‘‘राजस्थान के सात डिवीजनल हैडक्वाटर्स में राज्य की कुल सड़क दुर्घटनाओं में से 50 प्रतिशत मौतें‘ - Pinkcity News

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Saturday, 18 May 2019

‘‘राजस्थान के सात डिवीजनल हैडक्वाटर्स में राज्य की कुल सड़क दुर्घटनाओं में से 50 प्रतिशत मौतें‘


अब राजस्थान के सभी 33 जिलों में सक्रिय है मुस्कान एनजीओ


जयपुर, 18 मई। सड़क सुरक्षा के क्षेत्र में कार्यरत जयपुर के फाउंडेशन ‘मुस्कान फॉर रोड़ सेफ्टी‘ की ओर से राजस्थान के सभी 33 जिलों में राज्यव्यापी सड़क सुरक्षा अभियान चलाया गया। इस मुहिम के तहत राज्य के सभी 33 जिलों में सड़क सुरक्षा कार्यशालाओं का आयोजन किया गया। इनका उद्देश्य राजस्थान के प्रमुख शहरों में रोड सेफ्टी वॉलेंटियर्स तैयार करना और सड़क सुरक्षा को बढ़ावा देना था। गौरतलब है कि राज्य के 33 जिलों में वे सात डिवीजनल हैडक्वार्टर भी शामिल है जिनमें सड़क दुर्घटना मृत्यु की दर अधिक है। यह दर राजस्थान परिवहन विभाग की रिपोर्ट के अनुसार राजस्थान राज्य में हो रही सालाना दुर्घटना मृत्यु संख्या का 50 प्रतिशत है। मुस्कान की प्रोजेक्ट डायरेक्टर, सुश्री नेहा खुल्लर ने आज यह जानकारी दी।
खुल्लर ने आगे बताया कि जानलेवा दुर्घटनाओं की बढ़ती संख्या को ध्यान में रखते हुए मुस्कान संस्था की ओर से सम्पूर्ण प्रदेश में पुलिस और इंडस टावर्स लिमिटेड के साथ मिलकर काम किया जा रहा है। कार्यक्रम के अंतर्गत पहले वॉलेंटियर्स के लिए तीन घंटे की कार्यशालाएं आयोजित की गई और फिर रोड कैम्पेन किए गए। सम्पूर्ण राज्य में कार्य करने वाले ये 800 वॉलेंटियर्स इंडस टावर्स लिमिटेड के कर्मचारी थे। इन इंटरेक्टिव वर्कशॉप्स के दौरान सिर में लगने वाली घातक चोटों से बचाव के लिए हेलमेट के उपयोग करने, सीट बैल्ट लगाने तथा यातायात नियमों का पालन करने पर मुख्य रूप से जोर दिया गया और तेज गति एवं शराब पीकर वाहन चलाने से बचने की सलाह दी गई।
इसके साथ ही संशोधित मोटर वाहन अधिनियम के दंड तथा सड़क दुर्घटना के नकारात्मक शारीरिक और वित्तीय प्रभावों के बारे में संक्षिप्त जानकारी दी गई। इस दौरान वाॉलेंटियर्स को गुड सेमेरिटन लॉ के बारे में भी बताया गया, जो सड़क दुर्घटनाओं के पीड़ित व्यक्तियों की मदद करने वालों का बचाव करता है। 
दूसरे चरण में प्रशिक्षित वॉलेंटियर्स द्वारा यातायात पुलिस के सहयोग से शहर के प्रमुख चौराहों पर सड़क अभियान चलाया गया। इसमें वाहन चालकों को हैलमेट एवं सीट बेल्ट की महत्ता को समझाने के लिए बैनर, पोस्टर और पारस्परिक संचार का उपयोग किया गया। कार्यशालाओं को रूचिकर बनाने के लिए विडियो, परस्पर परिचर्चा, लघु फिल्मों और साइंटिफिक तथ्यों तथा गेम्स का उपयोग किया गया।
 

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