’मौलिक अधिकार व कर्तव्य एक दुसरे के पूरक है’ - Pinkcity News

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Thursday, 28 March 2019

’मौलिक अधिकार व कर्तव्य एक दुसरे के पूरक है’

जयपुर । गांधी अध्ययन केन्द्र राजस्थान विश्वविद्यालय जयपुर एवं राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग नई दिल्ली के तत्त्वावधान में दिनांक 28 मार्च 2019 को मानव अधिकारों की आधारभूत संकल्पना एवं गांधी दर्शन विषयक राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया गाया। कार्यशाला में राजस्थान मानवाधिाकार के पूर्व सदस्य व से.नि. आई.पी.एस डॉ. एम. के. देवराजन, प्रो  अमरजीत सिंह नारंग (इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय खुला विश्वविद्यालय, नई दिल्ली) डॉ. श्याम सुन्दर बिस्सा (से.नि. आई.ए.एस. वीजिटिंग प्रोफेसर, एच.सी.एम. रीपा, जयपुर) प्रो. आनन्द कश्यप, डॉ. मीनाक्षी हुजा (से.नि. आई.ए.एस.) न्यायमूर्ति जे.के. राका से.नि. न्यायाधिपति राजस्थान उच्च न्यायालय उपस्थित रहे।
गांधी अध्ययन केन्द्र के निदेशक डॉ. राजेश कुमार शर्मा ने बताया वर्तमान वैश्विक व स्थानीय ज्वलंत मुद्दे जो कि मानवाधिकारों की स्थापना के लिए मुख्य चुनौति के रूप में विधमान है जैसे आतंकवाद, नक्सलवाद, महिला उत्पीडन, अल्प संख्यकों की सुरक्षा जातीय मुद्दे जिनकी की सुरक्षा के लिये अर्न्तराष्ट्रीय, राष्ट्रीय, राज्य मानवाधिकार कार्यरत है। प्र्रो. अमरजीत सिंह नांरग ने अपने उद्बोधन में मानवाधिकारों की संकलपना को बताया। नैतिक व वैदानिक आधारों पर इसे लागू किये जाने पर बल दिया। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग का गठन व्यक्तियों के सामाजिक आर्थिक राजनीतिक न्याय की रक्षा के लिए किये गया है।  डॉ. एम. के देवराजन ने मानवाधिकारों के सन्दर्भ में जीवन, स्वतंत्रता, सामनता व गरिमा के अधिकार लागू किये जाने चाहिए। दलित, अल्पसंख्यक व कमजोर वर्ग के अधिकारों को लागू करने के लिए सरकारी मशीनरी को प्रमुख भूमिका निभानी होगी। डॉ. श्याम सुन्दर बिस्सा ने बताया कि गांधीवादी आदर्श आधुनिक सन्दर्भ में मानवाधिकारों को लागू करने में कारगर सिद्ध हो सकतें है। गांधीजी के एकादश मंत्र, सर्वधर्म समभाव, सत्य, अहिंसा, सत्याग्रह, की अवधारणा वसुधेव कुटुम्बकम की स्थापना के लिए आवश्यक है।
डॉ. मीनाक्षी हुजा ने कर्तव्य व अधिकारों की सम्पूर्वकता पर बल दिया। वर्तमान में खाघ सामग्री में मिलावट जीवन रक्षा के लिए चुनौति है। इसके लिए ना केवल सरकारों वरन् व्यक्ति व समुदाय को भी जागृत होना होगा। न्यायमूर्ति जे.के. राका ने न्याय की अविलम्ब व समय पर प्राप्ति पर बल दिया । विंग कमान्डर अभिनन्दन की पुनः वतन वापसी वियेना कन्वेंशन के लागू के होने के कारण ही सम्भव हो पायी।
प्रो. आनन्द कश्यप ने बताया कि वर्तमान कि एक सभ्य समाज के लिए अधिकारों की रक्षा प्रत्येक स्तर पर क्रियान्वित होनी चाहिए।
       कार्यक्रम में डॉ. मोहित, सुमन मौर्य डॉ. मीता शर्मा, डॉ. अभिषेक कुमार तिवारी, डॉ. सन्जूला थानवी, डॉ. नेहा शर्मा, सुमन मौर्य ने मंच संचालन किया व डॉ. मुकेश कुमार वर्मा ने धन्यवाद ज्ञापित किया।

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