‘‘जीरो मलेरिया स्टार्ट विद मी‘‘ : मच्छरजनित रोगों पर नियन्त्रण ही सभ्यता विकास का परिचायक: डॉ. देवेन्द्र चौधरी - Pinkcity News

Breaking

Thursday, 25 April 2019

‘‘जीरो मलेरिया स्टार्ट विद मी‘‘ : मच्छरजनित रोगों पर नियन्त्रण ही सभ्यता विकास का परिचायक: डॉ. देवेन्द्र चौधरी

जयपुर । मानव जाति ने हर युग में विकास के नए आयाम छूए हैं लेकिन आज भी मच्छर जनित रोग फैलते हैं और लोग मरते हैं तो निश्चय ही अभी हमारी सभ्यता को और विकसित होना है। हमें अपने दैनिक जीवन के क्रियाकलापों पर पुनर्विचार की आवश्यकता है।  
  गुरुवार को विश्व मलेरिया दिवस के अवसर पर स्वास्थ्य भवन में आयोजित संगोष्ठी में विचार व्यक्त करते हुए सीएमएचओ डॉ. देवेन्द्र चौधरी ने स्वच्छता और सफाई को जीवन में और अधिक प्राथमिकता देने की अपील की। बीसीएमओ डॉ. अनिल वर्मा के अनुसार कभी 10 हजार मलेरिया केस वाले बीकानेर को वर्ष 2018 में 73 और वर्तमान वर्ष के 4 महीनो में  मात्र 2 केस जैसे आंकड़े तक लाने का एहसास जितना सुकून दायक है इसका सफर उतना ही संघर्षपूर्ण रहा है। एक-एक जमीनी स्वास्थ्य कार्यकर्ता ने एंटीलार्वा गतिविधियों में अपना बेस्ट दिया तभी इतने बड़ी राहत आम जन को मिली है। उन्होंने सभी अधिकारी-कर्मचारियों को अपने घर और परिवेश में अधिकाधिक मच्छर मारने और एंटीलार्वा गतिविधियाँ करने की अपील की। डिप्टी सीएमएचओ डॉ. इंदिरा प्रभाकर ने मिशन अगेंस्ट मलेरिया को एक सतत प्रक्रिया की तरह जारी रखने का आह्वान किया। एपिडेमियोलोजिस्ट नीलम प्रताप सिंह के अनुसार मलेरिया के पूर्ण खात्मे के लिए जन सहयोग सबसे जरूरी है। संगोष्ठी में आरसीएचओ डॉ. रमेश गुप्ता, सहायक मलेरिया अधिकारी अशोक व्यास, मनोज आचार्य, उमेश व्यास सहित स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों ने अपने विचार रखे। इस दौरान मच्छरों के लार्वा व उनको खाने वाली गम्बूसिया मछली का प्रदर्शन भी किया गया।

शहर से गाँव तक हुआ जन जागरण
बीकानेर शहरी- ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य केन्द्र प्रभारियों के नेतृत्व में विभिन्न विद्यालयों में जन-जागरूकता गतिविधियाँ की गई। पूरे जिले में शहरी क्षेत्र से लेकर ग्रामीण उपस्वास्थ्य केन्द्रों तक नर्सिंग स्टाफ द्वारा सघन एंटी लार्वा गतिविधियाँ करते हुए मच्छरों की फेक्ट्रीयों को बंद करवाया गया। पशुओं की पानी की कुण्डियों में खाद्य तेल डाला गया और हर सप्ताह इसे दोहराने के साथ-साथ स्वच्छता का संकल्प दिलाया गया।

एंटी लार्वल एक्टिविटी सबसे प्रभावी
    बीसीएमओ डॉ. अनिल वर्मा के अनुसार मच्छरों की रोकथाम का सबसे प्रभावी तरीका होता है एंटीलार्वल एक्टिीविटी, जिसके तहत् मच्छरों को पनपने से ही रोक दिया जाता है। पक्षियों के लिए रखे जाने वाले परिंडों को सप्ताह में एक बार खाली कर उन्हें बर्तन साफ करने वाले झामे से रगड़ कर, साफ कर व सुखाकर मच्छर के अण्डे एवं लार्वा नष्ट कर पुनः भरा जाये। कूलर, फ्रीज के पीछे की ट्रे, गमले, फूलदान इत्यादि हेतु भी यही प्रक्रिया अपनानी जानी चाहिए। इसके साथ ही छत पर रखे टूटे-फूटे सामान, कबाड़-टायर इत्यादि को हटाकर पानी इक्कठा होने से रोका जाये। पानी की टंकी एवं अन्य बर्तनों को ढंक कर रखा जाये जिससे मच्छर उनमें प्रवेश कर प्रजनन न कर सकें।

क्या है मलेरिया ?
‘मलेरिया’ यानी इंसानों में मच्छर जनित रोगों में सर्वाधिक फैलने वाला रोग। शरीर में कंपकंपी वाली तेज सर्दी के साथ तीव्र बुखार, सिरदर्द जैसे लक्षण मलेरिया के सामान्य लक्षण हैं। दरअसल सामान्यतः मलेरिया बुखार जानलेवा नहीं है, लेकिन उपचार में देरी या सही उपचार का न मिल पाना मलेरिया से मृत्यु होने का कारण बन जाता है। मलेरिया रोग का कारण एक कोशिकीय परजीवी ‘प्लाजमोडियम’ है जो मादा एनाफिलीज मच्छर को ग्रसित करता है और ऐसे संक्रमित मच्छर के काटने से यह एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक आसानी से पहुंच जाता है। प्लाजमोडियम परजीवी के 100 से भी अधिक प्रकार मच्छरों को संक्रमित कर सकते हैं और उनके जरिए इनमें से 5 प्रकार के प्लाजमोडियम परजीवी -फेल्सिफेरम, ओवल, वाइवेक्स, मलेरी, नॉलेसी मानव को संक्रमित करते हैंय इन्हीं के आधार पर मलेरिया के रोग के लक्षणों में भी भिन्नता होती है। 

No comments:

Post a Comment

Pages