को जीव और ब्रह्म के मिलन की लीला बताते हुए उन्होंने कहा यह आत्मा और परमात्मा के संयोग का प्रसंग है। उद्धव प्रसंग में उन्होंने कहा कि जो भगवान के प्रेम बंधन में बंध जाता है उसके समक्ष निगुण ज्ञान की बातों  का  कोई अर्थ नहीं रह जाता। उद्धवजी ने गोपियों को समझाया कि कृष्ण तो निराकार है, उन्हें ज्ञान से ही प्राप्त किया जा सकता है। लेकिन गोपियों ने कृष्ण से सगुण प्रेम किया था। वे तो उन्हें उसी रूप में देखना चाहती थीं। कृष्ण के प्रति अगाध प्रेम देखकर उद्धवजी भी निगुण उपासक से सगुण उपासक हो गए। सरस परिकर के प्रवक्ता प्रवीण बड़े भैया ने बताया कि शुक्रवार को सुदामा चरित्र, कलियुग वर्णन, नवयोगेश्वर संवाद, 24 गुरुओं की कथा, परीक्षित मोक्ष के प्रसंग के साथ कथा का विश्राम होगा। चार मई को आचार्य जयंती मंगल महोत्सव के अन्तर्गत दोपहर बारह से शाम छह बजे तक बधाईगान-नृत्य होगा। रात्रि आठ बजे से दूसरे दिन सुबह पांच बजे तक वाणी पाठ, बधाईगान और आचार्य विनय के पद होंगे।

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