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Sunday, 5 May 2019

वर्ष 2025 तक 200 लाख टन सरसों उत्पादन का लक्ष्य

  • एसईए रेपसीड-मस्टर्ड कॉन्क्लेव-2019 सम्पन्न
    क्लाइमेट चेंज के दौर में अधिकाधिक पौधारोपण पर जोर
    तिलहन-सरसों उत्पादन के लिए सरकार नई नीति निर्धारण करे
    मस्टर्ड कॉन्क्लेव का सरकार से मल्टी स्टेक होल्डर कमेटी बनाने का अनुरोध

जयपुर, 05 मई 2019। द सॉल्वेन्ट एक्सट्रेक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इण्डिया (एसईए) एसईए-रेपसीड-मस्टर्ड प्रमोशन काउन्सिल के सानिध्य में तीसरे सीज रेपसीड-मस्टर्ड कॉन्क्लेव में आज एक बात उभर कर आई कि यदि भारत को खाद्य तेल निर्यात से बचाना है तो वर्ष 2020  तक 100 लाख टन और वर्ष 2025 तक 200 लाख टन सरसों उत्पादन का लक्ष्य रखना होगा। वर्तमान में देश में 7॰ प्रतिशत निर्भरता आयातित खाद्य तेलो पर है।
रेपसीड-मस्टर्ड कॉन्क्लेव-2019 में अपने उद्घाटन भाषण में एसईए अध्यक्ष अतुल चतुर्वेदी ने आगंतुक अतिथियों का स्वागत करते हुए यह बात पटल पर रखी। उन्होंने कहा ‘‘जैसा कि हम जानते हैं आज भारत का खाद्य तेल आयात 70 प्रतिशत तक पहुंच चुका है। ऐसे में कम पानी में उपजने के कारण सरसों उत्पादन की अत्यधिक संभावनाएं हैं।‘‘
उन्होंने कहा कि सरसों मौसम के अनुकूल फसल है जिसकी पैदावार कम पानी में भी हो जाती है साथ ही इसका शहद उत्पादन में भी काफी योगदान है। उन्होंने कहा कि 80 के दशक में भारत सरकार द्वारा तिलहन मिशन लॉन्च किया गया जिसका मकसद एक ऐसा रोडमैप तैयार करना था कि उनकी सिफारिशों को राज्य सरकार त्रि*यान्वित करे मस्टर्ड टेक्नोलॉजी मिशन ने सरकार के अलावा निजी भी इसमें शामिल किया ताकि इसकी विशेषज्ञता का लाभ सभी को मिल सके। इस मिशन ने सरसों के बीज की गुणवत्ता में भी सुधार किया। उनका कहना था कि आज के वक्ताओं के विचार सरसों उत्पादन में वृद्धि में मददगार होंगे और आशा है कि मौजूदा प्रयासों से हम वर्ष 2020 तक 100 लाख टन और वर्ष 2025 तक 200 लाख टन सरसों उत्पादन का लक्ष्य हासिल कर लेंगे तथा हमें निर्यात पर कम निर्भर रहना होगा।
सम्मेलन के मुख्य अतिथि एन.बी.गोदरेज प्रंबध निदेशक, गोदरेज इण्डस्ट्रीज लिमिटेड, मुम्बई ने सरसों उत्पादन के महत्व पर प्रकाश डालते काव्यात्मक शैली में अपनी बात रखते हुए कहा आज सरसों का उत्पादन दुगुना करने वाला किसान और तेल उत्पादक सही मायने में ‘‘हीरो‘‘ है। सरसों एवं तिलहन उत्पादन में हमें आत्म निर्भर होना होगा ताकि आयात पर निभरता घट सके।
पूर्व कृषि सचिव भारत सरकार सिराज हुसैन ने कहा कि भारत सरकार के सम्बद्ध विभाग की ओर से वर्ष 2॰18 में जारी रिपोर्ट पर गौर किया जाए तो साल 2॰॰5 में जहां भारत में गरीबी 55 प्रतिशत थी वह घट कर वर्ष 2॰16 में 28 प्रतिशत रह गई है। गरीबी कम होना यानी तेल की खपत भी बढना है। तिलहन और तेल उत्पादन में अभी व्यापक संभावनाएं हैं। इसके लिए नीति में परिवर्तन जरूरी है, साथ ही हमें उत्पादन भी बढाना होगा ताकि विदेशों पर निर्भरता कम की जा सके।
भारत सरकार के कृषि आयुक्त डॉ. एस.के मल्होत्रा ने कॉन्क्लेव को सम्बोधित करते हुए कहा कि विगत तीन वर्षो में एसईए ने काफी प्रगति की है इसके चर्चा आयोजनों और सरकार को दिए गए सुझावों पर अमल किए जाने से उत्पादन बढा है वहीं नवीन तकनीकों का प्रयोग सरसों उत्पादन में होने लगा है। हमारे सरसों तिलहन उत्पादन के रोडमैप को देखते हुए आशा है कि हम वर्तमान 8.5 मिलियन टन उत्पादन को 2॰ मिलियन टन तक बढाने में सफल होंगे।
किसान नेता एवं चेयरमैन महाराष्ट्र एग्रीकल्चर कॉस्ट एण्ड प्राइस कमिशन महाराष्ट्र सरकार अपनी बेबाक टिप्पणी के लिए काफी लोकप्रिय रहे हैं और विगत तीन वर्षो से इस कॉन्क्लेव में भाग ले रहे पाशा पटेल का कहना था ‘‘ क्लाइमेंट चेंज के समय में यदि हमें अधिक उत्पादन प्राप्त करना है तो हमें अधिकाधिक पौधारोपण करना होगा। जितने अधिक पेड होंगे उतना ही अधिक भूमिगत पानी बढेगा। अपना उदाहरण देते हुए उनका कहना था कि उन्होंने अपने गांव में एक लाख नीम के पौधे रोपे हैं। पेड न केवल मौसम में परिवर्तन लाते हैं अपितु वर्षा जल को सीधे भूमि के भीतर पहुंचाने में मददगार होते हैं। सरसों-तिलहन उत्पादन बढाने के लिए उनका यह भी कहना था कि कस्टमर, किसान, प्रोड्यूसर और सरकार के साथा प्रयासों की जरूरत है।
इसके बाद पहले सत्र में अतिथियों तथा प्रायोजक को स्मृति चिन्ह प्रदान किए गए। धन्यवाद की रस्म अदा करते हुए एसईए-रेपसीड-मस्टर्ड प्रमोशन काउन्सिल के संयोजक विजय डाटा ने सरकार से समर्थन मूल्य पर किसानों से सरसों एवं तिलहन खरीद मं सहयोग की अपील की एवं चेतावनी दी कि यदि उत्पादन बढाने पर भी यदि किसान को उचित मूल्य नहीं मिला तो सारे प्रयास विफल हो जाएंगे।
कॉन्क्लेव के दूसरे सत्र में टेक्नोलॉजी एण्ड पॉलिसी इन्टविनेशन रिक्वायरमेंट फॉर इंप्रूविंग मस्टर्ड ऋाॅप प्रोडेक्टिविटी पर चर्चा नबकिसान एण्ड एआरपीएल लिमिटेड विजय सरदाना की अध्यक्षता में की गई चर्चा में उभरे बिंदुओं में मस्टर्ड उद्योग ने सरकार से अनुरोध किया कि एक मल्ट स्टेक होल्डर कमेटी बनाई जाए ताकि सरसों उत्पादन में आ रही कठिनाइयों को दूर किया जा सके, एसईए मस्टर्ड सदस्य और टेक्नोलॉजी कम्पनी जुलाई में एक संगोष्ठी का आयोजन करें ताकि आने वाली सरसों की फसल के लिए कार्ययोजना तैयार की जा सके। इसके अलावा तिलहर और सरसों की नई प्रजातियां विकसित की जाए जिससे किसान और उत्पादक अधिकाधिक खाद्य तेलों का उत्पादन कर सकें। सम्मलेन के अन्तिम सत्र में मस्टर्ड सीड एण्ड ऑयल प्राइस आउटलुक 2॰19 पर भी चर्चा की गई।

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