पदमप्रभ के जयकारों की दिव्य गूंज के साथ 3 संघों के 17 संतों का पदमपुरा में आध्यात्मिक मंगल प्रवेश - Pinkcity News

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Thursday, 2 May 2019

पदमप्रभ के जयकारों की दिव्य गूंज के साथ 3 संघों के 17 संतों का पदमपुरा में आध्यात्मिक मंगल प्रवेश

संघों का अलौकिक मंगल मिलन हुआ, 8 मई से पांच दिवसीय हीरक जयंती महामहोत्सव

जयपुर। जैन तीर्थ अतिशय क्षेत्र बाड़ा पदमपुरा एक बार फिर संतो की अगवानी और महा मंगल मिलन का साक्षी बना, इस बार अवसर था अतिशय क्षेत्र के पदमप्रभ भगवान प्रादुर्भाव के 75 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर आयोजित पांच दिवसीय " हीरक जयंती महामहोत्सव "  के आयोजन का जिसका शुभारंभ बुधवार 8 मई से गाजों - बाजों के साथ प्रारम्भ होगा।
जिसमें सानिध्य प्रदान करने आचार्य वसुनंदी महाराज, आचार्य शशांक सागर महाराज एवं गणिनी आर्यिका गौरवमती माताजी ससंघ सहित संघ में विराजमान 17 से अधिक दिगम्बर जैन संतो और आर्यिका माताजीयों का मंगल प्रवेश पदमपुरा की मंगल धरा पर प्रातः 8.15 बजे सम्पन्न हुआ। इससे पूर्व प्रातः 6.30 बजे बाड़ा पदमपुरा के नजदीक स्थित सांभरिया रोड़ से आचार्य संघों और आर्यिका संघ की पदमपुरा जैन समाज की और से आरती एवं पाद प्रक्षालन कर मंगल अगवानी का आयोजन किया गया।
मंत्री हेमंत सौगानी ने बताया कि प्रातः 6.30 बजे सांभरिया रोड़ से संतों की अगवानी की गई, इस दौरान 16 संतों के आध्यात्मिक  मंगल मिलन को देखकर उपस्थित जनसमूह भाव-विभोर हो गए और पदमपुरा की धरा को पदमप्रभ के दिव्य जयकारों की गूंज से गुंजयमान कर दिया। मंगल मिलन के पश्चात बेंड-बाजो, हाथी, घोड़े, ऊँट आदि दिव्य घोष के साथ नाचते - गाते हुए श्रद्धालुओ ने संतो की अगवानी की और मंगल प्रवेश की यात्रा का भव्य स्वागत किया। मंगल प्रवेश के पश्चात सभी संतों ने मूलनायक पदमप्रभ भगवान के दर्शन किये और अर्चना की इस दौरान उपस्थित श्रद्धालुओ ने आचार्य श्री और आर्यिका माताजी ससंघ सानिध्य में पदमप्रभ भगवान के रजत कलशों से कलशाभिषेक एवं शांतिधारा सम्पन्न की।
अध्यक्ष सुधीर जैन ने बताया कि हीरक जयंती महोत्सव को लेकर आज पदमपुरा की धरा संतो का सानिध्य पदमपुरा समिति को प्राप्त हुआ। बुधवार 8 मई को महामहोत्सव का शुभारंभ प्रातः 7 बजे मूलनायक पदमप्रभ भगवान के कलशाभिषेक एवं मुख्य आयोजन सायं : 7.15 बजे 75 दीपों और 75 परिवारों द्वारा विशेष पदमप्रभ भगवान की जिनेन्द्र अर्चना की जाएगी। गुरुवार 9 मई को महोत्सव का मुख्य आयोजन और मुख्य दिवस होने के शुभवासर पर प्रातः 7 बजे से 75 स्वर्ण एवं रजत कलशों एवं परिवारों के पुण्यार्जन से कलशाभिषेक का मुख्य आयोजन आयोजित होगा। इसके बाद प्रातः 9.15 बजे चरण छत्री पर विशेषभिषेक (भू-स्थल जहाँ से पदमप्रभ का प्रादुर्भाव हुआ), 9.30 बजे नवीन जिनालय का लोकार्पण, 9.45 बजे ध्वजयात्रा एवं ध्वजारोहण, दोपहर 1.15 बजे से व्रहद्र पदमप्रभ पूजन आदि का आयोजन होगा। महोत्सव का समापन रविवार 12 मई को देश-विदेश के हजारों श्रद्धालुओं और संतो के तत्वाधान में सम्पन्न होगा।
मीडिया प्रभारी अभिषेक जैन बिट्टू ने बताया कि गुरुवार को मंगक प्रवेश के दौरान समाजसेवी ज्ञानचंद झांझरी, कोषाध्यक्ष  वास्तुविद राजकुमार कोठयारी, एडवोकेट जितेंद्र मोहन जैन, राजकुमार सेठी, अजीत पाटनी, सुरेश काला, कमल काला, संतोष रांवका, एकता संघ अध्यक्ष अभिषेक जैन, प्रदेश अध्यक्ष प्रमोद बाकलीवाल, जितेंद्र गंगवाल, महावीर कासलीवाल, महावीर पाटनी, योगेश टोडरका, अरुण जैन आदि सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की उपस्थिति में मंगल प्रवेश हुआ। मंगल प्रवेश के पश्चात प्रातः 8.30 बजे शोभायात्रा भव्य धर्मसभा में तब्दील हो गई जिसने अध्यक्ष सुधीर जैन ने स्वागत उद्बोधन के साथ प्रारम्भ किया और गणिनी आर्यिका गौरवमती माताजी, आचार्य शशांक सागर महाराज एवं आचार्य वसुनंदी महाराज ने मंगल उद्बोधन देकर श्रद्धालुओ को आशीर्वचन प्रदान किया और हीरक जयंती में सम्मिलित होने का सभी श्रद्धालुओ को आशीर्वाद प्रदान किया।
 

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