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Friday, 12 April 2019

जोधपुर लोकसभा सीट पर अशोक गहलोत ही प्रमुख मुद्दा


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जोधपुर 12 अप्रैल । जोधपुर लोकसभा सीट के लिए 29 अप्रैल को मतदान होना है चुनाव मैदान में कांग्रेस के वैभव गहलोत और भाजपा के गजेंद्र सिंह शेखावत सहित कुल 11प्रत्याशी मैदान में है गजेंद्र सिंह शेखावत मोदी सरकार में कृषि राज्य मंत्री हैं जबकि वैभव गहलोत मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के पुत्र हैं तथा डेढ़ दशक से प्रदेश कांग्रेश  में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
जोधपुर लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली 8 विधानसभा क्षेत्रों में से 6 पर कांग्रेस के विधायक हैं जबकि दो भाजपा के खाते में है कांग्रेस के प्रत्याशियों को विधानसभा चुनाव में 668316 मत मिले जबकि भाजपा के प्रत्याशियों ने 8 विधानसभा क्षेत्र में 555769 मत प्राप्त किए।
 इस चुनाव में यद्यपि दोनों ही पार्टियों ने अपनी पूरी ताकत झोंक रखी है तथा राष्ट्रीय और प्रदेश मुद्दों के द्वारा राजनीति गरमा रहे हैं वैभव गहलोत का प्रचार और प्रचार की कमान जोधपुर के बड़े नेताओं ने संभाल रखी है  जबकि गजेंद्र सिंह शेखावत के प्रचार की कमान खुद उनके हाथों है मुख्यमंत्री गहलोत  भी अपने व्यस्त समय में से समय निकालकर जोधपुर में वैभव के प्रचार को गति दे रहे हैं लेकिन जोधपुर के मतदाता का मन अलग ही सोच और समझ रख रहा है।
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत जोधपुर लोकसभा क्षेत्र से 1998 तक 5 बार सांसद चुने गए आमजन का कहना है कि जोधपुर का बहु आयामी विकास अशोक गहलोत का जादू है गहलोत के बाद जोधपुर ने 4 सांसद चुनें परंतु गहलोत का कोई सानी नहीं ।यहां के मतदाताओं का कहना है कि गहलोत ने यहां के विकास का ध्यान रखा, आमजन की सुविधाओं का ध्यान रखा, दुनिया में हो रहे बदलाव का ध्यान रखा और कहीं भी किसी भी मोर्चे पर जोधपुर को कमजोर नहीं होने दिया यही कारण है कि जोधपुर का नाम अब देश के अग्रणी शहरों में रहता है।
भाजपा सांसद गजेंद्र सिंह शेखावत अपने 5 साल के कार्यकाल में जोधपुर के लिए कोई विशेष उपलब्धि नहीं करवा पाए जयपुर और दिल्ली में अपनी पार्टी की सरकार होने के बावजूद मारवाड़ की लाइफ लाइन साबित होने वाली रिफाइनरी का अटका रहना मारवाड़ को 5 साल पीछे की ओर धकेल गया ,गजेंद्र सिंह शेखावत अपनी सरकार से जोधपुर का नाम स्मार्ट सिटी की सूची में भी शामिल नहीं करवा पाए उन्होंने जोधपुर के नाम कटने का विरोध तक नहीं जताया जबकि गहलोत ने अपनी सरकार नहीं होने के बावजूद दिल्ली तक दबाव बनाया वे जानते थे कि स्मार्ट सिटी के बड़े बजट से जोधपुर में वह सब काम कराया जा सकेंगा जो इसके विकास के लिए आवश्यक है 1998 में पहली बार राज्य के मुख्यमंत्री बनने से लेकर 2018 में तीसरी बार मुख्यमंत्री बनने से अब तक जोधपुर शहर की तीनों विधानसभा सीटों जोधपुर शहर सूरसागर तथा सरदारपुरा से गहलोत का लगातार संपर्क बना हुआ है जबकि  इन 20 वर्ष में उनका लोकसभा की शेष 5 विधानसभा क्षेत्रों से संपर्क कम हो गया ऐसा इन क्षेत्रों के बाशिंदों का कहना है और अब वे चाहते हैं कि गहलोत से उनका संपर्क वापस बने और क्षेत्र का प्रदेश स्तर पर और दिल्ली स्तर पर विकास हो क्योंकि गहलोत जी खुद मुख्यमंत्री हैऔर दिल्ली में यूपीए की सरकार बनने के बाद वे वहां से जोधपुर के लिए कुछ भी कर वाने में समर्थ रहेंगे।
जोधपुर के बाशिंदो को मालूम है कि इस चुनाव में वैभव गहलोत की विजय के कई मायने रहेंगे मुख्यमंत्री गहलोत का कद बढ़ेगा उनकी मारवाड़ पर पकड़ साबित होगी तथा आम जन को भी उनके नजदीक जाने का अवसर मिलेगा।
यही कारण है कि इस लोकसभा क्षेत्र में ना तो कोई जातिगत समीकरण बन रहा है ना कोई पार्टी का रंग चढ़ा है भाजपा के लोग भी चाह रहे हैं  की गहलोत की स्थिति मजबूत हो और जोधपुर लोकसभा क्षेत्र का वे पूरे मनोयोग के साथ विकास करा पाए।

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