'51 वेदी श्री यज्ञ' का आयोजन 13 अप्रैल को - Pinkcity News

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Monday, 8 April 2019

'51 वेदी श्री यज्ञ' का आयोजन 13 अप्रैल को


समृद्धि प्राप्ति और वातावरण में फैली अशुद्धियों के शमन हेतु श्री यज्ञ का आयोजन


जयपुर, 8 अप्रैल। नवरात्रि माने ऋतु परिवर्तन का सन्धिकाल इस दौरान हमारे चारों ओर नई ऊर्जा अपने चरम पर होती है ..विचारों की शुद्धि के साथ ही वातावरण शुद्धि कर हम  सब गुलाबी नगर वासी समृद्धिशाली हो इस उद्देश्य से चैत्र नवरात्री की नवमी के अवसर पर 13 अप्रैल को '51 वेदी श्री यज्ञ' का आयोजन किया जा रहा है। भवानी सिंह रोड स्थित पणिग्रह गार्डन में आयोजित हो रहे इस कार्यक्रम से जुड़ी प्रेस वार्ता का आयोजन सोमवार को किया गया। जहां मंत्रज्ञ और ज्योतिर्विद श्री निर्मला सेवानी ने यज्ञ से मिलने वाले गुणों के बारे में जानकारी दी। वार्ता के दौरान इंटरनेशनल ऑथर और निर्मला सेवानी पर बायोग्राफी लिख रही लेखिका एनी मिलर, सोशल एक्टिविस्ट दिव्य बल्दुआ, इवेंट ऑर्गनाइज़र गुंजन सिंघल भी मौजूद रहे। 
सेवानी ने बताया कि जयपुर में ये यज्ञ पांचवी बार आयोजित किया जा रहा है। 55 मिनट के इस यज्ञ के लिए एक साथ 51 वेदियों की स्थापना की जाएगी और प्रत्येक वेदी पर 6 यजमान एक साथ यज्ञ की आहुतियां देंगे। 13 अप्रैल को आयोजित हो रहे कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर राजस्थान के युवा और खेल मामलों के मंत्री अशोक चांदना शिरकत करेंगे। कार्यक्रम में उपस्थित लोग विभिन्न वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच शरीर के साथ ऊर्जा केंद्रों को जागृत कर स्वस्थ वातावरण और स्वस्थ मन की अवधारणा करेंगे।
यज्ञ की सामग्री में गंध को अधिक महत्व दिया गया है, जिसमें इत्र, चन्दन लकड़ी, घी, फूल इत्र मिश्रित सुगन्धित आहुतियां, विभिन्न प्रकार के सुगन्धित सामग्रियों से निर्मित चीज़ों का ही इस्तेमाल किया जाएगा। जिसके साथ औषधियों का  उपयोग कर समाज और वातावरण में फैली अशुद्धियों के शमन के लिए इस यज्ञ का महत्त्व है। जहां एक मनुष्य अपनी तपस्या के साथ खुद के भीतर जा स्वयं को परिष्कृत करता है। 'श्री' का अर्थ समृद्धि है, एक मनुष्य के जन्म से मृत्यु तक जितने भी कार्य मनुष्य करता है उन सबकों करने के लिए पदार्थ की अवश्यकता होती है। उन सभी पदार्थों को 'श्री' कहा गया है। मनुष्य शरीर भी ऐसे ही पदार्थों से निर्मित है। ऐसे में पंच तत्व मानव शरीर को 'श्री' बनाते है।
मंत्रज्ञ सेवानी आगे बताती हैं कि नवरात्र के दौरान इस मन्त्र का महत्व इसलिए बढ़ जाता है क्योंकि ऋतू परिवर्तन के कारण वातावरण में नई ऊर्जा का संचारण होता है। यश, समृद्धि, ऐश्वर्य, सौंदर्य, कीर्ति, वैभव से साक्षात् परिचय कराने हेतु मन्त्रों का बार-बार उच्चारण किया जाएगा। समूह में यज्ञ करने का महत्व- जिस प्रकार एक प्रकाश कण तिमर दूर नहीं कर सकता किन्तु उस के साथ जब असंख्य प्रकाश कण जुड़ जाते है तब घोर अँधियारा प्रकाशपुंज में बदल जाता हैं ! तो आये ओर अपने भीतर और अपने चारों ओर प्रकाशित ओर समृद्ध हो!

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