जेकेके में कला, साहित्य, वन्यजीवों एवं बच्चों के लिए विविध कार्यक्रमों का आयोजन हुआ - Pinkcity News

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Tuesday, 9 April 2019

जेकेके में कला, साहित्य, वन्यजीवों एवं बच्चों के लिए विविध कार्यक्रमों का आयोजन हुआ

  • गोडावण पर फिल्म की हुई स्क्रीनिंग

  • बच्चों ने जेकेके में देखी चिल्ड्रन फिल्म ‘ये है छक्कड़ बक्कड बम्बे बो‘

  • दो दिवसीय जेकेके स्थापना दिवस समारोह ‘निरंत...‘  का हुआ समापन


जयपुर, 9 अप्रैल। जवाहर कला केंद्र (जेकेके) के स्थापना दिवस समारोह ‘निरंत...‘  के तहत इस वर्ष कला, साहित्य, वन्यजीवों एवं बच्चों के लिए विविध कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। फेस्टिवल के तहत आज बच्चों के लिए फिल्म स्क्रीनिंग, डॉक्यूमेंटरी फिल्म ‘इन सर्च ऑफ गोडावण‘, साहित्यिक परिचर्चा, नाटक ‘‘और तमाशा ना हुआ‘‘ एवं क्यूरेटोरियल वॉकथ्रू, आदि का आयोजन किया गया।

बच्चों ने देखी रोमांच एवं मनोरंजन से भरपूर फिल्म ‘ये है छक्कड़ बक्कड बम्बे बो‘
फेस्टिवल में आज बच्चों ने रहस्य, रोमांच एवं मनोरंजन से भरपूर प्रसिद्ध फिल्म ‘‘ये है छक्कड़ बक्कड बम्बे बो‘‘ देखी। जेकेके के कृष्णायन में प्रदर्शित इस फिल्म में जयपुर के विभिन्न स्कूलों के लगभग 150 बच्चों ने भाग लिया। बच्चों ने फिल्म स्क्रीनिंग के दौरान अनेक बार खिलखिला कर अपनी प्रसन्नता व्यक्त की। बच्चों ने फिल्म देखने के बाद बताया कि इस प्रकार के आयोजन में फिर से जेकेके में आना चाहेंगे। यह फिल्म 4 बच्चों, बंदर और कुत्ते की कहानी पर आधारित है। छुटिटयों के दिनों में गणेश अपने दोस्त यशवंत और अपने कुत्ते बीरबल के साथ गांव में मस्ती करता है। गणेेश का कजिन दिलीप मुम्बई से उसके साथ छुटिटयां बिताने आ जाता है तो गणेश का खुशी और बढ जाती है। हालांकि वह दिलीप के साथ आई उसकी छोटी बहन उल्हास को पसंद नहीं करता। उल्हास अपने भाई और उसके दोस्तों के साथ खेलना चाहती है, लेकिन वे उसे भगा देते हैं। तभी इन बच्चो को एक घायल बंदर मिलता है और उल्हास उसे अपने पास रख लेती है। इस प्रकार छक्कड टीम अब पूरी हो जाती है। फिल्म आगे बढ़ती है तो तभी उनके गांव में एक स्मगलर डॉन डगलस आ जाता है जिससे गांव की शांति भंग हो जाती है। गणेश के पिता जो एक साधारण स्कूल मास्टर है, वो डॉन के चक्कर में फंस जाते हैं और फिर ये बच्चे ही उनकी सहायता करते है। 

डूडल वॉल
जेकेके के डोम में आज भी दिन भर डूडल वॉल एक्टिविटी आयोजित की गई। विजिटर्स ने बड़ी संख्या में इसमें हिस्सा लिया और ड्राइंग तथा संदेश के माध्यम से अपने विचार व्यक्त किये।

डॉक्यूमेंटरी फिल्म ‘इन सर्च ऑफ गोडावण‘ का हुआ प्रदर्शन
जयपुर के वन्यजीव प्रेमियों ने आज कृष्णायन गोडावण पर आधारित फिल्म ‘इन सर्च ऑफ गोडावण‘ देखी। अर्न्तराष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कृत इस फिल्म का स्क्रीन प्ले एवं निर्देशन श्री वी.पी. धर द्वारा किया गया है। फिल्मस् डिविजन ऑफ इण्डिया के लिये निर्मित 52 मिनिट अवधि की यह डॉक्यूमेन्टरी फिल्म राज्य पक्षी पर आधारित पहली फिल्म है। आम जन में जागरूकता लाने के लिये इस फिल्म का प्रदर्शन किया गया ताकि तेजी से कम हो रही इस पक्षी की नस्ल को बचाने में सभी का सहयोग लिया जा सके।

‘संचार माध्यम, समाज और साहित्य‘ पर साहित्यिक परिचर्चा

जेकेके के रीडिंग लाउंज में आज ‘संचार माध्यम, समाज और साहित्य‘ विषय पर साहित्यिक परिचर्चा का आयोजन किया गया। इस पैनल डिस्कशन में श्री हरि राम मीणा, श्री राजेन्द्र बोरा एवं सुश्री फाल्गुनी बंसल जैसे राजस्थान के प्रख्यात साहित्यकार, कवि एवं लेखक शामिल हुए। राजस्थानी लेखक एवं साहित्यकार, श्री नंद भारद्वाज इस परिचर्चा का समन्वयन किया। परिचर्चा के आरम्भ में जेकेके के अतिरिक्त महानिदेशक (एडीजी), श्री फुरकान खान ने अपने विचार रखे। परिचर्चा के आरम्भ में श्री फुरकान खान ने कहा कि साहित्य समाज का दर्पण होता है और इसे लोगों तक पहुचांने के लिए संचार माध्यमों का उपयोग किया जाता है। जेकेके द्वारा आयोजित इस परिचर्चा में यह जानने का प्रयास किया जायेगा कि संचार माध्यम किस प्रकार से लोगों का प्रभावित करते हैं। चर्चा के दौरान श्री नंद भारद्वाज ने कहा कि संचार माध्यम में संचार के वे उपकरण आते हैं जो लोगों तक सूचना पहुंचाते हैं - जैसे रेडियो, टीवी, आदि। इन माध्यमों की सहायता से अधिक से अधिक लागों तक अपनी बात पहुंचाई जा सकती है। लेकिन वर्तमान में इन माध्यमों में आए विकार हमारे लिए चिंता का विषय है। श्री राजेन्द्र बोड़ा ने अपने विचार रखते हुए कहा कि वर्तमान प्रिंट मीडिया में पाठकों के लिये स्पेस कम हो गयी है और इसीलिए ज्यादा से ज्यादा लोग सोशल मीडिया से जुड़ रहें है। इससे सभी में पत्रकार होने की होड हो गई है और किसी घटना की सच्चाई जाने बिना जल्द से जल्द जानकारी सोशल मीडिया पर पोस्ट करने का रूझान बढ गया है। श्री हरि राम मीणा ने बताया कि सूचना का उपयोग जन चेतना, शिक्षा तथा मनोरंजन के लिये होना चाहिए। वर्तमान में सूचना को एक्सक्लूजिव बनाने के लिये किसी खबर की सच्चाई गौण हो जाती हैै। इस अवसर पर सुश्री फाल्गुनी बंसल ने बताया कि समुदाय विशेष और व्यक्ति विशेष की खबरों को जिम्मेदारी के साथ दिखाना चाहिए। किसी भी सूचना को फॉरवर्ड करने से पहले यह जान लेना चाहिए की इसमें कोई घपला तो नहीं है।  

नाटक ‘‘और तमाशा ना हुआ‘‘ का हुआ मंचन
थिएटर पसंद करने वाले जयपुरवासियों के लिए रंगायन में राजस्थान के प्रसिद्ध रंगकर्मी भानु भारती द्वारा निर्देशित एवं लिखित नाटक ‘‘और तमाशा ना हुआ‘‘ का मंचन हुआ। 80 मिनिट की अवधि के इस नाटक की पृष्ठभूमि एक अन्य नाटक के मंचन पर आधारित था। प्ले में  रबीन्द्रनाथ टैगोर की 150वीं जन्म जयंती मनाने के लिए एक थिएटर ग्रुप उनके प्रसिद्ध नाटक ‘मुक्तधारा‘ के मंचन की रिहर्सल कर रहा होता है। रिहर्सल के दौरान नाटक के कलाकारों के मध्य वर्तमान दौर में इस नाटक के मंचन की प्रासंंिगकता को लेकर बहस छिड जाती है। यह बहस बढ़ते-बढ़ते टैगोर एवं गांधी की प्रसिद्ध डिबेट और वर्तमान दौर में व्यक्ति की स्वतंत्रता पर जा पहुंचती है। नाटक में बहस के दौरान कलाकार अनेक अहम मुददों पर चर्चा करते है, जैसे कि फराका बैराज और बांग्लादेश की खेती और मछलीपालन पर इसके प्रभाव, उपभोक्तावाद एवं खुली अर्थव्यवस्था के समाज पर असर, गांधी का समाजवाद और मार्क्स का समाजवाद, आदि। कलाकारों के मध्य उठे इस गम्भीर वाद-विवाद और चर्चा के पश्चात् भी यह बहस अधूरी ही रह जाती और नाटक का मंचन नहीं हो पाता।

क्यूरेटोरियल वॉकथ्रू का हुआ आयोजन
कला प्रेमियों के लिए शाम को जेकेके में चल रही प्रदर्शनी ‘एलिप्सिस‘ का क्यूरेटोरियल वॉकथ्रू का आयोजन किया गया। यह वॉकथ्रू प्रदर्शनी के क्यूरेटर, श्री राहाब अल्लाना द्वारा गैलरी 1, 2, 3 एवं कंटेम्परेरी आर्ट गैलरी में आयोजित किया गया। वॉकथ्रू के दौरान रहाब अल्लाना ने एग्जीबिशन के बारे में विस्तार बताते हुए कहा कि ‘एलिप्सिस‘ की भांति यह एग्जीबिशन फोटोग्राफ्स के माध्यम से अतीत एवं वर्तमान और अलंकारिता एवं परिकल्पना के मध्य के अंतराल को दूर करती है। यह प्रदर्शनी फोटोग्राफी की सुंदरता और फोटोग्राफी के पेंटिंग एवं शब्दों के साथ सम्बंधों को जानने में सहायक है।

उल्लेखनीय है कि जवाहर कला केन्द्र के स्थापना दिवस समारोह के तहत दो दिवसीय ‘निरंत...‘ के दौरान बच्चों एवं बड़ों के लिए अनेक गतिविधियां आयोजित की गई। इसमें बच्चों के फिल्मों के प्रदर्शन के अतिरिक्त फोक नृत्य, शास्त्रीय संगीत, सांस्कृतिक, साहित्यिक, वन्य जीवों, नाटक, आदि पर आधारित कार्यक्रम आयोजित किये गये।

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