दो दिवसीय कृषि संकल्प में जुटेंगे पांच सौ से अधिक नवाचारी किसान और कृषि विशेषज्ञ - Pinkcity News

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Sunday, 7 April 2019

दो दिवसीय कृषि संकल्प में जुटेंगे पांच सौ से अधिक नवाचारी किसान और कृषि विशेषज्ञ

  • खेती को लाभकारी बनाने के उपायों पर करेंगे मंथन

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जयपुर, 7 अप्रेल। जयपुर के बिडला सभागार में आगामी 10 व 11 अप्रेल को देष के करीब पांच सौ से अधिक कृषि विषेषज्ञ और नवाचारी किसान जुटेंगे। कृषि क्षेत्र में काम कर रही जानी मानी गैरसरकारी संस्था इंडियन सोसायटी ऑफ एग्री बिजनस प्रोफेषनल्स और ओसीपी फाउण्डेषन मोरक्कों के बैनर तले जयपुर में दो दिवसीय किसान सम्मेलन कृषि संकल्प का आयोजन किया जाएगा।
इंडियन सोसायटी ऑफ एग्री बिजनस प्रोफेषनल्स के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुदर्षन सूर्यवंषी ने यह जानकारी देते हुए बताया कि दो दिवसीय कृषि संकल्प की थीम एनहांचिंग फार्मर्स इनकम थ्रो इंटिग्रेटेड फार्मिंग सिस्टम रखी गई है। इस अवसर पर नवाचारी किसानों को सम्मानित भी किया जाएगा।
ईसेप के मुख्यकार्यकारी सूर्यवंषी ने बताया कि आयोजन का मुख्य उद्देष्य छोटे और मझोले किसानों की आय में बढ़ोतरी पर मंथन करना है। उन्होंने बताया कि संस्थान द्वारा इस दिषा में कर्नाटक और राजस्थान के तीन जिलों में संचालित परियोजनाओं के कार्यों की समीक्षा और अनुभवों को साझा किया जाएगा। इसके साथ ही देष के नवाचारी किसानों और कृषि विज्ञानियों के नवाचारांे और खेती को लाभदायी बनाने के लिए किए जा रहे उपायों पर चर्चा होगी। उन्होंने बताया कि ईसेप और ओसीपी एकीकृत फार्मिंग सिस्टम पर काम कर रही है और किसानों को खेती के साथ ही पशुपालन, मत्स्य पालन,, मृदा स्वास्थ्य, केचुआं खाद का उत्पादन व उपयोग को बढ़ावा देने, कृषि लागत में कमी लाने, रेषम पालन, बागवानी आदि को अपनाने सहित क्षेत्र विषेष की आवष्यकताओं के अनुसार खेती किसानी को लाभकारी बनाने की परियोजनाओं का संचालन करते हुए किसानों को इससे जोड़ा जा रहा है। उन्होंने बताया कि प्रदेष के बारां, बूंदी और सवाई माधोपुर के दो दो तहसीलों में इस परियोजना का संचालन हो रहा है वहीं कर्नाटक में भी परियोजना संचालित हो रही है।
सुदर्षन सूर्यवंषी ने बताया कि ओसीएफ मोरक्को में षिक्षा, प्रषिक्षण, आर्थिक व सामाजिक विकास, समग्र कृषि विकास, धरोहर संरक्षण जैसे क्षेत्रों में काम कर रहा है। उन्होंने बताया कि दोनों ही संस्थाएं समग्र रुप से छोटे किसानों की आय में बढ़ोतरी करेन, कृषि लागत कम करने और कृषि से जुड़े परंपरागत कार्यों से किसानों को जोड़कर उनके जीवन स्तर में सुधार लाने के लिए कार्यरत है। उन्होंने कहा कि इंटिग्रेटेड फार्मिंग सिस्टम से ही किसानों की आय बढ़ाई जा सकती है और किसानों का भला भी इसी में निहित है। एकीकृत कृषि प्रणाली में फसल के साथ ही पशुपालन, मत्स्य पालन, बागवानी और वानिकी आदि को जोड़ने के साथ ही कम संसाधनों से अधिक उत्पादन लेने के लिए किसानों को प्रेरित करती है।  उन्होंने कहा कि परियोजना के उत्साह जनक परिणामों से ही प्रेरित होकर जयपुर में दो दिवसीय संकल्प का आयोजन कर किसानों, कृषि विषेषज्ञों, गैर सरकारी संगठनों और इस क्षेत्र में कार्य कर रहे विषेषज्ञों के साथ ही नवाचारी किसानों के साथ मंच साझा किया जा रहा है। उन्होेंने बताया कि घटती जोत और खेती में अधिक लागत के चलते यह आयोजन और अधिक प्रासंगिक और उपादेय हो जाता है।

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